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Showing posts from January, 2019

जादुई खिलौने

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एक बार की बात है, उन्नाव गाँव में गोपाल नाम का एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। उसके दो बच्चे थे। रिया और राहुल।दोनों ही बहुत तेज़ और बुद्धिमान थे। वह दोनों काम में अपने मम्मी-पापा की मदद करते थे।एक दिन गाँव के मेले में घूमते हुए रिया और राहुल दो मिट्टी के खिलौने खरीदते है और वापस घर आ जाते है।

रिया अपने खिलौने को बिस्तर के पास रख देती है और सौ जाती है।राहुल भी ऐसा ही करता है आधी रात बीतती है कि अचानक राहुल की नींद खुल जाती है। उसे कमरे के बाहर कुछ आवाज़े सुनाई देती है।तभी राहुल बोलता है , यह आवाज़ कैसी है ? सभी तो यहीँ सौ रहे है, फिर बाहर कौन हो सकता है ?

यह देखने के लिए राहुल उठकर कमरे से बाहर जाता है और जैसे ही बाहर का नज़ारा देखता है वह एकदम भौचक्का रह जाता है। वह भागता हुआ वापस कमरे में आता है और रिया को उठाता है।

राहुल घबराते हुए बोलता है, रिया उठो ! प्लीज जल्दी उठो, देखो कमरे के बाहर वह दोनों खिलौने.....
रिया बोलती है, क्या हुआ राहुल ? क्यों इतनी रात को क्यों चिल्ला रहे हो ?
राहुल : चलो मेरे साथ ! वह देखो बाहर दोनों खिलौने, बात कर रहे है।

राहुल की यह बात सुनकर रिया उसके साथ कमरे से ब…

नीली चिड़िया

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नील गिरी नामक खूबसूरत जंगल में अलग-अलग तरह के सुंदर पक्षी रहते थे। उस जंगल में बहुत से लोग घूमने भी जाते थे। उस जंगल में एक नीली चिड़िया भी रहती थी। उस चिड़िया को अपने सूंदर रूप पर बहुत घमंड था। एक दिन तोता घूमता हुआ नीली चिड़िया के पास पहुँचा ।
“ कैसी हो नीली ? बहुत दिनों के बाद नज़र आयी ! कहाँ रहती हो आजकल ?”
नीली चिड़िया बोली “तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा क्या !? मैं अपने पंखों की सफाई कर रही हूँ, जाओ यहाँ से, और मुझे अपना काम करने दो।”
तोता गुस्से में बोला “इतना घमंड अच्छा नहीं होता नीली ! तुम्हें इसका सबक एक दिन जरूर मिलेगा।”
यह बोल कर तोता वहाँ से गएा  तोते को नज़रअंदाज़ करते हुए नीली चिड़िया फिर से अपने खूबसूरत पंखों में खो जाती |
इस तरह कुछ दिन बीत जाते हैं। एक दिन जंगल में कोयल का जन्मदिन मनाने की तैयारियाँ चल रही होती हैं ।
कबूतर “आज तो बहुत मज़ा आएगा ! हम सब कोयल का जन्मदिन बहुत ही धूम-धाम से मनाएंगे।”
तोता भी बोलता है “हाँ कबूतर भाई ! सही कह रहे हो तुम, आज तो सारी रात पार्टी होगी ।
सब पक्षी बातें कर रहे होते हैं, इतने में वहाँ नीली चिड़िया भी आ जाती है।
कौआ नीली चिड़िया को देखते हुए बोलता है “…

जादुई डिब्बा

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बहुत समय पहले किसी गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था। रवि के माता-पिता का निधन हो चुका था इसलिए वो अपनी चाची के साथ रहता था। रवि अपनी चाची से बहुत प्यार करता था। वो अपनी चाची की घर के सभी कामों में मदद करता था| लेकिन उसकी चाची उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी|

एक दिन चाची ने रवि को घर से निकालने की योजना बनाई और रवि से कहा, “बेटा, मैं कुछ दिनों से बहुत बीमार हूँ| कुछ दिनों तक काम पर नहीं जा पाऊँगी। इसलिए हो सके तो तुम मेरे भाई के खेत में काम करने चले जाओ|” रवि बोला, “मैं कल ही आपके भाई के घर चला जाऊँगा|”
रवि अपनी चाची के भाई के घर चला गया। कुछ दिनों में ही रवि समझ गया कि उसकी चाची  का भाई बहुत लालची है| वो रवि से खूब काम करवाता था लेकिन उसे ज़्यादा कुछ खाने को नही देता था| एक दिन रवि खेत में काम कर रहा था तभी उसने रवि से कहा, “ओ लड़के, ज़रा अच्छे से खुदाई कर! नहीं तो आज भी खाना नहीं मिलेगा”!

ये सुनकर रवि बहुत दुखी हो गया भूखा होने के कारण खाने के बारे में सोचते हुए खुदाई करने लगा। तभी खुदाई करते-करते उसे एक डिब्बा मिला। रवि ने जैसे ही उस डिब्बे को खोला तो उसे उस डिब्बे में अलग-अलग प्रकार …

नैतिक कहानियाँ - लोमड़ी का भूत

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किसी जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। सभी खुद को एक-दूसरे से ज्यादा समझदार और ताक़तवर मानते थे। इसीलिए - वह सब एक दूसरे से लड़ते - झगड़ते रहते थे। एक दिन, उस जंगल में किसी दूसरे जंगल से लोमड़ी आयी । जंगल में आते ही सबसे पहले वह गीदड़ से मिली , फिर वह तालाब की तरफ बढ़ जाएगी । हाथी उस समय तालाब में पानी पी रहा था। लोमड़ी भी वहाँ पानी पीने रुक गई ।
तभी हाथी लोमड़ी की तरफ देखते हुए बोलता है , तुम यहाँ क्या कर रही हो ? यह मेरा पानी पीने का समय है। जाओ यहाँ से।
तभी लोमड़ी बोलती है , यह कैसी बात हुई ? पानी पीने का भी भला कोई समय होता है ?
लोमड़ी की बाते सुनकर हाथी को गुस्सा आ जाता है। वह लोमड़ी की तरफ गुस्से से देखने लगता है। हाथी को गुस्से में देखकर लोमड़ी घबरा जाती है और वहाँ से चली जाती है।
लोमड़ी जैसे ही जंगल के अंदर पहुँचती हैं तो उसे आते हुए सियार देख लेता हैं।
सियार लोमड़ी से बात कर ही रहा होता है , की तभी उसे दूर से हाथी आते हुए दिखाई देता है । हाथी को देखकर सियार वहाँ से चला जाता है और दूर एक पेड़ के पीछे जाकर छुप जाता है ।
इतने में हाथी लोमड़ी के पास पहुँच जाता है और लोमड़ी की तरफ ध्यान न देते …

घमंडी राजकुमारी

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किसी राज्य में पृथ्वी सिंह नाम के एक बहुत दयालु राजा का शासन था। राजा की एक बेटी थी जो बहुत सुन्दर थी। उसका नाम जाह्नवी था। जाह्नवी बहुत ही घमंडी थी। उसे अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड था| राजा पृथ्वी सिंह अपनी बेटी के लिए एक योग्य वर की तलाश कर रहे थे। उन्हें लगता था कि एक बार राजकुमारी की शादी हो जाए तो उनके बर्ताव और व्यवहार - दोनों में परिवर्तन आ जाएगा। एक दिन राजा पृथ्वी सिंह ने अपनी बेटी के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया।
दूर दूर से राजा राजकुमारी के स्वयंवर में भाग लेने आए। राजकुमारी जाह्नवी दरबार में आई और एक एक कर सभी राजकुमारों का अपमान करने लगी। पहले राजकुमार के पास पहुँचकर उसने कहा, “यह तो बहुत छोटा है!” फिर वो दूसरे राजकुमार के पास गई और बोली, “यह तो एकदम खम्भे जैसा लंबा है!”
तीसरे राजकुमार को उसने कहा, “यह तो एकदम कद्दू जैसा गोल है|” और फिर आख़िर में वो राजा विक्रम के पास गई और जोर से हँसते हुए बोली, “हाहाहा! इसे देखो तो सही... इसकी दाढ़ी कितनी अजीब और लंबी है। और इसका चेहरा भी कितना लंबा है। इसे तो हम महल में नौकर भी ना रखें।”
ये कहकर राजकुमारी सभी का अपमान करते हुए आगे बढ़त…

जादूगरनी और अर्जुन

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धवलपुर नामक गाँव में अर्जुन नाम का एक बच्चा रहता था। वह बहुत ही नटखट और शैतान था। गाँव के सभी लोग उसकी शरारतों से बहुत परेशान थे। अर्जुन गाँव के बच्चों को तो सताता ही था, साथ ही बड़ों को भी बहुत परेशान करता था। उसे हर समय सिर्फ शरारत ही सूझती थी। 
एक दिन गाँव के सरपंच, एक घने पेड़ के नीचे पंचायत लगा कर बैठे हुए थे। तभी वहां बहुत तेज़ हवा चलने लगती है। यह सब देखकर गाँव वाले सोच में पड़ जाते हैं,  तभी सरपंच बोलते है।  तुम सब शांत हो जाओ। अगर इस गाँव पर कोई मुसीबत आने वाली है, तो हम सब उसका मिलकर सामना करेंगे। 
सरपंच के ऐसा बोलते ही हवा रुक जाती हैं और उन सबके सामने एक जादूगरनी आती है, जिसका नाम होता है - शकीरा।  शकीरा अपने जादू से सभी गाँव वालों को रस्सी से एक साथ बाँध देती है और पूरे गाँव में कोहराम मचा देती है। पास की झाड़ियों में छुपा अर्जुन यह सब देखता रहता है। 

गाँव वालों को परेशान देखकर अर्जुन उस जादूगरनी को भगाने के लिए तरकीब सोचने लगता है। काफी देर सोचने के बाद जब अर्जुन को कोई तरकीब नहीं सूझती तो वह गाँव के बाहर रहने वाले साधू बाबा के पास जाता है। अर्जुन, साधु बाबा को सारी बात विस्तार से…