Friday, 20 July 2018

पंचतंत्र की कहानी - भूत और हाथी

किसी जंगल में एक पेड़ पर चंदु नाम का उल्लू रहता था। चंदु बहुत अच्छे दिल का था और हमेशा सबकी मदद करता था।
एक दिन, जब वह शाम को सो कर उठा तो उसने देखा कि एक हाथी उसके पेड़ के नीचे आराम कर रहा है। वह देख उसने हाथी से पूछा की वह कौन है और उसने हाथी को जंगल में पहली बार देखा है|

चंदू की बात पर हाथी ने कहा की उसका नाम मलंग है और वह जंगल में किसी के कहने पर अच्छे फल खाने आया है। चंदू ने हाथी को जवाब दिया कि उसने ठीक सुना है और जंगल में काफी स्वादिष्ट फल हैं। फिर वह मलंग हाथी का जंगल में स्वागत करता है। 

दोनों की दोस्ती हो जाती है और  हाथी चंदू के पेड़ के नीचे ही रहने लगता है। जहाँ चंदु दिनभर सोता, वहीँ मलंग हाथी रात होने पर पेट-पूजा करके वापस आता था और वह जमकर बातें करते थे।



मलंग हाथी उसे बताया करता था की कैसे वह मीठे गन्ने खाने के बाद नदी में नहाता था। मलंग हाथी के किस्से सुनकर चंदु उल्लू का भी उसके साथ जाने का बहुत मन किया करता लेकिन उल्लू होने के कारण वह दिन में घर से बाहर नहीं निकल सकता था।

फिर एक रात, जब मलंग हाथी खाना खाकर लौट रहा था, तब उसने एक भूत और भूतनी को बातें करते देखा। उसने भूत को यह कहते हुए सुना कि इन्सान  बहुत हिम्मतवाले हो गए हैं और अब वह भूतों से बिल्कुल नहीं डरते। भूत की बात सुनकर भूतनी ने कहा है कि इन्सानो को डराने के लिए उन्हें कोई नयी तरकीब सोचनी होगी।

तभी भूत, हाथी को देख लेता है| हाथी को देखकर भूत चौंक जाता है और चींखकर कहता है की पकड़ो उसे, ये वही हाथी है! ये सुनते ही हाथी डर जाता है  और वहाँ से भाग जाता है। उसे भागते देख भूतनी ने भूत से पूछा की क्या हुआ? कौन है वो हाथी?

तब भूत, भूतनी को अपने सपने के बारे में बताता है जो उसने एक दिन पहले देखा था |  वह बताता है की उसने सपने में एक हाथी को पूरा खा लिया था।  और ये हाथी एकदम उसके  सपने वाले हाथी के जैसा ही दिखता है। इसलिए आज वह  इस हाथी को खाकर अपना सपना सच करके रहेगा ।

ऐसा कहकर भूत उड़कर हाथी का पीछा करने लगा। भूतनी भी उड़ती हुई हाथी के पीछे चल दी। हाथी चिल्लाता हुआ भाग रहा था की कोई भूत-भूतनी से उसकी  जान बचाये। तभी भूत और भूतनी उड़कर उसके सामने आ जाते हैं । हाथी ने उन्हे देखकर रुक जाता है और डरकर कहता है की कृप्या करके वह उसे  छोड़ दे । उसने  सुना है इंसान बहुत स्वादिष्ट है। वह  उन्हे खा सकते हैं।

हाथी की बात सुन भूत कहता है की उसे सपना उसको खाने का आया है, इसलिए वह उसे ही खायेगा।

दूर  पेड़ पर बैठा चंदु उल्लू ये सब देख और सुन रहा था। अचानक उसे एक तरकीब सूझी। वो उड़ता हुआ हाथी के पास आया और भूतनी को देखकर जोर से चिल्लाने लगा...यही है वो!, यही है वो!, पकड़ो इसे! चंदु को ऐसे बेवजह चीखता देख भूत और भूतनी सोच में पड़ गए। चंदू को इस तरह चिलाते देखकर भूत चंदू से पूछता है की वह कोन है और वह किसकी बात कर रहा है |

तब चंदू, भूत को बताता है की वह उसकी पत्नी की बात कर रहा है। वह बताता है की उसने कल सुबह अपने सपने में देखा कि उसकी एक भूतनी से शादी हो गई है। और तुम्हारी पत्नी एकदम उस भूतनी जैसी दिखती है। इसलिए इस भूतनी से शादी करके वह  अपना सपना सच करेगा ।

 यह सब सुनकर भूतनी डर जाती है  और चिल्लाकर कहती है की वह किसी उल्लू से शादी नहीं करेगी | भूत, भूतनी को समझाते हुए कहता है की वह  घबराए नहीं । वह तो उल्लू है तो उल्लू जैसी ही बात करेगा |  और सपने भी कभी सच होते हैं क्या?

इस पर चंदू कहता है की वह भी तो अपना सपना सच करने के लिए इस हाथी को खाने को कह रहे हैं। तो क्या तुम भी उल्लू हो? चंदू की बात सुनकर भूत शर्मिंदा हो जाता है और उससे हाथी को नहीं खाने की बात कहता है | और उसका सपना सच नहीं होने की बात कहते हुए कहता है की वह भी अपने सपने को भूल जाये | भूत की बात से सहमति जताते हुए चंदू भी एक दूसरे के सपने को भूलने के लिए कहता है | चंदु के ऐसा कहते ही भूत और भूतनी उड़कर वहाँ से चले जाते हैं । 

भूत-भूतनी के जाने के बाद मलंग हाथी उसकी जान बचाने के लिए चंदू का धन्यवाद करता है | और भूतनी से शादी करने का उसका पूरा नहीं हो पाने पर दुःख भी जताता है |  हाथी की बात सुनकर चंदू हँसते हुए कहता है की कौनसा सपना? वह सब तो उसने भूत को सबक सीखने के लिए बोला था |

इस पर दोनों दोस्त ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। इतने ताकतवर भूतों को अपनी समझदारी से हराकर आज दोनों बहुत खुश थे।

शिक्षा:  यह ज़रूरी नहीं कि एक कमजोर और ताकतवर में से हमेशा ताकतवर ही जीते। अगर कमजोर चाहे तो अपनी अक्ल से बड़े से बड़े ताकतवर को हरा सकता है।


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Wednesday, 11 July 2018

बिच्छू के रूप में भगवान

बहुत समय पहले एक बुजुर्ग दरिया के किनारे से जा रहा थे। तभी उन्होने देखा कि दरिया के अंदर से एक कछुआ आया और दरिया के किनारे पर आकर रुक गया। थोड़ी देर बाद उसी किनारे पर एक जहरीला बिच्छू भी आया और दोनों आपस में बात करने लगे। कछुए ने बिच्छू से पूछा, “दोस्त, क्या अब हम दरिया के उस पार चले?” इसपर बिच्छू ने खुशी से जवाब दिया, “हाँ दोस्त, चलो नदी के उस पार चलते हैं।“ ऐसा कहकर बिच्छू कछुए की पीठ पर चढ़ गया। और कछुए ने दरिया में तैरना शुरू कर दिया।


वो बुजुर्ग ये सब देख और सुन रहे थे। एक बिच्छू को कछुए की पीठ पर बैठा देख वो बहुत हैरान हुए और मन ही मन सोचने लगे, “ये बिच्छू कछुए की पीठ पर बैठकर कहाँ जा रहा है? मुझे भी इनके पीछे जाना चाहिए” ऐसा सोचकर वो दरिया में उतर गए और उनका पीछा करने लगे। नदी के दुसरे किनारे पहुँचकर कछुआ रुक गया और बिच्छू उसकी पीठ पर से छलांग लगाकर किनारे पर चढ़ गया।

“दोस्त तुम यहीं रुको मैं अभी आता हूँ!” ये कहकर बिच्छू जंगल की तरफ चल दिया। बुजुर्ग भी दरिया से बाहर आए और बिच्छू के पीछे चलने लगे।

आगे जाकर उन्होने देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था उसी तरफ एक नौजवान व्यक्ति आँखें बंद करके भगवान के ध्यान में लगा हुआ था। ये देखकर वो बुजुर्ग सोचने लगे, “अगर यह बिच्छू उस नौजवान को काटना चाहेगा तो मैं करीब पहुंचने से पहले ही इसे अपनी लाठी से मार दूंगा।“

ऐसा सोचकर वो बहुत तेज़ी से बिच्छू के पीछे चलने लगे। तभी उन्होने देखा कि दूसरी तरफ से एक जहरीला साँप बहुत तेज़ी से उस नौजवान की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन इससे पहले वो जहरीला साँप उस नौजवान को काटता, बिच्छू ने उस साँप को डंक मार दिया। बिच्छू के जहर से साँप कुछ ही क्षणों में मर गया। इसके बाद बिच्छू मुडा और वापिस दरिया के किनारे चला गया। बुजुर्ग व्यक्ति ये सब देखकर बहुत हैरान हुए। वो जिस बिच्छू के बारे में इतना गलत सोच रहे थे उस बिच्छू ने भगवान की भक्ति में लगे एक नौजवान की जान बचाई थी। वो सोचने लगे, “अरे आजकल तो इंसान भी एक दूसरे के काम नहीं आते और यहाँ तो एक बिच्छू ने मिसाल कायम की है! ये देखकर दिल खुश हो गया कि जानवरो में भी ऐसी भावना है!”

कुछ देर बाद जब वो नौजवान ध्यान पर से उठा तो उस बुजुर्ग व्यक्ति ने उसे सारी बात बताई।

नौजवान बहुत हैरान हुआ और भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहने लगा, “भगवान् आपका लाख लाख शुक्र है! आज आपने मेरी जान बचा ली! मैं आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ!”
तभी अचानक उसके सामने भगवान् प्रकट हुए और उस नौजवान से बोले, “जब वो बुजुर्ग जो तुम्हे जानता तक नही था वो तेरी जान बचाने के लिए लाठी उठा सकता है । फिर तू तो मेरी भक्ति में  लगा हुआ था। मैं तेरा ध्यान कैसे नहीं रखता!”

ये कहकर भगवान अदृश्य हो गए, और वो बुजुर्ग समझ गया कि उस बिच्छू के रूप में आकर भगवान ने ही इस नौजवान की जान बचाई है।

शिक्षा: अगर हम सच्चे दिल से भगवान की पुजा करते हैं तो भगवान हमारी सहायता ज़रूर करते हैं।

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Wednesday, 21 February 2018

पंचतंत्र की कहानी - खरगोश और हाथी

किसी जंगल में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वह विशालकाय, लम्बी सूंड और लम्बे- मोटे दांतों वाला था। खंभे के जैसे उसके मोटे-मोटे पैर थे। जब कभी भी वह चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।

गजराज अपने झुंड के सभी हाथियों से बहुत प्यार करता था। वह खुद मुसीबत मोल ले लेता था लेकिन झुंड के किसी भी हाथी को कष्ट में नहीं पड़ने देता था। गजराज के लिए सभी हाथियों के मन में बहुत सम्मान था।


उसी जंगल में खरगोशों की एक बस्ती थी। उस बस्ती में बहुत सारे खरगोश रहते थे। सभी हाथी, खरगोशों की बस्ती से होकर झील में पानी पीने के लिए जाया करते थे। हाथी जब भी खरगोशों की बस्ती से निकलते थे, तो छोटे-छोटे खरगोश उनके पैरों के नीचे आ जाते थे। कुछ खरगोश मर जाते थे तो कुछ घायल हो जाते थे।

रोज-रोज खरगोशों को मरते और घायल होता देखकर बस्ती में हलचल मच गई। खरगोश सोचने लगे की अगर हाथियों के पैरों से वह हर रोज़ इसी तरह कुचले जाते रहे, तो वह दिन दूर नहीं होगा जब उनका पूरी तरह से खात्मा हो जाएगा।

अपनी रक्षा का उपाय सोचने के लिए खरगोशों ने एक सभा बुलाई। सभा में सारे खरगोश इक्कट्ठा हुए। खरगोशों के सरदार ने हाथियों के अत्याचारों का वर्णन करते हुए कहा, "क्या हम सभी खरगोशों में से कोई ऐसा है, जो अपनी जान पर खेलकर हाथियों का अत्याचार बंद करा सके?"

सरदार की बात सुनकर एक खरगोश बोला, "सरदार, अगर मुझे खरगोशों का दूत बनाकर गजराज के पास भेजा जाए, तो मैं हाथियों के अत्याचार को बंद करा सकता हूं।" सरदार ने खरगोश की बात मान कर उसे खरगोशों का दूत बनाकर गजराज के पास भेज देता है। खरगोश हाथियों के झुण्ड पास पहुंच जाता है । गजराज सभी हाथियों के बीच में खड़ा था। खरगोश कुचले जाने के डर से सीधे हाथियों के बीच में से न जाकर पास की एक ऊंची चट्टान पर चढ़ जाता है। चट्टान पर खड़ा होकर उसने गजराज को पुकारकर कहा, "गजराज, मैं चंद्रमा का दूत हूं। चंद्रमा के पास से तुम्हारे लिए एक संदेश लाया हूं।"

गजराज ने चोंकते हुए कहा, “क्या कहा तुमने? तुम चंद्रमा के दूत हो? तुम चंद्रमा के पास से मेरे लिए क्या संदेश लाए हो?"

गजराज की बात का उतर देते हुए खरगोश कहता है, "हां गजराज, मैं चंद्रमा का दूत हूं। चंद्रमा ने तुम्हारे लिए संदेश भेजा है। तुम्हारे झुण्ड ने चंद्रमा की झील का पानी गंदा कर दिया है। तुम्हारे झुंड के हाथी, खरगोशों को पैरों से कुचल-कुचलकर मार डालते हैं। चंद्रमा खरगोशों को बहुत प्यार करते हैं, उन्हें अपनी गोद में रखते हैं। चंद्रमा तुमसे बहुत नाराज हैं। तुम सावधान हो जाओ। नहीं तो चंद्रमा तुम्हारे सारे हाथियों को मार डालेंगे।"

खरगोश की बात सुनकर गजराज भयभीत हो जाता है । वह खरगोश को सचमुच चंद्रमा का दूत और उसकी बात को चंद्रमा का संदेश समझ लेता है। गजराज डर कर कहता है, "यह तो बहुत बुरा संदेश है। तुम मुझे तुरंत चंद्रमा के पास ले चलो। मैं उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा माँगना चाहता हूँ।"

खरगोश, गजराज को चंद्रमा के पास ले जाने के लिए तैयार हो जाता है। खरगोश बोलता है, "मैं तुम्हें चंद्रमा के पास ले कर जा सकता हूं लेकिन शर्त यह है कि तुम अकेले ही चलोगे।"

गजराज, खरगोश की बात मान लेता है। पूर्णिमा की रात थी। खरगोश, गजराज को लेकर झील के किनारे जाता है। वह गजराज से कहता है, “लीजिये गजराज, चंद्रमा से भेंट कीजिये।" खरगोश झील के पानी की ओर संकेत देता है। गजराज पानी में चंद्रमा की परछाईं को ही चंद्रमा मान लेता है। गजराज चंद्रमा से क्षमा मांगने के लिए अपनी सूंड पानी में डाल देता है। पानी में लहरें पैदा हो जाती हैं और परछाईं अदृश्य हो जाती है ।

इस पर खरगोश कहता है, "चंद्रमा तुमसे नाराज हैं। तुमने झील के पानी को अपवित्र कर दिया है। तुमने खरगोशों की जान लेकर पाप किया है इसलिए चंद्रमा तुमसे मिलना नहीं चाहते। गजराज ने खरगोश की बात सच मान लेता है।" गजराज ने डर कर कहा, "क्या ऐसा कोई उपाय है, जिससे मैं चंद्रमा की नाराज़गी को दूर कर सकूं?"

हाथी की ये बात सुनकर खरगोश ने जवाब दिया, "हां, उपाय है। तुम्हें प्रायश्चित करना होगा। तुम कल सुबह ही अपने झुंड को लेकर यहां से दूर चले जाओ। ऐसा करने से चंद्रमा तुमसे खुश हो जाएंगे।"

गजराज प्रायश्चित करने के लिए तैयार हो जाता है। वह अगले दिन ही हाथियों के झुंड सहित जंगल से चला जाता है।

इस तरह, खरगोश अपनी चालाकी से गजराज को धोखे में डाल देता है और अपनी बुद्घिमानी से साथी खरगोशों को मरने से बचा लेता है।


सारांश: बुद्धि के बल से बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है।


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Wednesday, 14 February 2018

पंचतंत्र की कहानी - शेर की जिज्ञासा

किसी घने जंगल में एक शेर रहता था। शेर कई वर्षों से उस जंगल में रह रहा था। समय के साथ वह काफी बूढा हो गया था। अपने अंतिम दिनों में, शेर अपने बच्चे से कहता है -"बेटा, आज मैं तुम्हें कुछ सलाह दे रहा हूँ। तुम इसे हमेशा याद रखना। तुम शुरू से मेरी छत्र-छाया में रहे हो। तुम्हें मैंने कभी भी, किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी। लेकिन अब मेरे जाने के बाद तुम्हे अपना रख रखाव खुद करना है। तुम्हे विभिन्न प्रकार के जानवर मिलेंगे। याद रखना कि तुम उन सभी जीवों से ज्यादा ताकतवर हो। कभी भी किसी से मत डरना - सिवाय इंसान के।"


शेर का बच्चा अचम्भित होकर पूछता है, “इंसान?” तब शेर उसे समझाता है, "हाँ। इंसान। वह बहुत ही खतरनाक होता है। कोशिश करना की तुम्हारा कभी इंसान से सामना ना हो। मेरी बात सदैव याद रखना।" 

कुछ दिनों के बाद शेर की मृत्यु हो जाती है। शेर के बच्चे में इंसानों को लेकर एक अलग धारणा बन जाती है। वह इंसानों के प्रति भ्रमित रहता है और उसे एक बार देखने की इच्छा रखता है। अपनी जिज्ञासा के चलते शेर इंसान को ढूंढ़ने जंगल में निकल पड़ता है। 

जंगल में घुमते हुए शेर को बड़ी कद-काठी वाला एक जानवर दिखाई देता है। वह एक घोड़ा होता है। शेर को लगता है की शायद यही इंसान है। वह घोड़े के पास जा कर पूछता है, "क्या तुम इंसान हो?" शेर की इस बात पर घोड़ा जवाब देता है, "नहीं भाई। मैं तो एक घोड़ा हूँ। इंसान तो बहुत ही बुद्धिमान होता है। वह मेरी सवारी करता है।"

घोड़े की बात सुन कर शेर चौंक जाता है। वह घोड़े से आश्चर्यजनक स्वर में पूछता है, "क्या? इंसान तुम्हारी सवारी करता है?" 

घोडा शेर की बात का जवाब देता है, ‘हाँ। इंसान मेरी सवारी करता है।" यह सुनकर शेर आगे बढ़ता है। वह मन ही मन सोचता है की इंसान बहुत ही ताकतवर जीव होगा।

कुछ दूर जाने के बाद शेर को सामने एक ऊँट दिखाई देता है। ऊँट की ऊंचाई देख कर शेर को लगता है की शायद वही इंसान है। शेर ऊँट के पास जाता है और उससे पूछता है, "क्या तुम इंसान हो?"

ऊँट जवाब देता है, "नहीं। नहीं। मैं तो एक ऊँट हूँ।" शेर फिर से पूछता है, "क्या तुमने कभी इंसान देखा है?" ऊँट जवाब देता है, "हाँ। देखा है ना। इंसान बहुत ही बुद्धिमान होता है। वह मुझे अपने काम के लिए इस्तेमाल करता है और मुझ पर सामान ढो कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है।" 

शेर सोचता है, "यह ऊँट कितना ऊंचा है। फिर भी इंसान इससे अपना काम करवाता है। ज़रूर वह बहुत ही बड़ा और बलशाली होगा।"

थोड़ा दूर जाने के बाद शेर को सामने एक दो दांत वाला विशालकाय जानवर दिखाई देता है। वह हाथी होता है। हाथी को देख कर शेर को यक़ीन हो जाता है की वही इंसान है। शेर,हाथी के पास जा कर बोलता है, “क्या तुम्ही इंसान हो?” शेर की इस बात पर हाथी पहले बहुत हँसता है और फिर कहता है, “मैं तो बस एक हाथी हूँ। इंसान तो बहुत ही बुद्धिमान होता है। वह तो मुझे सर्कस में डंडे की नोक पर नचाता है।"

हाथी की बात सुनकर शेर को विश्वास हो जाता है की इंसान बहुत ही खतरनाक होता है। शेर घूमता हुआ जंगल की सीमा तक पहुंच जाता है। वहां उसे एक आदमी लकड़ी काटता हुआ दिखाई देता है। शेर, आदमी को देख कर समझ नहीं पता की वह कौन है। वह उस आदमी के पास जा कर सवाल करता है, “क्या तुमने कभी इंसान देखा है?”

यह सुनकर इंसान हैरान होकर जवाब है, “इसमें देखना क्या | में खुद एक इंसान हूँ |” आदमी को देखकर शेर को यकीन नहीं होता की इंसान उसकी कल्पना के बिलकुल विपरीत निकलेगा | आदमी को देख शेर ने कहा, “मुझे तो लगा था की इंसान बहुत खतरनाक होता होगा | तुम्हे तो में अभी मर कर खा जाऊंगा|”
शेर को अपनी तरफ बढता देख आदमी फौरन अपने विवेक से काम लेता है और कहता है, ”ठहरो, अगर तुम्हे लगता है की तुम मुझसे ज्यादा ताकतवर हो तो पहले इस लठ्ठर में से छेनी निकल कर दिखाओ।” आदमी की बात सुनकर शेर लठ्ठर में से छेनी निकलने के लिए जैसे ही अपना हाथ डालता है, लठ्ठर का मुंह बंद हो जाता है और हाथ उसमें फंस जाता है |

शेर को अपनी गलती का अहसास हो जाता है और वह समझ जाता है की इंसान वाकई में बहुत बुद्धिमान होता है। शेर आदमी से माफ़ी मांगता है और वादा करता है की वह कभी भी किसी इंसान के सामने नहीं जायेगा। 


सारांश – हमें सदैव अपने माता-पिता की बात माननी चाहिए। 

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Wednesday, 7 February 2018

पंचतंत्र की कहानी - मुर्गा और गधा

बहुत समय पहले, किसी जंगल में मुर्गा और गधा साथ रहते थे। वह दोनों बहुत अच्छे मित्र थे। एक दिन, मुर्गा और गधा खाने की तलाश में जंगल में काफी दूर तक चले गये और उन्हें कुछ दूरी पर एक शेर दिखाई दिया। शेर को देख कर दोनों बहुत डर गए। इससे पहले की शेर की नज़र उन दोनों पर पड़ती, वे दोनों झाड़ियों में छुप गये।


शेर के डर के मारे, दोनों झाड़ियों में ही छुपे रहे और शेर के जाने का इंतेज़ार करने लगे। कुछ देर के बाद, उन्होंने  देखा की सामने मैदान में एक बकरी घास चर रही है। शेर भी बकरी को देखता है और दबे पाओं उसकी तरफ बढ़ना शुरू करता है। बकरी को मुसीबत में देख कर मुर्गा, गधे से कहता है, “हमें उस बकरी की सहायता करनी चाहिए।"

यह सुनकर गधा अचरज भरी नजरों से मुर्गे की तरफ देखकर बोलता है, "भला हम उस बकरी की सहायता कैसे कर सकते हैं? यह शेर बहुत खूंखार है और हमें मारकर खा जायेगा।”गधे की इस बात पर मुर्गा कहता है -"कुछ ना करने से अच्छा होगा की हम कोशिश तो करें।"

शेर जैसे ही बकरी को दबोचने वाला होता है, मुर्गा बहुत ज़ोर से बांग देता है। अचानक से मुर्गे की तीव्र आवाज़ सुन कर शेर डर जाता है और वहां से भाग जाता है। गधा, मुर्गे की होशियारी देख कर बहुत खुश होता है। उसके मन में विचार आता है की क्यों ना वह शेर को जंगल से बाहर भगा कर आए? बाकी जानवरों के बीच उसका भी थोड़ा नाम हो जायेगा।

ऐसा सोचते हुए गधा, शेर के पीछे-पीछे भागना शुरू करता है। गधे को भागता देख मुर्गा बोलता है, "ठहरो मित्र। यह तुम क्या कर रहे हो?" गधा मुर्गे की बात नज़रंदाज़ करते हुए शेर के पीछे भागता रहता है। गधा शेर के पीछे भागता हुआ काफी दूर चला जाता है। अति उत्साहित हो कर गधा ढेंचू-ढेंचू करके शेर को डराने की कोशिश करता है।

शेर गधे की आवाज़ सुन कर पीछे मुड़कर देखता है। तब उसे पता चलता है की वह किसी खतरनाक जानवर नहीं बल्कि एक गधे से डरकर भाग रहा है। इससे पहले की गधा कुछ सोच पाता, शेर उसे दबोच लेता है और बेरहमी से मारकर खा जाता है। इस तरह गधा अपनी मूर्खता के कारण मारा जाता है।

सारांश:-  आत्मविश्वास ज़रूरी होता है लेकिन अति आत्मविश्वास हमेशा नुकसानदायक होता है। 

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Wednesday, 31 January 2018

पंचतंत्र की कहानी - गिद्द और बिल्ली

बहुत पुरानी बात है। किसी जंगल में बड़े से बरगद के पेड़ पर अन्य प्रकार के पशु-पक्षी रहते थे। एक दिन, एक बूढ़ा गिद्ध उस पेड़ पर आश्रय लेने आया। वह गिद अँधा था। पेड़ के सभी पक्षियों ने गिद्ध की उम्र का लिहाज़ करते हुए उसे अपने साथ रहने के लिए जगह और खाना देने का फैसला किया। गिद्ध भी बदले में पक्षियों के बच्चों की रखवाली करने लगा। गिद्ध और पक्षी ख़ुशी-ख़ुशी साथ रहने लगे। 


फिर एक दिन, उस पेड़ के पास से एक बिल्ली जा रही थी। बिल्ली ने पेड़ से पक्षियों के चहकने की आवाज़ें सुनी। बिल्ली जैसे ही पेड़ पर चढ़ी, पक्षियों के बच्चे उसे देख कर डर गए। इससे पहले की बिल्ली बच्चों पर हमला कर पाती, गिद्ध ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, "कौन है वहां?"

बिल्ली गिद्ध की आवाज़ सुन कर डर गयी। उसको पता था की अगर उसे पक्षियों के बच्चों को अपना भोजन बनाना है तो पहले उसे गिद्ध से दोस्ती करनी पड़ेगी। बिल्ली ने गिद्ध से कहा "मैंने आपकी बुद्धिमानी और बड़प्पन के बारे में अपने साथी पक्षियों से बहुत कुछ सुना है। मैं आपसे मिलने आयी हूँ।"
गिद्ध को अपनी तारीफ सुनकर बहुत अच्छा लगा। उसने बिल्ली से पूछा, "तुम कोन हो?" बिल्ली ने जवाब दिया, "मैं एक बिल्ली हूँ।" गिद्ध को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया और उसने बिल्ली को तुरंत वहाँ से जाने को कहा। 

बिल्ली ने एक तरकीब सोची। बिल्ली ने गिद्ध से कहा, "गिद्ध चाचा, मैं अपने परिवार के साथ नदी के दूसरी तरफ रहती हूँ। मैंने और मेरे परिवार में से किसी ने भी कभी जीवन में मांसाहारी भोजन नहीं खाया। मुझे नहीं लगता आपके जैसा समझदार जीव मुझ जैसी बिल्ली को मारकर खाना पसंद करेगा।"

बिल्ली की बातों पर गिद्ध को विश्वाश नहीं होता | वह बिल्ली से कहता है, "तुम तो एक बिल्ली हो और अपने से छोटे पक्षियों को मारकर खाना तुम्हारा पेशा है। मैं तुम पर विश्वास कैसे करूँ?"

बिल्ली फिर से गिद्ध को भरोसा दिलाने के लिए कहती है, "गिद्ध चाचा, सभी बिल्लियां एक जैसी नहीं होती। खाने के लिए मैं कभी भी किसी को मार नहीं सकती। मेरा मानना है कि ईश्वर उन सभी को सज़ा देता है जो दूसरों को मारते हैं। वैसे भी जंगल में खाने के लिए काफी स्वादिष्ट फल और जड़ी-बूटियां हैं।"

गिद्ध को बिल्ली की बातों पर विश्वास हो जाता है। वह उसे अपने और बाकी पक्षियों के साथ पेड़ पर रहने की इजाजत दे देता है। अब बिल्ली हर रोज़ किसी एक पक्षी के बच्चे को मारकर खाने लग गयी थी। गिद्ध जब भी सोया होता, तब बिल्ली अपना शिकार करती। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या में कमी आने से बाकी पक्षियों को कुछ गड़बड़ लगी। वह अपने खोये हुए बच्चों को ढूंढ़ने के लिए जंगल में गए। जैसे ही बिल्ली को आभास हुआ की अब झूठ से पर्दा उठने वाला है, वह वहां से भाग गयी। जब पक्षी जंगल में अपने बच्चों को ढूंढ़ने में विफल होकर वापस पेड़ पर आये, तो उन्हें गिद्ध सोया हुआ मिला। गिद्ध जहाँ पर सोया था, उसके पास वाली टहनी में एक कोटर था। पक्षियों ने जैसे ही कोटर में झांक कर देखा, तो उसमें उन्हें ढेर सारी हड्डियां मिलीं। यह वही हड्डियां थी जो बिल्ली ने पक्षियों के बच्चों को खा कर वहां छुपा दी थी। 

उन हड्डियों को देख कर पक्षियों को आभास हुआ की वह हड्डियां उनके बच्चों की ही हैं। हड्डियां सोये हुए गिद्ध के पास मिलने पर उन्हें लगा कि गिद्ध ने ही सभी बच्चों को मार कर खाया होगा और हड्डियों को कोटर में छुपा दिया होगा। बूढ़े गिद्ध की इस करतूत के चलते पक्षियों के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा। सारे पक्षियों ने मिलकर गिद्ध पर अपनी चोंच से वार किया। क्योंकि गिद्ध सोया हुआ था, वह कुछ नहीं कर पाया और पक्षियों के हाथों मारा गया। इस तरह, गिद्ध के एक अनजान बिल्ली पर भरोसा करने से पहले पक्षियों के बच्चों को, और अंत में, खुद गिद्ध को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 


सारांश - आँख मूँद कर हमें कभी भी किसी अजनबी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। 


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Wednesday, 24 January 2018

पंचतंत्र की कहानी - अहंकारी पेड़ और मधुमक्खियाँ

बहुत पुरानी बात है, एक घना जंगल हुआ करता था। उसमें अनेक प्रकार के छोटे-बड़े जानवर रहते थे। जंगल में कई प्रकार के पेड़-पौधे थे जिनमें से एक पीपल और एक आम का पेड़ भी था। आम का पेड़ स्वभाव से अपने फल की तरह नरम था, जबकि पीपल का पेड़ स्वभाव से कठोर था।

एक दिन, रानी मधुमक्खी अपने साथियों के साथ जंगल में रहने आई। रानी मधुमक्खी ने देखा की पीपल का पेड़ बहुत बड़ा और घना है। वह उसी पेड़ पर छत्ता बनाने के बारे में सोचती है। इसके लिए वह पीपल के पेड़ से पूछती है, "पीपल महाराज, हम इस जंगल में नये हैं। कृप्या आप हमें आश्रय देकर हमारी सहायता करें।"



अपने स्वभाव के अनुरूप, पीपल का पेड़ रानी मधुमक्खी को छत्ता बनाने से मना कर देता है और उसे कहीं और छत्ता बनाने की सलाह देता है। रानी मधुमक्खी को यह सुनकर बहुत दुःख होता है। संयोग से, पास में खड़ा आम का पेड़ उन दोनों की बातचीत सुन रहा होता है। आम का पेड़, पीपल के पेड़ को समझाने की बहुत कोशिश करता है लेकिन पीपल का पेड़ टस से मस नहीं होता। अंत में, आम का पेड़ रानी मधुमक्खी को उसकी टहनियों पर छत्ता बनाने की अनुमति दे देता है। रानी मधुमक्खी आम के पेड़ पर अपना छत्ता बना लेती है और अपने झुण्ड के साथ वहीं रहने लगती है।

कुछ दिनों के बाद, दो लकड़हारे जंगल में आते हैं। वह बड़े से आम के पेड़ को देखकर सोचते हैं कि इस पेड़ की लकड़ियाँ बहुत महँगी बिकेंगी। लेकिन तभी उनकी नजर आम के पेड़ पर बने हुए मधुमक्खियॉं के छत्ते पर पड़ती है। मधुमक्खियों के डर के कारण वह आम के पेड़ को ना काटकर किसी और बड़े पेड़ की तलाश करने लगते हैं। 

तभी उन्हें पीपल का पेड़ दिखाई देता है जो आम के पेड़ से भी बड़ा और घना था। लकड़हारे पीपल के पेड़ को काटने लग जाते हैं, जिससे वह दर्द के मारे चिल्लाने लगता है। आम का पेड़, पीपल के पेड़ की दर्दनाक आवाज़ें सुनता है और रानी मधुमक्खी से पीपल के पेड़ की सहायता करने की गुज़ारिश करता है। 

रानी मधुमक्खी, आम के पेड़ की बात मानकर अपने झुण्ड के साथ लकड़हारों पर आक्रमण करती है। लकड़हारे मधुमक्खियों से डर कर भाग जाते हैं। पीपल का पेड़ अपने घमंड के लिए रानी मधुमक्खी से माफ़ी मांगता है। 

सारांश – हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए और अपने से छोटों की हमेशा सहायता करनी चाहिए। 


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