Saturday, 19 January 2019

जादुई डिब्बा

बहुत समय पहले किसी गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था। रवि के माता-पिता का निधन हो चुका था इसलिए वो अपनी चाची के साथ रहता था। रवि अपनी चाची से बहुत प्यार करता था। वो अपनी चाची की घर के सभी कामों में मदद करता था| लेकिन उसकी चाची उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी|

एक दिन चाची ने रवि को घर से निकालने की योजना बनाई और रवि से कहा, “बेटा, मैं कुछ दिनों से बहुत बीमार हूँ| कुछ दिनों तक काम पर नहीं जा पाऊँगी। इसलिए हो सके तो तुम मेरे भाई के खेत में काम करने चले जाओ|” रवि बोला, “मैं कल ही आपके भाई के घर चला जाऊँगा|”

रवि अपनी चाची के भाई के घर चला गया। कुछ दिनों में ही रवि समझ गया कि उसकी चाची  का भाई बहुत लालची है| वो रवि से खूब काम करवाता था लेकिन उसे ज़्यादा कुछ खाने को नही देता था| एक दिन रवि खेत में काम कर रहा था तभी उसने रवि से कहा, “ओ लड़के, ज़रा अच्छे से खुदाई कर! नहीं तो आज भी खाना नहीं मिलेगा”!

ये सुनकर रवि बहुत दुखी हो गया भूखा होने के कारण खाने के बारे में सोचते हुए खुदाई करने लगा। तभी खुदाई करते-करते उसे एक डिब्बा मिला। रवि ने जैसे ही उस डिब्बे को खोला तो उसे उस डिब्बे में अलग-अलग प्रकार का खाना मिला| वो सोचने लगा, “इस डिब्बे में इतना सारा खाना भरकर ज़मीन के अंदर किसने गाढ़ा होगा?”|  लेकिन रवि भूखा था इसलिए सोचना बंद किया और खाना खाने लगा| खाना खाकर वो सोचने लगा, “मुझे भूख लगी थी तो मुझे खाना मिल गया, काश उसी तरह मुझे कुछ पैसे भी मिल जाते तो उन पैसों से मैं अपनी चाची की कुछ सहायता कर पाता|” ऐसा कहकर रवि जैसे ही डिब्बा रखकर जाने लगा, उसे डिब्बे में से रौशनी निकलती दिखी| रवि ने डिब्बा खोला| उस डिब्बे में एक सोने का सिक्का था|

“ये क्या?! इसमें तो सोने का सिक्का है! पर अभी तो इसमें खाना था? लगता है शायद यह मन के अनुसार इच्छा पूरी करने वाला कोई जादुई डिब्बा है!”


रवि ने डिब्बे को उठा लिया था और उसे उस आदमी के पास जाने लगा| तभी उसने सोचा, “वो आदमी बहुत ही लालची है. मुझे उसे ये जादुई डिब्बा नहीं देना चाहिए|” ये सोचकर रवि ने डिब्बे को खेत में छुपा दिया| ऐसे ही दिन बीतते गए| एक दिन उस आदमी ने रवि को अपने पास बुलाया और कहा, “मेरे खेत का काम अब खत्म हो चुका है| अब तक तुमने कुछ ज़्यादा तो नहीं कमाया, पर मैं तुम्हें 20 रुपये दे सकता हूँ|”
ये सुनकर रवि को बहुत बुरा लगा पर उसके पास वो जादुई डिब्बा था, इसलिए वो बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया| रवि वहाँ से निकलकर अपनी चाची के घर पहुंचा। घर पहुँचते ही उसकी चाची ने उससे कहा, “आओ रवि बेटा, कितने पैसे कमा कर लाए हो?” रवि ने कहा, “चाची पूरे 20 रुपये!” 20 रूपये की बात सुनकर चाची गुस्से से आग-बबूला हो गई| उसने रवि की जादुई डिब्बे वाली बात सुने बिना ही उसका हाथ पकड़कर खींचा और उसे कमरे में बंद करने के लिए ले जाने लगी| इसी बीच रवि के हाथ से वो जादुई डिब्बा छूट गया और उसमें से रौशनी निकलने लगी| जैसे ही चाची ने डिब्बे से रौशनी निकलती देखी, उसने रवि का हाथ छोड़ा और हैरानी से उस रौशनी की तरफ बढ़ी|

फिर जैसे ही चाची ने डिब्बे को खोला, उस डिब्बे में से एक ज़हरीला सांप निकला और उसने चाची को डस लिया| रवि दौड़ता हुआ उनके पास गया और बोला, “चाची, आप चिंता मत करो| मैं अभी डॉक्टर को लेकर आता हूँ!” रवि भागकर डॉक्टर को बुला लाया। डॉक्टर ने चाची का इलाज़ कर दिया और रवि से बोला, “रवि, अब तुम्हारी चाची ठीक है| अब तुम मुझे मेरी फीस दो, तो मैं चलूँ!”

फीस की बात सुनकर रवि सोच में पड़ गया,“मेरे पास तो सिर्फ 20 रुपये हैं| अब मैं डॉक्टर को पैसे कहाँ से दूँ?” तभी रवि को उस जादुई डिब्बे की याद आई और वो भागकर उस जादुई डिब्बे के पास गया| रवि ने जैसे ही उस जादुई डिब्बे में हाथ डाला, अचानक उस जादुई डिब्बे में बहुत सारे पैसे आ गए| रवि ने सारे पैसे उस डॉक्टर को दे दिए| डॉक्टर ने पैसे लिए और वहाँ से चला गया| ये देखकर चाची को अपनी गलती का एहसास हुआ| उसने रवि को गले से लगा लिया और कहा, “बेटा! मुझे माफ़ कर दो| मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया| लेकिन एक बात बताओ तुम्हारे पास तो केवल 20 रुपये ही थे, फिर तुमने डॉक्टर को इतने सारे पैसे कहाँ से दिए?”

इसपर रवि ने चाची को जादुई डिब्बे के बारे में सबकुछ बताया। चाची जादुई डिब्बे के बारे में जानकर बहुत खुश हुई. और इसके बाद वो दोनों जादुई डिब्बे के साथ ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे|


शिक्षा - हमें कभी लालच नहीं करना चाहिए और हमेशा सबके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए क्योंकि हमें बदले में वही मिलता है जो हम दूसरों के साथ करते हैं|


Click Here >> Hindi Cartoon For More Moral Stories

Tuesday, 15 January 2019

नैतिक कहानियाँ - लोमड़ी का भूत


किसी जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। सभी खुद को एक-दूसरे से ज्यादा समझदार और ताक़तवर मानते थे। इसीलिए - वह सब एक दूसरे से लड़ते - झगड़ते रहते थे। एक दिन, उस जंगल में किसी दूसरे जंगल से लोमड़ी आयी । जंगल में आते ही सबसे पहले वह गीदड़ से मिली , फिर वह तालाब की तरफ बढ़ जाएगी ।
हाथी उस समय तालाब में पानी पी रहा था। लोमड़ी भी वहाँ पानी पीने रुक गई ।

तभी हाथी लोमड़ी की तरफ देखते हुए बोलता है , तुम यहाँ क्या कर रही हो ? यह मेरा पानी पीने का समय है। जाओ यहाँ से।

तभी लोमड़ी बोलती है , यह कैसी बात हुई ? पानी पीने का भी भला कोई समय होता है ?

लोमड़ी की बाते सुनकर हाथी को गुस्सा आ जाता है। वह लोमड़ी की तरफ गुस्से से देखने लगता है। हाथी को गुस्से में देखकर लोमड़ी घबरा जाती है और वहाँ से चली जाती है।

लोमड़ी जैसे ही जंगल के अंदर पहुँचती हैं तो उसे आते हुए सियार देख लेता हैं।

सियार लोमड़ी से बात कर ही रहा होता है , की तभी उसे दूर से हाथी आते हुए दिखाई देता है । हाथी को देखकर सियार वहाँ से चला जाता है और दूर एक पेड़ के पीछे जाकर छुप जाता है ।

इतने में हाथी लोमड़ी के पास पहुँच जाता है और लोमड़ी की तरफ ध्यान न देते हुए अपने आप से बोलने लगता हैं - हे भगवान ! आज तो मैं बहुत थक गया। चलो थोड़ा आराम कर लेता हूँ।
हाथी जैसे ही यह बोलता है, वैसे ही लोमड़ी उसकी सूँड पकड़ कर खींच देती है। जिसकी वजह से हाथी गुस्से में चीख उठता है ।

हाथी गुस्से में यह बोलते हुए जैसे ही नीचे देखता है, तो उसे वहाँ लोमड़ी खड़ी हुई नज़र आती है। लोमड़ी को वहाँ देखकर हाथी बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाता है और उसे अपनी सूँड से ज़ोर से धक्का मारता है। जिसकी वजह से लोमड़ी सीधा एक बड़े पेड़ से जाकर टकराती है। यह सब देखकर सियार डर जाता है और भागकर लोमड़ी के पास जाता है, और लोमड़ी से पूछता है - तुम ठीक तो हो ? तुम्हें कुछ हुआ तो नहीं ?

सियार के बार-बार पूछने पर भी लोमड़ी कोई जवाब नहीं देती है। तभी जंगल के अन्य जानवर भी वहाँ इकठ्ठा हो जाते हैं। लोमड़ी की हालत देखकर सभी जानवर सियार से पूछते हैं।
भालू : यह कौन है ? आज से पहले तो हमने इसे कभी नहीं देखा।




बंदर : अरे भालू भाई, हो सकता है यह किसी दूसरे जंगल से आई हो, पर इसे हुआ क्या है ?

हिरण : यह तो बहुत बुरी तरह से घायल है, हमें इसकी मदद करनी चाहिए।

सभी जानवरों की बात सुनकर हाथी और सियार डर जाते हैं। सियार को उसकी शरारत का और हाथी को उसकी करतूत का डर सताने लगता है। वह दोनों लोमड़ी को अपना दोस्त बता कर वहाँ से ले जाते हैं और नदी के पास दफ़ना देते हैं।

धीरे-धीरे सियार और हाथी भी लोमड़ी के बारे में भूल जाते हैं और सबकुछ पहले जैसा हो जाता है। एक शाम जब हाथी नदी के पास पानी पीने जाता है, तो उसे अपने पीछे किसी के होने का एहसास होता है।
हाथी के बार-बार आवाज़ें लगाने पर भी कोई सामने नहीं आता है। इसलिए वह इसे अपना वहम समझकर नदी का पानी पी कर चला जाता है। कुछ दिन बाद हाथी का वहम डर में बदल जाता है, क्योंकि उसे रोज नदी के पास किसी के होने का एहसास होने लगता है। एक दिन जब हाथी जंगल में बैठा आराम कर रहा होता है, तभी वहाँ सियार आता है , और पूछता है - क्या हुआ हाथी भाई ? इतने परेशान क्यों हो ? सब ठीक तो है ना ?

हाथी : मैं जब भी शाम को नदी पर पानी पीने जाता हूँ, मुझे ऐसा लगता है जैसे कोई मेरे पीछे खड़ा है। लेकिन जैसे ही मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो वहाँ कोई नहीं होता। मुझे तो लगता है, की जंगल में कोई भूत आ गया है।

सियार : यह जरूर तुम्हारा वहम होगा। भूत जैसा कुछ नहीं होता।

यह बोल कर सियार वहाँ से चला जाता हैं। उसी रात जब सियार अपनी गुफा के बाहर घूम रहा होता है, तो उसे अपने सामने किसी की परछाई नज़र आती है।
सियार आवाज़ लगता है , कौन हैं वहाँ ? सामने तो आओ।

सियार के ऐसा बोलते ही परछाई गायब हो जाती है। अगले दिन सियार, हाथी से इस बारे में बात करता है। जिससे दोनों थोड़ा डर जाते हैं और लोमड़ी के भूत के बारे में सोचने लगते हैं। तभी वहाँ जंगल के बाकी जानवर भी आ जाते हैं।

सभी जानवर रात को एक जगह इकट्ठा होते है। सभी जानवर आपस में बातें कर रहे थे, की तभी उन्हें वहाँ एक जानवर की परछाई नज़र आती है । परछाई को देखते ही सभी उठते हैं और उसके पीछे भागने लगते हैं।
तभी शेर बोलता है - कौन हो तुम ? वहीँ रुक जाओ नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूंगा।

शेर के बोलते ही वह परछाई अपनी जगह पर रुक जाती है। उसके रुकते ही सभी जानवर सोचते हैं की वह कोई चोर है, जो जंगल में सभी को डरा कर उनका खाना चुराने आया है। यही सोचते हुए बंदर बोलता है- अच्छा, तो तुम दूसरे जंगल से आये हुये चोर हो ! जो हमारा खाना चुराने के लिए हमें भूत बनकर डरा रहे हो।

यह बोलते हुए जानवर आगे बढ़ रहे होते हैं और जैसे ही वह उस परछाई तक पहुंचते हैं। परछाई वहाँ से ग़ायब हो जाती है। यह सब देखकर सभी जानवर चौंक जाते है और आस-पास देखने लगते है, लेकिन उन्हें वहाँ कोई दिखाई नहीं देता है ।
तभी हाथी बोलता है - जंगल में जरूर कोई भूत ही है, कोई जानवर इतनी जल्दी आँखों से सामने से कैसे ग़ायब हो सकता है ?
तभी सियार भी हाथी की बातों से सहमत हो जाता है , और सियार की बात से सभी जानवर हैरान हो जाते हैं।

इसके बाद सभी जानवर हाथी और सियार की तरफ देखने लगते हैं।तभी उन सब को एक आवाज़ सुनाई देती हैं - (कोई नहीं बचेगा ! सब मरेंगे।)

आवाज़ सुनकर सभी जानवर बुरी तरह डर जाते हैं।तभी भूत से डरा हुआ सियार बोलता हैं।
इसके बाद सभी जानवर बहुत असमंजस में पड़ जाते हैं।और सियार बहुत ज्यादा डर जाता है। वह सारा सच बता देता है। जिसे सुनकर सभी जानवर गुस्से में लाल हो जाते हैं।

तभी परछाई बोलती है - मुझे बस लोमड़ी के लिए इंसाफ चाहिए था, अब आप वह इंसाफ कर ही रहे हैं तो मैं सामने आ सकता हूँ।

परछाई के यह बोलते ही सभी एकदम चौंक जाते हैं, तभी झाड़ियों के पीछे से एक गीदड़ निकल कर आता हैं। जिसे देखकर सभी हैरान रह जाते हैं।

शेर बोलता है, तो तुम सब को भूत बनकर डरा रहे थे। लेकिन तुमने ऐसा क्यों किया ?

गीदड़ : क्योंकि, मुझे लोमड़ी के लिए इंसाफ चाहिए था।वह जब जंगल में नई आयी थी, तो वह सबसे पहले मुझसे मिली थी। लेकिन सियार ने अपनी शरारत और हाथी से बदले की भावना में और हाथी ने गुस्से में उसे मार दिया और आप सभी से झूठ बोल कर उसे नदी के पास ले जाकर दफ़ना दिया। यह सब मैंने देख लिया था, इसीलिए मैंने उसे इंसाफ दिलाने के लिए यह सब किया।

गीदड़ की बात सुनकर शेर को गुस्सा आता है और लोमड़ी के साथ इंसाफ करने के लिए वह सियार और हाथी को जंगल से बाहर निकालने का निर्णय लेता है।

शिक्षा : तो बच्चों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें कभी भी अपने मज़े के लिए किसी का बुरा नहीं करना चाहिए और कभी भी गुस्से में कोई काम नहीं करना चाहिए, क्योंकि गुस्से में किया हुआ काम हमेशा खराब ही होता है।

Click Here >> Hindi Cartoon For More Moral Stories

Friday, 11 January 2019

घमंडी राजकुमारी


किसी राज्य में पृथ्वी सिंह नाम के एक बहुत दयालु राजा का शासन था। राजा की एक बेटी थी जो बहुत सुन्दर थी। उसका नाम जाह्नवी था। जाह्नवी बहुत ही घमंडी थी। उसे अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड था| राजा पृथ्वी सिंह अपनी बेटी के लिए एक योग्य वर की तलाश कर रहे थे। उन्हें लगता था कि एक बार राजकुमारी की शादी हो जाए तो उनके बर्ताव और व्यवहार - दोनों में परिवर्तन आ जाएगा। एक दिन राजा पृथ्वी सिंह ने अपनी बेटी के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया।

दूर दूर से राजा राजकुमारी के स्वयंवर में भाग लेने आए। राजकुमारी जाह्नवी दरबार में आई और एक एक कर सभी राजकुमारों का अपमान करने लगी। पहले राजकुमार के पास पहुँचकर उसने कहा, “यह तो बहुत छोटा है!” फिर वो दूसरे राजकुमार के पास गई और बोली, “यह तो एकदम खम्भे जैसा लंबा है!”

तीसरे राजकुमार को उसने कहा, “यह तो एकदम कद्दू जैसा गोल है|” और फिर आख़िर में वो राजा विक्रम के पास गई और जोर से हँसते हुए बोली, “हाहाहा! इसे देखो तो सही... इसकी दाढ़ी कितनी अजीब और लंबी है। और इसका चेहरा भी कितना लंबा है। इसे तो हम महल में नौकर भी ना रखें।”

ये कहकर राजकुमारी सभी का अपमान करते हुए आगे बढ़ती गई। राजकुमारी के इस व्यवहार से महाराज गुस्से में बोले, “जाह्नवी! आखिर तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इन सभी नेक राजसी पुरुषों का अपमान करने की? अब बहुत हुआ। मैं ऐलान करता हूँ कि कल सुबह जो भी पहला व्यक्ति इस महल के प्रवेश द्वार में सबसे पहले प्रवेश करेगा... तुम्हारी शादी उसी से करवा दी जाएगी। फिर चाहे वह कोई राजा हो या कोई नौकर!” महाराज का एलान सुनकर राजकुमारी अचम्भित रह गई।

अगली सुबह सबसे पहले एक भिखारी वहाँ एकतारा बजाते हुए महल के प्रवेश द्वार से अंदर आया। महाराज को जैसे ही इस बारे में पता चला उन्होंने दरबारियों को भेजकर उस भिखारी को राजदरबार बुलाया और कहा, “हम तुम्हारी शादी अपनी बेटी से करवाना चाहते हैं!”



ये सुनकर भिखारी बहुत खुश हुआ। महाराज ने राजकुमारी और भिखारी की शादी करवा दी। शादी के बाद राजकुमारी भिखारी के साथ महल से चली गई। दोनों चलते चलते एक बहुत ही सुंदर घाटी पहुंचे| सूंदर घाटी देखकर राजकुमारी बोली, “अरे वाह! यह कितनी सुंदर घाटी है, यह घाटी किसकी है”? भिखारी ने उसे बताया कि यह घाटी राजा विक्रम की है। ये सुनकर राजकुमारी को बहुत अफ़सोस हुआ। अब वह दोनों उस घाटी से और आगे बढ़ते हुए एक बड़े से शहर में पहुंचे| वहाँ पहुंचकर राजकुमारिने उससे फिर पूछा, “यह बड़ा और सुंदर शहर किसका है?” भिखारी ने कहा, “यह शहर भी राजा विक्रम का ही है|” राजकुमारी को ये सुनकर बहुत अफसोस हुआ। उसने सोचा, “ओह! मैं कितनी बड़ी मूर्ख हूँ! मुझे उस राजा का अपमान नहीं करना चाहिये था।”

वहाँ से आगे जाकर भिखारी उसे अपने घर ले गया। घर देखकर राजकुमारी भौचक्की रह गई। वो बोली, “हे भगवान! ये घर तो बहुत छोटा है। यहाँ तो कोई सेवक भी दिखाई नहीं दे रहा!”। इसपर भिखारी ने बड़े प्यार से कहा, “ये हमारा घर है। अब हमें यहाँ सारा काम खुद ही करना होगा”।

अब वो भिखारी और राजकुमारी उस घर में रहने लगे। लेकिन राजकुमारी को घर का कोई काम करना नहीं आता था, इसलिए वह हमेशा हर कार्य बिगाड़ देती थी। परेशान होकर उसके पति ने उसे सबसे आसान काम देने के बारे में सोचा। वह राजकुमारी के लिए जंगल से कुछ फूल तोड़कर ले आया जिससे वह राजकुमारी फूलों की माला बना सके और वह उन्हें बेचकर कुछ पैसे कमा सके। राजकुमारी बहुत मेहनत से फूल माला बनाने की कोशिश कर रही थी, तभी उसकी उँगलियाँ छिल गई और वो माला नहीं बना सकी। यह देखकर भिखारी बहुत गुस्सा हो गया। उसने राजकुमारी से गुस्से से बोला, “तुम खाना नहीं बना सकती, तुम फूल माला नहीं बना सकती, तुम घर का कोई काम नहीं कर सकती, तो तुम कर क्या सकती हो!?” तभी उसे एक ख्याल आया। उसने राजकुमारी से कहा, “राजा विक्रम के महल में एक सेविका की आवश्यकता है, इसलिए अब से तुम महल में सेविका का काम करोगी|”

अगले दिन से राजकुमारी राजा विक्रम के महल में सेविका का काम करने लग गई। वह वहाँ पूरे दिन साफ़-सफाई और बर्तन मांझने का काम करती थी, जिससे दिन के अंत में उसे कुछ खाना घर ले जाने के लिए मिल जाता था। ऐसे ही कुछ दिन बीत गए। कुछ समय बाद राजा विक्रम के विवाह पक्का हो गया। विवाह की तैयारियाँ जोरों-शोरों के साथ शुरू हो गई, जिसे देखकर राजकुमारी जाह्नवी बहुत उदास हो गई। वो बोली, “काश, मैंने राजा विक्रम का अपमान नहीं किया होता और उनका हाथ थाम लिया होता”। तभी राजा विक्रम उसके पास आए और बोले, “क्या तुमने अभी मेरा नाम लिया”?

राजकुमारी ने कहा, “ओह, प्रिय राजा! मुझे मेरे किए पर बहुत पछतावा है। मुझे माफ़ कर दो”।

राजा विक्रम ने हँसते हुए जवाब दिया, “तुम चिंता मत करो! चलो मेरे साथ”।

ऐसा कहकर राजा विक्रम राजकुमारी जाह्नवी को अपने साथ उस कक्ष में ले गए जहाँ उनकी शादी की तैयारियाँ चल रही थी। वह दोनों जैसे ही उस कमरे में पहुंचे जाह्नवी ने देखा कि उसने जिन राजकुमारों का अपमान किया था वह सभी वहाँ मौजूद थे। उन सभी में राजकुमारी के पिता भी मौजूद थे। राजकुमारी ने उन सबसे कहा, “मुझे माफ़ कर दीजिए! मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूँ। मुझे आप सब का अपमान नहीं करना चाहिए था। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।”

राजा विक्रम ने हँसते हुए राजकुमारी से कहा, “आपको आपकी गलती का एहसास हुआ यही बहुत बड़ी बात है। मैं आपको यह बताना चाहूँगा कि मैं ही वही भिखारी हूँ जिस के साथ आपकी शादी हुई थी। इतने दिनों से आप मेरे साथ ही रह रही थी। मैंने यह सब इसलिए किया ताकि आप यह समझ सके की घमंड दुनिया की सबसे बड़ी बुराई है, और जब आप यह समझ ही गई हैं तो... चलो मेरी रानी।”

ये कहकर राजा विक्रम राजकुमारी को अपने साथ ले गए। उन दोनों ने धूमधाम के साथ पूरे राज्य के समक्ष विवाह कर लिया और ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवन व्यतीत करने लगे।

शिक्षा - हमें कभी भी घमंड नहीं करना चाहिये क्योंकि घमंड इंसान का सबसे बड़ा अवगुण है।

Click Here >> Hindi Cartoon For More Moral Stories

जादुई डिब्बा

बहुत समय पहले किसी गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था। रवि के माता-पिता का निधन हो चुका था इसलिए वो अपनी चाची के साथ रहता था। रवि अपनी चा...