Wednesday, 19 September 2018

भुक्खड़ चूहा

कुछ समय पहले की बात हैं। एक गाँव में चूहों का एक परिवार रहता था। उन चूहों में से एक चूहा ऐसा भी था जिसे खाने की बहुत बुरी आदत थी, वह पूरा समय बस खाता और सोता रहता था।वह इतना खाता था लेकिन फिर भी उसे संतुष्टि नहीं होती थी।उसकी इस आदत से उसके परिवार वाले भी परेशान रहते थे। एक दिन सुबह कूकू चूहे के दोस्त का जन्मदिन था । और उसका दोस्त उसे जन्मदिन पर न्यौता देने आया ।  

अब अगले दिन कूकू चूहा पार्टी में गया, और वहाँ जाकर भी वह अपनी भूख पर काबू नहीं कर पाया। और सारा केक  मेहमानों के आने से पहले ही खा गया। यह देखकर सब कूकू चूहे पर बहुत गुस्सा हो गए , और उसे पार्टी से जाने को कहने लगे। अब निराश होकर कूकू चूहा वापस अपने घर को निकल गया, मगर इन सब के बाद भी कूकू चूहे के खाने की आदत में कोई परिवर्तन नहीं आया। 

अगले दिन कूकू चूहे का एक दोस्त उसे खेतों में बुलाने के लिए आया । कूकू चूहा और पिंटू चूहा अपने बाकि सभी दोस्तों के साथ खेत में चले गए । खेत में जाकर वह फ़सलों पर टूट पड़ा ।  सभी ने जल्दी-जल्दी खाना खा लिया, लेकिन भुक्खड़ चूहे का पेट नहीं भरा । यह देखकर उसका दोस्त पिंटू चूहा उससे बोला, “अरे ! जल्दी खा ना हमें जाना भी हैं।” यह सुनकर कूकू चूहा बोला , “अरे ! रुक ना इतनी भी क्या जल्दी हैं ? अभी पेट भर कर खाने दें और एक लंबी सी डकार लेने दे। फिर हम चलेंगे। 


ऐसा कहकर कूकू चूहा और खाने लगा पर पिंटू चूहा फिर से बोला, “ अरे! जल्दी करना। इतने में सभी चूहों में भगदड़ मच गयी। चूहे चिल्लाने लगे, “भागों! भागों! बिल्ली आ गयी!!” सारे चूहे तेज़ी से भागने लगे, मगर भुक्खड़ चूहा बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। क्योंकि बहुत ज़्यादा खाने की वजह से वह भाग नहीं पा रहा था। और वह अपने दोस्तों से कहने लगा, “मेरे लिए रुको !”

इतने में कूकू चूहे का पैर कही पर फँस गया। कूकू चूहा फटाफट अपना पैर निकालने लगा। यह देखकर बिल्ली धीरे-धीरे उसके पास आ रही थी और बोली, “हीहीही अब तुझे मुझसे कौन बचाएगा। आज तो मेरी दावत हो गयी।”
इतने में कूकू चूहे का पैर निकल गया फिर लंगड़ाते - लंगड़ाते कूकू चूहा जैसे तैसे भागने लगा। फिर बिल्ली भी एक दम से उसके पीछे भागने लगी लेकिन थोड़ी ही देर में उसका घर आ गया और वो बोला, “उफ़! बच गया !”

ऐसा सोचकर अब कूकू चूहा धीरे- धीरे चलने लगा था। उतनी देर में वो बिल्ली दौड़ कर आ गयी । बाकि चूहे अभी तक अपने-अपने घर में घुस गए थे । लेकिन कूकू चूहा पीछे रह गया, वो जैसे ही घर में घुसने लगा। तो वह दरवाज़े में ही अटक गया … क्योंकि खा-खाकर उसका पेट इतना मोटा हो गया था कि वह अब अपने ही घर में घुस नहीं पा रहा था…अब अंदर से सभी चूहे उसे घर के अंदर खींचने लगे और बाहर से बिल्ली उसकी पूछ पकड़कर उसे बाहर खींचने लगी ।

यह देखकर कूकू चूहा चिल्लाने लगा, और रोने लगा लेकिन बिल्ली ने उसकी पूछ नहीं छोड़ी व आखिर में उसकी पूछ ही कट गयी । और बिल्ली धड़ाम से पीछे गिर गयी । सभी चूहों ने जैसे-तैसे कूकू चूहे को अंदर खींच लिया ।

इस घटना के बाद कूकू चूहे को अपनी गलती का एहसास हुआ, और अब उसने खाने का लालच छोड़ दिया  । 

शिक्षा - किसी भी चीज़ की अति हमेशा नुकसानदायक होती हैं। 

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Monday, 17 September 2018

बातूनी कौवा

किसी जंगल में कालिया नाम का एक कौवा रहता था। कालिया बहुत बातूनी था। वो हमेशा किसी ना किसी बात पर बोलता रहता, “अब मुझे जंगल की सारी समझ तो है नहीं, लेकिन समझ होने या ना होने से क्या फर्क पड़ता है? क्योंकि जिनको समझ है... उनको सही समझ है... इसकी किसको समझ है?” उसकी इस आदत से जंगल के जानवर और पक्षी बहुत तंग रहते थे। जैसे ही वो बोलना शुरू करता था सब अपने कान पकड़ लेते थे। एक दिन कालिया की इतना ज़्यादा बोलने की आदत से तंग आकर काजल कोयल ने चांदनी कबूतर से कहा, “काजल इस कालिया को चुप कराने के लिए हमें कुछ करना चाहिए”|  

इसपर काजल कुछ देर सोचकर बोली, “तुम मेरे साथ चलो”| चांदनी और काजल उड़ती हुई जंगल के राजा शेर की गुफा पर पहुंची। उन्होंने देखा कि शेर अपनी गुफा के बाहर सो रहा है। काजल चुपके से गुफा के अंदर चली गई| कुछ देर बाद वो एक शाही चिठ्ठी और कलम के साथ बाहर आई और चांदनी को वो चिठ्ठी दिखाते हुए बोली, “ये देखो... शाही चिठ्ठी| इसके इस्तेमाल से हम उस बातूनी कालिये को हमेशा के लिए चुप करा सकते हैं”|


काजल और चांदनी वहाँ से उड़े और कालिया के घोंसले से थोड़ी दूर ज़मीन पर आकर रुक गए, काजल ने कलम से उस शाही कागज पर कालिया के लिए एक चिठ्ठी लिखी और वो दोनों कालिया के पास पहुंचे| और काजल बोली, “कालिया, महाराज ने तुम्हारे लिए एक चिठ्ठी भेजी है”| ये सुनकर कालिया बोला “ओह! सच में? पर अगर महाराज को किसी सलाह की ज़रुरत है तो मैं तुम्हें पहले ही बता दूँ कि कोई मुझसे सलाह मांगता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है, लेकिन किसी को सलाह देना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता| क्योंकि तुम तो जानती हो किसी को सलाह देने से पहले उसकी पूरी बात सुननी पड़ती है, और उसकी बात सुनने के लिए चुप रहना पड़ता है, और मुझसे चुप कहाँ रहा जाता है. इसलिए अगर…” 

काजल उसे रोकते हुए बोली, ”हम सब जानते हैं, तुमसे चुप नहीं रहा जाता! तुम पहले महाराज की चिठ्ठी तो पढ़ लो!” कालिया ने चिट्ठी पढ़ी जिसमे लिखा था, “मुझे शिकायत मिली है कि तुम बहुत ज़्यादा बोलते हो| तुम्हारे ज़्यादा बोलने की वजह से जंगल के सभी पक्षी और जानवर बहुत तंग रहते हैं| इसलिए मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि आज के बाद तुम चुप रहोगे और कुछ नहीं बोलोगे”| 

चिट्ठी पढ़कर कालिया बहुत दुखी हुआ| अब वो हमेशा चुप रहने लगा| उसका बोलने का बहुत मन करता था लेकिन महाराज के डर की वजह से वो कुछ नहीं बोल पाता था| और ना बोलने की वजह से कई बार उसका पेट भी बहुत दर्द रहता था| एक दिन वो पेट दर्द की वजह से कराह रहा था, तभी उसे देखकर चांदनी कबूतर काजल कोयल से बोली, “काजल, हमने कालिया के साथ अच्छा नहीं किया”| ये सुनकर काजल को भी अपनी किए पर पछतावा हुआ| वो बोली, ”तुम सही कह रही हो| हमें झूठ बोलकर कालिया को चुप नहीं करना चाहिए था| शायद वो ऐसा ही है| शायद ज़्यादा बोलना ही उसकी सेहत का राज है”| 

ये कहकर वो दोनों फिर से शेर की गुफा में गए| पहले की तरह शेर अपनी गुफा के बाहर सो रहा था| काजल गुफा में से एक शाही कागज और कलम ले आई. फिर,पहले की तरह काजल ने कालिया के लिए चिठ्ठी लिखी और वो दोनों उड़कर कालिया के पास गए| और काजल बोली, ”कालिया, महाराज ने तुम्हारे लिए एक और चिठ्ठी भेजी है”|ये सुनकर कालिया बहुत घबरा गया|  उसने सिर हिलाकर चिठ्ठी लेने से मना कर दिया| ये देखकर चांदनी बोली, “चलो, मैं तुम्हारे लिए ये चिठ्ठी पढ़ देती हूँ”| ये बोलकर चांदनी जोर से चिठ्ठी पढ़ने लगी, “कालिया, मुझे लगता है मुझसे बहुत बड़ी भूल गई| तुम भी हमारे जैसे ही हो| जैसे हमें कम बोलना पसंद है, वैसे ही तुम्हें ज्यादा बोलना पसंद है| इसलिए मुझे तुम्हें ना बोलने का दंड नहीं देना चाहिए था| मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ, और तुम्हें दिया दंड वापिस लेता हूँ| अब से तुम जितना चाहे बोल सकते हो!”

ये सुनकर कालिया बहुत खुश हुआ| उसने एक लम्बी चैन की सांस ली और फिर बोला, “शुक्र है महाराज को समझ तो आई| मुझे तो लगा था ना अब कभी महाराज को समझ आएगी, और ना ही मैं कभी कुछ बोल पाऊंगा| और ऊपर से ये पेट दर्द तो मेरी जान ही निकाल देता| पता नहीं मेरे बोलने का मेरे पेट से क्या लेना-देना है| पर इतना तो ज़रूर है कि अगर मैं कुछ देर और चुप रहता तो मेरा पेट दर्द के मारे फट जाता! लेकिन शुक्र है हमारे मंदबुद्धि महाराज को समझ…”  
काजल बीच में टोकती हुई बोली,”अरे, कालिया| अब बस भी करो!” 

इस तरह कालिया एक बार फिर से बहुत ज़्यादा बोलने लगा और जंगल उसकी आवाज़ से गुंज उठा| 

शिक्षा:- जो जैसा है वैसा ही अच्छा है| इसलिए हमें किसी को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए| 
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Saturday, 15 September 2018

जादुई अंगूठी

एक समय की बात है, दो बहनें जिनका नाम गुड्डू और चुटकी था, नदी के किनारे घूम रही थी दोनों जब घूमते - घूमते थक गयी तो वही एक पेड़ के निचे बैठ गयी। गुड्डू को किताबे पढ़ने का बहुत शौक था इसलिए वो वहा बैठकर अपनी किताब पढ़ने लगी और चुटकी खाली बैठी-बैठी बोर होने लगी, तो उसने सोचा की क्यों न फूलों की माला बनाई जाये और यह सोचकर चुटकी अपनी माला के लिए फूल चुनने चली गयी , तभी उसे वहा एक खरगोश दिखाई दिया , जिसे देखकर चुटकी सोचती हैं, “वाह ! कितना सुंदर  खरगोश हैं और इसके फर भी कितने सफेद और चमकदार हैं।” 

यह सोचते ही चुटकी उस खरगोश को पकड़ने के लिए उसके पीछे - पीछे भागने लगी। थोड़ी दूर जाके वो खरगोश एक बड़े गढढे में चला गया चुटकी भी वहां पहुँच गयी और जैसे ही चुटकी ने उसमे झाँककर देखा तो उसका पैर फिसल गया और वो फिसलकर गढढे में गिर गयी । वो उस गढढे में नीचे गिरती चली गयी और एक सूखी पातियो के ढेर पर जा गिरी जब वो उठके वहा चारो तरफ देखने लगी तो उसे वहा उन खरगोशो के बिल दिखाई दिए, चारो तरफ सुंदर - सुंदर  खरगोश देखकर वो बहुत खुश हुई और सबकुछ भूलकर उन खरगोशो के पीछे भागने लगी ।


कुछ समय बीत जाने के बाद अचानक चुटकी की नज़र वहा एक किनारे पर किसी अजीब सी चीज़ पर पड़ी। उसने उसके पास जाकर देखा तो उसे पता चला की वो एक लकड़ी का डिब्बा था, जो पूरी तरह बंद था और काफी पुराना भी लग रहा था। चुटकी उस डिब्बा को अलट- पलट कर देखने लगी और सोचा, “देखने में तो ये बहुत पुराना लग रहा है, लेकिन ये खुलेगा कैसे?” चुटकी यह सोच ही रही थी की अचानक एक बड़ा सा खूबसूरत नीली आँखों वाला खरगोश उसके सामने आ गया। जिसे देखकर चुटकी सबकुछ भूल गयी और उस डिब्बा को वही रख के उस खरगोश के पीछे - पीछे चल पड़ी।

कुछ दूर उस खरगोश के पीछे जाने के बाद चुटकी को एक अजीब सी आवाज़ सुनाई देने लगी, जैसे ही वो उस आवाज़ को ठीक से सुनने की कोशिश करने लगी तभी उसकी नज़र उस नीली आँखों वाले खरगोश पर पड़ी। वो यह देखकर हैरान रह गयी की वो आवाज़ और किसी की नहीं उसी खरगोश की थी, वह खरगोश बोल रहा था और वो चुटकी से बोला, “तुम कौन हो और तुम यहाँ कैसे आयी ?” यह सुनकर चुटकी बोली,  “अरे खरगोश जी ! आप बात कर सकते हैं ! लेकिन आप बोल कैसे सकते हैं ?”खरगोश ने कहा, “ये मै तुम्हें बाद मे बताऊंगा, पहले तुम बताओ की तुम कौन हो और तुम यहाँ कैसे आयी? वापस बाहर जाने के बारे में नहीं सोचा तुमने? अब तुम्हें यहाँ से वापस बाहर जाना चाहिए।

खरगोश की बात सुनके अब चुटकी को अपनी बहन गुड्डू की याद आने लगी और उसने सोचा की गुड्डू को उसकी फ़िक्र हो रही होगी और इतना सोचते ही वो उदास हो गयी और खरगोश से बोली, “खरगोश जी ! मुझे वापस जाने का रास्ता नहीं पता।”इसपर खरगोश ने कहा, “तुम जहाँ से आयी हो वहा से वापस नहीं जा सकती क्योंकि तुम उस सुरंग से ज़मीन के बहुत निचे आ गयी हो अब यहाँ से वापस जाने का एक ही रास्ता हैं।”

चुटकी ने पूछा, “कौन सा रास्ता ?”खरगोश ने कहा, ”जादुई अंगूठी।”यह सुनते ही चुटकी बहुत उत्सुक सी हो जाती है और बड़ी ही उत्सुकता से खरगोश से पूछती हैं, “जादुई अंगूठी ! कहाँ हैं वो, मुझे भी दिखाओ। इसपर खरगोश ने कहा, “वो एक पुराने लकड़ी के डिब्बा में रखी हैं, जिसे बहुत समय पहले एक बुरे इंसान ने बंद करके मिटटी में कही दफना दिया था जिस से वो किसी को न मिले और उसका दिया श्राप कभी नहीं टूटे।”

तभी चुटकी को वो डिब्बा याद आता हैं, जो उसने थोड़ी देर पहले देखा था, और वो बोलती हैं, “मेने अभी थोड़ी देर पहले वहा पीछे एक पुराना लकड़ी का डिब्बा देखा था, वो हर तरफ से बंद था और बहुत पुराना लग रहा था। खरगोश ने कहा, “मुझे वहा ले चलो।” खरगोश के यह बोलते ही चुटकी उसे वहा ले जाती हैं और उसे वो डिब्बा दिखाती हैं। उस डिब्बा को देखकर खरगोश बहुत खुश होता हैं और बोलता है, “इस डिब्बे को हम सभी बहुत समय से ढूंढ रहे हैं, यह तुम्हें कहा मिला ?”

चुटकी ने बोला, “ये तो मुझे यही कोने में रखा हुआ मिला।” चुटकी की यह बात सुनकर खरगोश अचंभित होकर बोला, “हम यहाँ इतने समय से रह रहे हैं, और सुबह - शाम इसी डिब्बे को ढूंढ़ते रहते थे, इसी के लिए हमने यह इतना गहरा बिल भी बनाया लेकिन हमें यह डिब्बा आज तक नहीं मिला तो तुम्हें यहाँ आते ही ये डिब्बा कैसे मिल गया।” यह सुनकर चुटकी ने कहा, “मुझे नहीं पता खरगोश जी, मुझे तो ये बीएस इधर कोने में पड़ा हुआ दिखा” इसपर खरगोश ने थोड़ी देर सोचा तब उसे उस बुरे जादूगर की बात याद आयी की यह डिब्बा सिर्फ किसी नेकदिल इंसान को ही मिलेगा और तब वह बोलता है, “चुटकी तुम एक नेकदिल और भली लड़की हो शायद इसीलिए यह डिब्बा सिर्फ तुम्हें मिला। अब तुम इस डिब्बा को जल्दी से खोलो।”

चुटकी उस डिब्बा को खोलती हैं तो उसमे एक चमकदार अंगूठी दिखती हैं। उस अंगूठी को देखते ही खरगोश बोलता है, “चुटकी अब जल्दी से इस अंगूठी को अपने हाथ में पहन लो और पहनते ही सबसे पहले “श्राप टुटा” शब्द बोलना” चुटकी ने पूछा, “लेकिन यही क्यों ?”क्योंकि इस से हम सब यहाँ से बाहर निकल जायेंगे। यह सुनकर चुटकी जल्दी से उस अंगूठी को पहन लेती हैं और “श्राप टुटा” शब्द बोलते ही एक तेज़ रौशनी होती हैं चुटकी की आँखे बंद हो जाती हैं, और फिर जब आँखे खुलती है तो चुटकी उस बिल में से बाहर होती हैं और उसके आस - पास बहुत से लोग होते हैं। जिन्हे देखकर चुटकी पूछती है, “आप सब कौन हैं ?” 

तभी उनमे से एक नीली आँखों वाला आदमी बोलता है, “चुटकी में वही खरगोश हूँ, जिसके साथ अभी तुम अंदर बातें कर रही थी।”इस पर चुटकी हैरान होकर बोलती है, “अच्छा तो तुम इस श्राप की बात कर रहे थे, तुम असलियत में खरगोश नहीं इंसान हो।”

यह सुनकर नीली आँखों वाला आदमी कहता, “हाँ, कुछ समय पहले एक बुरे जादूगर ने हमसे हमारी ज़मीन, घर और गाँव को छीनने के लिए और हमारे पुरे गाँव को अपने बुरे जादू का घर बनाने के लिए, हम सबको अपने जादू से खरगोश बना दिया और हमें श्राप दिया की हम दिन में सिर्फ आधे घंटे के लिए इंसानी रूप में आ सकते हैं, और फिर कुछ समय बाद मरते हुए अपनी सारी शक्तियाँ इस एक अंगूठी में डालकर इसे यहाँ छिपा गया था, इसीलिए इसे ढूंढ़ने के लिए हम सभी ने यहाँ अपना बिल बनाया था और उस आधे घंटे में जब हम इंसान बन सकते थे तब इस डिब्बे को ढूंढ़ते थे और उसके बाद खरगोश बनके भी हम इसी काम में लगे रहते थे इसीलिए ज्यादातर हम इस बिल में ही रहते थे जिससे की हम इस डिब्बे को ढूंढ पाए, पर इतने समय से इतना ढूंढ़ने पर भी हमें यह डिब्बा नहीं मिला था लेकिन आज तुम आयी और तुम्हें ये डिब्बा मिल गया, तुमने हमारी बहुत मदद की चुटकी। तुम्हारा बहुत धन्यवाद।”

इसके बाद चुटकी वो जादुई अंगूठी उन लोगो को वापस कर रही होती हैं कि तभी वो नीली आँखों वाला आदमी बोलता है, “नहीं चुटकी तुम्हें ये अंगूठी वापस करने की जरुरत नहीं हैं क्योंकि अब इस अंगूठी का जादू खत्म हो गया हैं और अब ये साधारण अंगूठी बन गयी हैं, तुम इसे हमारी तरफ से एक तोहफा समझ कर रख सकती हो। उस आदमी की यह बात सुनके चुटकी बहुत खुश हो जाती हैं और उस अंगूठी को वापस पहन लेती हैं और उन सब से विदा लेकर वापस अपनी बहन के पास चली जाती हैं।

शिक्षा- बुराई का अंत निश्चित है |
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भुक्खड़ चूहा

कुछ समय पहले की बात हैं। एक गाँव में चूहों का एक परिवार रहता था। उन चूहों में से एक चूहा ऐसा भी था जिसे खाने की बहुत बुरी आदत थी, वह पूरा ...