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Showing posts from November, 2017

पंचतंत्र की कहानी - शेर और गीदड़

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एक शेर और शेरनी अपने दो शावकों के साथ वन में रहते थे। दोनों में बहुत प्रेम था। शेर, शेरनी के लिए शिकार लेकर आता था और वह मिल-बाँट कर खा लेते  थे। एक दिन शेर को जंगल में शिकार के लिए कुछ भी नहीं मिला। जब वह वापिस अपने घर की ओर आ रहा था तो उसे गीदड़ का एक बच्चा नजर आया। इतने छोटे बच्चे को देखकर शेर को दया आ गई। उसे मारने के बजाए वह उसे अपने दांतो से पकड़कर गुफा में ले आया। गीदड़ के बच्चे को देखकर शेरनी को भी दया आ गई और वह अपने दोनों बच्चो के साथ उसे भी पालने लगी। 
तीनों बच्चे साथ खेलते-कूदते बड़े होने लगे। शेर के बच्चों को ये नहीं पता था की उनका तीसरा भाई एक गीदड़ है, शेर नहीं। एक दिन जब तीनों जंगल में घूम रहे थे, तो उन्हें हाथियों का एक झुण्ड नजर आया। हाथियों को देखकर गीदड़ ने अपने शेर भाइयों से कहा, “ये हाथी हमसे बहुत ही ताक़तवर हैं। हमें इनसे नहीं लड़ना चाहिए।” गीदड़ की ये बातें सुनकर उसके दोनों भाई जोर-जोर से हँसने लगे। गीदड़ को बहुत गुस्सा आया लेकिन वह कुछ नहीं कह पाया। घर आते समय, उसके दोनों भाई उसका रास्ते भर मजाक उड़ाते रहे। 
घर आकर गीदड़ ने सारी बात शेरनी को बताई, “माँ, आप इन्हें समझा लो। …

पंचतंत्र की कहानी - ऊँट और सियार

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पुराने समय की बात है, एक जंगल में क्रूर सिंह नाम का शेर रहता था। वह अपने साथियों के प्रति बहुत वफादार था, लेकिन उसके आस पास रहने वाले जानवर चापलूस थे और उसे हमेशा भड़काते रहते थे। एक दिन जंगल में ऊँट आ जाता है। यह देखकर शेर,सियार से कहता है, “जाओ, पता लगाओ कि ये कौन सा जानवर है?! हमने पहले कभी ऐसा जानवर नहीं देखा।"
यह सुनकर चापलूस सियार, शेर को बताता है, "इस जानवर को ऊँट कहते हैं और यह रेगिस्तान का जहाज़ कहलाता है। क्यों न हम इसका शिकार कर लेते हैं? शेर, सियार की बात सुनकर कहता है, "यह हमारा अतिथि है। इसको मैं कैसे हानि पहुंचा सकता हूँ?! तुम इस ऊँट को मेरे पास लेकर आओ। क्या पता ये हमसे मदद मांगने आया हो!"
यह सुनकर सियार खिसया कर वहाँ से चला जाता है। वह ऊँट को शेर के पास ले आता है और बताता है, "महाराज, यह ऊँट अपने साथियों से बिछड़ गया है और रास्ता भटक कर जंगल में आ गया है।" तब ऊँट, शेर से विनम्रता पूर्वक कहता है, “प्रणाम महाराज। मैं आपको कभी भी शिकायत का मौका नहीं दूंगा और आपकी हर आज्ञा का पालन करूंगा। कृपया मुझे यहाँ रहने दीजिये।" शेर की आज्ञा के बाद ऊँट …

पंचतंत्र की कहानी - मूर्ख गधा

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एक घने जंगल में शेर और सियार रहते थे। सियार अव्वल दर्जे का चापलूस था। एक बार शेर की हाथी से लड़ाई हो गई और शेर बुरी तरह से घायल हो गया। शेर की टांग में काफी चोट आई जिसकी वजह से उसका चलना मुश्किल हो गया। ना चल पाने की वजह से शेर शिकार नहीं कर पा रहा था और भूख से शेर की हालत ख़राब होती जा रही थी। 


ऐसे में शेर सियार को कहता है, "मैं जख्मी होने के कारण शिकार करने में असमर्थ हूँ। मेरी जगह तुम जाओ और किसी मुर्ख जानवर को मेरे पास लेकर आओ। उसके यहाँ आते ही मैं उसे मार दूंगा। तब हम दोनों के खाने का इंतजाम हो जाएगा।"


सियार उसकी आज्ञा के अनुसार किसी मुर्ख जानवर की तलाश करने के लिए निकल जाता है। जंगल से बाहर जाकर वह देखता है की एक गधा सूखी हुई घास चर रहा है। सियार को वो गधा देखने में ही मूर्ख लगता है। सियार उसके पास जाता है और बोलता है,“नमष्कार चाचा, कैसे हो? बहुत कमजोर लग रहे हो। क्या बात है?”


सहानुभूति पाकर गधा बोलता है,“नमष्कार। क्या बताऊँ, मैं जिस धोबी के पास काम करता हूँ। वह दिन भर काम करवाता है। पेट भर चारा भी नहीं देता।”


सियार बोलता है, “तो तुम मेरे साथ जंगल में चलो। वहां बहुत हरी-भरी …

पंचतंत्र की कहानी - मूर्ख को सीख

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बहुत पुरानी बात है, किसी जंगल में एक बड़े से पेड़ पर गोरैया का घोंसला था। एक दिन कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। ठंड से कांपते हुए तीन-चार बंदरों ने उसी पेड़ के नीचे आश्रय लिया जिस में गोरैया का घोंसला था। एक बंदर बोला, "कहीं से आग तापने को मिले तो ठंड दूर हो सकती है।" दूसरे बंदर ने सुझाया, "देखो, यहां कितनी सूखी पत्तियां गिरी पड़ी हैं। इन्हें इकट्ठा कर हम ढ़ेर लगाते हैं और फिर उसे सुलगाने का उपाय सोचते हैं।"
बंदरों ने सूखी पत्तियों का ढ़ेर बनाया और फिर गोल दायरे में बैठकर सोचने लगे कि ढ़ेर को कैसे सुलगाया जाए। तभी एक बंदर की नजर हवा में उड़ते एक जुगनू पर पडी और वह उसे देखकर चिल्लाने लगा, "देखो, हवा में चिंगारी उड़ रही है। इसे पकडकर,ढ़ेर के नीचे रखकर फूंक मारने से आग सुलग जाएगी।" 'हां हां!' कहते हुए बाकी बंदर भी जुगनू की ओर दौडने लगे। पेड़ पर अपने घोंसले में बैठी गौरैया यह सब देख रही थी। उससे चुप नहीं रहा गया। वह बोली, "बंदर भाइयों, यह चिंगारी नहीं हैं। यह तो जुगनू है।"
एक बंदर क्रोध से गौरैया की ओर देखकर गुर्राया, "मूर्ख चिड़िया, चुपचाप घोंसले में दुबकी …