Friday, 16 November 2018

गरीब किसान

बहुत समय पहले की बात हैं किसी गाँव में एक अमीर साहूकार रहता था। उसे अपने पैसों पर बहुत घमंड था। एक दिन एक गरीब किसान उस साहूकार के पास मदद मांगने आया और कहने लगे, “सेठ जी, मुझे आपकी मदद की ज़रुरत हैं।” इसपर साहूकार ने कहा, “कैसी मदद?” किसान ने जवाब दिया, “मेरा सारा खेत बर्बाद हो गया हैं। मेरे पास कुछ काम नहीं हैं। मेरे बीवी बच्चे भूखे है घर पर खाने के लिए कुछ भी नहीं है सेठ जी।” साहूकार ने सोचा, “मैं अगर इसे पैसे उधर दे दूँगा, तो ये मुझे वापस लौटा नहीं पाएगा और मेरे पैसे बर्बाद हो जाएंगे।क्यों न मैं इसे अपने खेत में काम दे दू मुझे कुछ किसानों की ज़रूरत भी तो हैं।”  

इतना सोचकर उसने गरीब किसान से कहा, “ठीक हैं, कल से मेरे खेत में काम करने आ जाओ, मगर मैं तुम्हें सिर्फ दो सौ रुपए दूँगा। मंज़ूर हैं तो बोलो, वरना जाओ यहाँ से।” किसान मान गया। अगली सुबह से वो गरीब किसान साहूकार के खेत में काम करने आने लगा। अब धीरे-धीरे वह साहूकार उस गरीब किसान से खेत के साथ-साथ दूसरे काम भी करवाने लगा। लेकिन अभी भी वह उसे दिन भर की मेहनत के बस दो सौ रुपए ही देता था।


कुछ समय बाद साहूकार के खेत का काम खत्म हो गया। तो साहूकार ने सोचा, “मेरे खेत का काम तो हो चुका हैं तो अब मुझे इस किसान की कोई जरुरत नहीं हैं। अब मुझे इसे काम से निकाल देना चाहिए।” इतना सोच कर वह उस गरीब किसान के पास गया और कहा, “ये लो तुम्हारे पैसे, कल से तुम्हें आने की ज़रुरत नहीं हैं। खेत का काम भी खत्म हो चुका हैं।”  इसपर किसान ने उदास होकर बोला, “पर सेठ जी, मुझे मत निकालिये मुझे अभी काम कि ज़रुरत हैं। मुझे पैसों की ज़रुरत हैं।”

साहूकार ने कहा, “पर मैं क्या करूँ, मेरे खेत का काम खत्म हो चुका हैं। ये लो अपने पैसे और जाओ यहाँ से।” इतना कहकर उसने गरीब किसान को निकाल दिया। अगली सुबह वह गरीब किसान साहूकार के घर के बाहर आकर बैठ गया। सेठ ने उसे वहाँ देखकर हैरान होकर पूछा, “तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? मैंने तो तुम्हें कल निकाल दिया था।”

साहूकार ने उसे डांट कर भगा दिया। मगर अगली सुबह किसान फिर उसके घर के बाहर आ कर बैठा गया। यह देखकर साहूकार ने उससे फिर पूछा, “तुम फिर मेरे घर के बाहर क्या कर रहे हो?” इसपर किसान ने जवाब दिया, “आप ही मुझे काम दे सकते हैं। कृपया मुझे काम दे दीजिये। आप पहले मुझे दो सौ रुपए देते थे।अब बेशक आप मुझे सौ रुपए ही दे दीजिए मगर मुझे काम पर रख लीजिये, सेठ जी।”

लेकिन अगले दिन वह किसान फिर साहूकार के घर के बाहर बैठ गया और फिर अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही चला जिससे तंग आकर साहूकार ने उससे पीछा छुड़ाने के लिए एक तरकीब सोची, “यह गरीब किसान तो मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा । क्यों ना मैं दो-तीन दिन के लिए शहर चला जाऊँ।” ऐसा सोच कर साहूकार अगली सुबह किसान के आने से पहले ही अपने परिवार को लेकर शहर के लिए निकल गया। फिर कुछ समय बीत जाने के बाद वह साहूकार शहर से वापस आया और यह देख कर बहुत खुश हो गया की अब वह किसान उसके घर के बाहर नहीं आता है। ऐसे ही कुछ दिन बीत गए और फिर कुछ दिनों के बाद साहूकार ने सोचा, “ऐसा कैसे हो सकता हैं की इतने दिन बीत गए पर वह किसान मेरे घर नहीं आया आखिरकार उस किसान का हुआ क्या? उसे काम मिल गया या कुछ और मुझे पता लगाना चाहिए। ” 

इतना सोच कर फिर वह उसे ढूंढने निकल पड़ा। वह दूसरे खेतो में जा-जा कर किसानों से पूछने लगा, “क्या तुमने उस किसान को देखा ? जो कुछ दिन पहले मेरे खेत में काम किया करता था।” किसी भी किसान को उसके बारे में नहीं पता था। तभी अचानक से एक किसान आया और उसने बताया, “हाँ सेठ जी ! मुझे पता हैं कि वो किसान कहाँ गया। जब अाप कुछ दिनों से घर पर नहीं थे। तभी आपके घर में कुछ चोर आये थे, मगर किस्मत से उस वक़्त वो किसान भी वहीं था। उस किसान ने उन चोरों को रोकने की बहुत कोशिश की जिससे उनके बीच बहुत हाथापाई हो गयी जिसकी वजह से उस किसान को बहुत चोटें भी आयी हैं। इसलिए आज कल वो अपने घर पर आराम कर रहा है।” 

यह सुन कर साहूकार को अपनी गलती का एहसास हो गया था। वह उस गरीब किसान से मिलने उसके घर चला गया। और उससे कहने लगा, “मुझे माफ़ कर दो। मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया हैं। मुझे तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। यह लो तुम्हारी अब तक की मेहनत की कमाई जो मैंने तुम्हें नहीं दी थी।” किसान ने साहूकार का शुक्रिया अदा किया। 

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Wednesday, 14 November 2018

पंचतंत्र की कहानी - श्रापित दानव


सुंदरवन जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। जिनके साथ बालू नाम का एक आदिमानव भी रहता था। बालू सभी जानवरों की बोली जानता था इसलिए वह जंगल में बहुत खास था। एक दिन जंगल में बहुत बड़ा दानव आया वह बहुत ख़ूँख़ार था। उसके सामने जो भी जानवर आता वह उसे तुरंत खा जाता। सभी जानवर दानव को देखते ही अपनी जान बचने के लिए यहाँ-वहां भाग रहे थे।  तभी एक खरगोश दानव के हाथ आ गया और दानव ने उसे खा लिया। 

खरगोश को खाने के बाद दानव बाकि जानवरों की तरफ बढ़ने लगा। सभी जानवर डर कर भागे-भागे बालू के पास गए। सबको अपने पास आता हुए देख बालू ने पूछा, “अरे! क्या हुआ? तुम सब इतना परेशान क्यों हो।” इसपर शेर ने जवाब दिया, “बालू भाई!! जंगल में एक दानव आ गया है। वह सभी जानवरों को मारकर खा रहा है।” बालू ने उस दानव के पास जाने के लिए कहा तभी शेर ने कहा, “नहीं नहीं वह बहुत भयंकर और खतरनाक है वह तुम्हें भी खा जाएगा।” इसपर बालू ने कहा, “नही वह मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा तुम बस मुझे उसके पास ले चलो।” फिर बंदर उसे दानव के पास लेकर गया। 





बंदर और बालू दानव के पास गए। बालू ने दानव से पूछा, “तुम कौन हो? जंगल के जानवरों को क्यों खा रहे हो?” इसपर दानव ने जवाब दिया, “मैं दूर गुफा में रहने वाला दानव हूँ। मैंने बहुत समय से कुछ नहीं खाया है। इसलिए मैं बहुत भूखा हूँ। अपनी भूख मिटाने के लिए मैं जानवरों को खा रहा हूँ। लेकिन अब मैं तुम्हें खा कर अपनी भूख मिटाऊंगा। यह सुनकर बालू बोला, “नहीं नहीं तुमने तबसे कितने जानवरों को मार कर खाया लिया है। अभी-अभी तुमने एक खरगोश को खाया है। आखिर तुम्हें इतनी जल्दी भूख कैसे लगा गयी ?”

इसपर दानव ने बोला, “तुम नहीं जानते मैं कितने समय से भूखा हूँ। एक-दो खरगोश खाने से थोड़ी ही मेरी भूख शांत होगी। मेरी भूख सिर्फ तालाब के मगरमच्छ ही मिटा सकते है। अगर तुम तालाब से मेरे लिए दो मगरमच्छ ले आओ। तो मैं इस जंगल के जानवरों को नहीं खाऊंगा। पर ध्यान रहे अगर तुम मगरमच्छ नहीं ला पाये तो सबसे पहले मैं तुम्हें खाऊंगा। बालू ने मगरमच्छ लाने को हाँ कह दिया और वो दोनों साथ में तालाब तक गए। 


जैसे ही बालू और दानव तालाब तक पहुंचे। दानव एक पेड़ के निचे बैठ गया। और बालू को तालाब में भेज दिया। बालू ने देखा की तालाब में सिर्फ एक ही मगरमच्छ था। यह देखकर बालू ने मगरमच्छ से पूछा, “इस तालाब के बाकि मगरमच्छ कहाँ है?” यह सुनकर मगरमच्छ ने बोला, “इस तालाब में सिर्फ मैं रहता हूँ।” बालू यह देखकर दुखी हो गया और बोला, “पर मुझे तो दानव ने दो मगरमच्छ लाने के लिए कहा है।”


यह सुनकर मगरमच्छ बोला, “अच्छा तो तुम्हें दानव ने भेजा है। क्या तुमने नहीं सोचा की दानव ने तुम्हें मगरमच्छ लेने के लिए क्यों भेजा है।” इसपर बालू जवाब दिया, “ क्योंकि शायद वह तैरना नहीं जानता।” मगरमच्छ ने बोला, “ नहीं वह तैरना तो जानता है, लेकिन एक संत के श्राप के कारण वह इसमें तो क्या किसी भी तालाब में नहीं तैर सकता। 

यह सुनकर बालू को एक तरकीब आयी और मगरमच्छ से मदद मांगी, “तुम मुझे अपनी पीट पर बिठा कर तालाब के उस पर ले जाओ।” मगरमच्छ बालू को तालाब के पार ले गया। 

बालू ने दानव को बुलाया, “दानव भाई मैंने मगरमच्छ पकड़ लिया है। पर इसे खाने के लिए तुम्हें तालाब के इस पार आना होगा नहीं तो मगरमच्छ पानी में वापिस चला जाएगा। मगरमच्छ को देखते ही दानव के मुँह में पानी आ गया। और वह यह भूल गया की तालाब के अंदर जाने से वो डूब जाएगा। दानव लालच में आकर तालाब के अंदर चला गया और डूब कर मर गया। इस तरह जंगल के जानवरों को दानव से छुटकारा मिल गया। उन सभी ने बालू का ध्यानवाद करा। 


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Saturday, 10 November 2018

पंचतंत्र की कहानी - खूनी झील

ढोलकपुर के जंगल में सभी जानवर मिल-जुल कर रहते थे। उस जंगल में एक झील भी थी। सभी जानवरों का यह मानना था वह एक खूनी झील है। क्योंकि जंगल में पानी पीने का कोई साधन नहीं था इसलिए जानवरों को झील के पानी से ही काम चलाना पड़ता था। वह इस बात का विशेष ध्यान रखते थे कि वह सब शाम होने से पहले ही अपने घर लौट जाएँ। क्योंकि जो भी उस झील के पास अकेला जाता था, वह कभी वापिस नहीं आता था। इसलिए जंगल के सभी जानवर झील के पास अकेले जाने से डरते थे। एक दिन, चुन्नू नाम का एक हिरन जंगल में रहने के लिए आया।

चुन्नू हिरन को अकेला देखकर जग्गू बंदर उसके पास आया और कहा, “अरे हिरन भाई, तुम कहाँ से आये हो, और तुम्हारा नाम क्या है ? आज से पहले तो तुम्हें इस जंगल में कभी नहीं देखा। इसपर चुन्नू ने जवाब दिया, “मेरा नाम चुन्नू है, और मैं दूसरे गाँव के जंगल से आया हूँ। यह सुनकर जग्गू ने कहा, “हम्म्म ! पर एक बात बताओ, तुम अपना जंगल छोड़ के इस जंगल में क्या करने आये हो?” इसपर चुन्नू ने कहा, “मैं इस जंगल में रहने आया हूँ, क्योंकि जिस जंगल में मैं रहता था, वहां मुझसे कोई प्यार नहीं करता, और ना ही कोई मेरे साथ खेलना पसंद करता था।”


जग्गू ने कहा, “अच्छा, यदि ऐसी बात है, तो तुम निश्चिन्त हो जाओ। इस जंगल के सभी जानवर बहुत अच्छे हैं। वह सब तुमसे दोस्ती जरूर करेंगे। मैं शाम को तुम्हें खुद सबसे मिलवाऊंगा, अभी तुम आराम कर लो, और हाँ अगर तुम्हें किसी भी चीज़ की जरुरत हो तो तुम मुझे बुला लेना। मैं सामने वाले पेड़ पर रहता हूँ।

चुन्नू ने कहा, “पर भाई, अपना नाम तो बताओ - मैं तुम्हें बुलाऊंगा कैसे ? और हाँ - यहां पानी पीने के लिए आस-पास कोई नदी या झील है क्या?” जग्गू ने कहा, “माफ़ करना दोस्त, मैं तुमसे बात करते-करते अपना नाम ही बताना भूल गया। मेरा नाम जग्गा है, यहां प्यार से सभी मुझे जग्गू बुलाते हैं। तुम भी मुझे जग्गू कह कर बुला सकते हो। यहां पास में ही एक झील है तुम वहां जाकर पानी पी सकते हो।”

चुन्नू ने कहा, “ठीक है जग्गू भाई, तुम्हारा बहुत धन्यवाद। मुझे तुमसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई। चलो मैं कुछ देर आराम कर लेता हूँ और तुमसे शाम को मिलता हूँ।” जग्गू वहां से चला गया। चुन्नू वहीं एक पेड़ के नीचे सो गया। शाम होने पर जग्गू बंदर ने चुन्नू हिरन को जंगल के सभी जानवरों से मिलवाया। तभी चुन्नू की मित्र्ता चीकू खरगोश से हो गयी। समय बीतता जा रहा था और उन दोनों की दोस्ती गहरी होती जा रही थी। एक दिन चुन्नू रोज़ की तरह पानी पीने के लिए शाम को झील पर गया। 

तभी चुन्नू को झील के अंदर से एक मगरमच्छ तेजी से अपनी और आता हुआ दिखाई दिया। चुन्नू डर के मारे कांपने लगा और किसी तरह वहां से भागता हुआ जंगल की तरफ गया। रास्ते में उसे चीकू खरगोश मिला और उसने कहा, “अरे-अरे चुन्नू भाई इतनी तेज़ी से भागते हुए कहाँ जा रहे हो?” इसपर चुन्नू ने जवाब दिया, “चीकू भाई, मैं झील पर पानी पीने गया था। वहां मुझे एक मगरमच्छ दिखा, जिसे मैने आज से पहले इस जंगल में कभी नहीं देखा,वो मेरी तरफ काफी तेज़ी से आ रहा था।”

चीकू ने कहा, “चुन्नू भाई, क्या तुम ये नहीं जानते की वह एक खूनी झील है?! तुम्हें शाम के वक़्त वहां अकेले नहीं जाना चाहिए।” तभी वहां जग्गू बंदर भी आ गया। चुन्नू ने सारी बात जग्गू को बताई। जग्गू ने चुन्नू से माफ़ी मांगते हुए कहा, “मुझे माफ़ करना चुन्नू भाई, मैं तुमसे बात करने में इतना व्यस्त हो गया था कि तुम्हें खूनी झील के बारे में बताना ही भूल गया। पर खूनी झील में मगरमच्छ कहाँ से आया?”

इसपर चीकू ने कहा, “हम्म्म ! इसका पता तो लगाना ही होगा। पर अभी आप दोनों इस बात का विशेष ध्यान रखना कि मगरमच्छ के बारे में किसी को भी कुछ पता नहीं चलना चाहिए।” चीकू पूरी रात सो नहीं पाया। वह इसी सोच में डूबा रहा कि आखिर खूनी झील में मगरमच्छ आया कहाँ से? कुछ देर सोचने के बाद चीकू खूनी झील का राज़ समझ गया।

चीकू मगरमच्छ का सच सबके सामने लाने के लिए अगली सुबह सभी जानवरों के साथ झील पर पहुंच गया। मगरमच्छ सबको एक साथ झील पर आता देख डर गया, इसलिए वो पानी के अंदर इस तरह छुप गया जैसे वह एक पत्थर हो। यह देखकर सभी जानवर एक साथ बोले, “अरे यह पत्थर झील में कहाँ से आया ? पहले तो यहां कोई पत्थर नहीं था।” इसपर चीकू बोला, “नहीं-नहीं। यह कोई पत्थर नहीं है, यह एक मगरमच्छ है।”

कोई भी जानवर उनका यकीन नहीं कर रहा था। चीकू मगरमच्छ की तरकीब समझ गया। इसलिए चीकू को एक आईडिया आया, “अरे हाँ, यह तो एक पत्थर ही है। लेकिन हम इस बात का यकीन तभी करेंगे अगर यह पत्थर हम सबको अपना परिचय खुद देगा।” यह बात सुनते ही मगरमच्छ जल्दी से बोल पड़ा, “हाँ, मैं एक पत्थर हूँ। और इस झील में कोई मगरमच्छ नहीं रहता। यहां तो बस मैं ही रहता हूँ।” इसपर चीकू ने हँसते हुए बोला, “अरे ओ मगरमच्छ, चल अब बाहर निकल। तू इतना नालायक है, कि तू यह भी नहीं जानता कि पत्थर बोलते नहीं हैं।”

सभी जानवर समझ गए की यह कोई पत्थर नहीं बल्कि एक मगरमच्छ था। उन सभी ने मिलकर मगरमच्छ को झील से भगा दिया, और इस तरह चीकू अपनी सूजबूझ से खूनी झील का सच सबके सामने ला पाया।

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गरीब किसान

बहुत समय पहले की बात हैं किसी गाँव में एक अमीर साहूकार रहता था। उसे अपने पैसों पर बहुत घमंड था। एक दिन एक गरीब किसान उस साहूकार के पास मदद...