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Showing posts from November, 2018

जादुई बाँसुरी

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रूप नगर के जंगल में एक साधु बाबा रहते थे। साधु बाबा बहुत दयालु और ज्ञानी थे। वह जंगल के सभी जानवरों का बहुत ध्यान रखते थे। उस जंगल में एक बंदर भी रहता था, जो सभी जानवरों की नक़ल करता था। जानवर उसकी इस आदत से बहुत परेशान थे, इसलिए वह सभी उसे खुद से अलग मानते थे। उससे कोई मित्र्ता नहीं करता था। 
इसलिए बंदर एक दिन साधु बाबा के पास गया और बोला, “प्रणाम बाबा!” साधु ने जवाब दिया, “खुश रहो ! - क्या हुआ तुम इतने दुखी क्यों हो? इसपर बंदर ने दुखी होकर कहा, “बाबा, मुझे इस जंगल के जानवर खुद से अलग मानते हैं। क्योंकि मैं इंसानों की तरह दो पैरों पर चल सकता हूँ, जिसके कारण जंगल के अन्य जानवर ना तो मुझसे मित्रता करते हैं और ना मेरी कोई बात सुनते हैं। मैं तो उनसे मित्र्ता करना चाहता हूँ।” इसपर साधु ने सोचते हुए कहा, “हम्म…. तुम चिंता मत करो। मैं इसका कोई ना कोई हल ज़रूर निकाल लूँगा।”
साधु बाबा अपनी कुटिया के अंदर गए और कुछ देर बाद एक बाँसुरी ले कर आये और बोले, “यह लो, तुम इस बाँसुरी को रख लो।” बंदर ने उस बाँसुरी को देखते हुए कहा, “पर बाबा, मैं इस बाँसुरी का क्या करूँगा?” साधु ने जवाब दिया, “यह कोई साधा…

गरीब किसान

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बहुत समय पहले की बात हैं किसी गाँव में एक अमीर साहूकार रहता था। उसे अपने पैसों पर बहुत घमंड था। एक दिन एक गरीब किसान उस साहूकार के पास मदद मांगने आया और कहने लगे, “सेठ जी, मुझे आपकी मदद की ज़रुरत हैं।” इसपर साहूकार ने कहा, “कैसी मदद?” किसान ने जवाब दिया, “मेरा सारा खेत बर्बाद हो गया हैं। मेरे पास कुछ काम नहीं हैं। मेरे बीवी बच्चे भूखे है घर पर खाने के लिए कुछ भी नहीं है सेठ जी।” साहूकार ने सोचा, “मैं अगर इसे पैसे उधर दे दूँगा, तो ये मुझे वापस लौटा नहीं पाएगा और मेरे पैसे बर्बाद हो जाएंगे।क्यों न मैं इसे अपने खेत में काम दे दू मुझे कुछ किसानों की ज़रूरत भी तो हैं।”  
इतना सोचकर उसने गरीब किसान से कहा, “ठीक हैं, कल से मेरे खेत में काम करने आ जाओ, मगर मैं तुम्हें सिर्फ दो सौ रुपए दूँगा। मंज़ूर हैं तो बोलो, वरना जाओ यहाँ से।” किसान मान गया। अगली सुबह से वो गरीब किसान साहूकार के खेत में काम करने आने लगा। अब धीरे-धीरे वह साहूकार उस गरीब किसान से खेत के साथ-साथ दूसरे काम भी करवाने लगा। लेकिन अभी भी वह उसे दिन भर की मेहनत के बस दो सौ रुपए ही देता था।


कुछ समय बाद साहूकार के खेत का काम खत्म हो गया।…

पंचतंत्र की कहानी - श्रापित दानव

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सुंदरवन जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। जिनके साथ बालू नाम का एक आदिमानव भी रहता था। बालू सभी जानवरों की बोली जानता था इसलिए वह जंगल में बहुत खास था। एक दिन जंगल में बहुत बड़ा दानव आया वह बहुत ख़ूँख़ार था। उसके सामने जो भी जानवर आता वह उसे तुरंत खा जाता। सभी जानवर दानव को देखते ही अपनी जान बचने के लिए यहाँ-वहां भाग रहे थे।  तभी एक खरगोश दानव के हाथ आ गया और दानव ने उसे खा लिया। 

खरगोश को खाने के बाद दानव बाकि जानवरों की तरफ बढ़ने लगा। सभी जानवर डर कर भागे-भागे बालू के पास गए। सबको अपने पास आता हुए देख बालू ने पूछा, “अरे! क्या हुआ? तुम सब इतना परेशान क्यों हो।” इसपर शेर ने जवाब दिया, “बालू भाई!! जंगल में एक दानव आ गया है। वह सभी जानवरों को मारकर खा रहा है।” बालू ने उस दानव के पास जाने के लिए कहा तभी शेर ने कहा, “नहीं नहीं वह बहुत भयंकर और खतरनाक है वह तुम्हें भी खा जाएगा।” इसपर बालू ने कहा, “नही वह मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा तुम बस मुझे उसके पास ले चलो।” फिर बंदर उसे दानव के पास लेकर गया। 




बंदर और बालू दानव के पास गए। बालू ने दानव से पूछा, “तुम कौन हो? जंगल के जानवरों को क्यों खा रहे हो?”…

पंचतंत्र की कहानी - खूनी झील

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ढोलकपुर के जंगल में सभी जानवर मिल-जुल कर रहते थे। उस जंगल में एक झील भी थी। सभी जानवरों का यह मानना था वह एक खूनी झील है। क्योंकि जंगल में पानी पीने का कोई साधन नहीं था इसलिए जानवरों को झील के पानी से ही काम चलाना पड़ता था। वह इस बात का विशेष ध्यान रखते थे कि वह सब शाम होने से पहले ही अपने घर लौट जाएँ। क्योंकि जो भी उस झील के पास अकेला जाता था, वह कभी वापिस नहीं आता था। इसलिए जंगल के सभी जानवर झील के पास अकेले जाने से डरते थे। एक दिन, चुन्नू नाम का एक हिरन जंगल में रहने के लिए आया।
चुन्नू हिरन को अकेला देखकर जग्गू बंदर उसके पास आया और कहा, “अरे हिरन भाई, तुम कहाँ से आये हो, और तुम्हारा नाम क्या है ? आज से पहले तो तुम्हें इस जंगल में कभी नहीं देखा। इसपर चुन्नू ने जवाब दिया, “मेरा नाम चुन्नू है, और मैं दूसरे गाँव के जंगल से आया हूँ। यह सुनकर जग्गू ने कहा, “हम्म्म ! पर एक बात बताओ, तुम अपना जंगल छोड़ के इस जंगल में क्या करने आये हो?” इसपर चुन्नू ने कहा, “मैं इस जंगल में रहने आया हूँ, क्योंकि जिस जंगल में मैं रहता था, वहां मुझसे कोई प्यार नहीं करता, और ना ही कोई मेरे साथ खेलना पसंद करता था।”

पंचतंत्र की कहानी - बुद्धिमान मधुमक्खी

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किसी जंगल में मधुमक्खियों का एक झुंड रहता था। वह सभी जंगल के सबसे खुशबूदार और मीठे फूलों पर बैठा करती थी और उनका रस पीती थी। उन्ही में एक मिंटी नाम की मधुमक्खी भी थी। मिंटी बहुत ही नटखट और शैतान थी - लेकिन वह बाकि सब मधुमक्खियों से ज्यादा समझदार और बुद्धिमान थी। उसे अलग - अलग तरह के फूलों की काफी पहचान थी।

मिंटी हमेशा अपनी ही धुन में मग्न रहती थी। वो अपने मन मुताबिक काम किया करती थी। मधुमक्खियों का झुंड हमेशा जहाँ भी जाता था, साथ में ही जाता था लेकिन मिंटी हमेशा अपनी शैतानियों से उन सब को बहुत परेशान करती रहती थी झुंड से अलग जाकर ही रस पिया करती थी। इसी वजह से रानी मधुमक्खी मिंटी को हमेशा डाँटती थी। उस पर गुस्सा करती रहती थी, लेकिन मिंटी को इन सभी चीज़ो से कोई फ़र्क नहीं पड़ता था। वह मस्त रहती थी। अपने दोस्त हाथी के साथ खेलती रहती थी।


ऐसे ही एक दिन जब वह मधुमक्खियाँ झुंड बनाकर रस पीने की लिए अपने छत्तों से बाहर निकली तो उन्होंने एक अजीब सी चीज़ देखी। उन्होंने देखा कि जिन फूलों का रस पीने के लिए वह सभी अपने छत्तों से इतनी दूर जाती थी आज अचानक वह फूल खुद उनके छत्तों के नीचे आ गए थे। यह देखकर …

तीन भाई और पत्थर का घर

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बहुत समय पहले, उत्तर प्रदेश के बिलासपुर गाँव में तीन भाई - राजेंद्र, गजेंदर, और सुरेंद्र रहते थे। तीनों भाइयों में बिलकुल भी नहीं बनती थी। उन्हें मिलजुलकर कोई भी काम करना पसंद नहीं था। जब वह छोटे थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी माँ खेती-बाड़ी करके घर चलाती थी। वह तीनों भी अपनी माँ की सहायता करते थे। एक दिन, उनकी माँ की तबियत ख़राब हो गयी। माँ ने अपने तीनों बेटों को बुलाया और उनसे कहा, “बच्चों, मैं अब बहुत समय तक जीवित नहीं रह पाउंगी। तुम तीनों मुझे बहुत प्रिय हो। मरने से पहले मैं बस तुम तीनों को अपने पैरों पर खड़ा देखना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि ऐसे झोपड़े में रहने की बजाय तुम्हारा एक बड़ा घर हो जिसमें तुम तीनों भाई साथ में, मिलजुलकर रहो। क्या तुम मेरी यह इच्छा पूरी करोगे?
माँ की यह बात सुनकर तीनों भाई सोच में पड़ गए। क्योंकि वह एक दूसरे को पसंद नहीं करते थे, उन्हें समझ नहीं आया कि वह क्या करे?!  अपनी माँ की ख़राब स्थिति को ध्यान में रख कर गजेंदर ने बोला, “ठीक है माँ। जैसा आपने कहा, हम ठीक वैसा ही करेंगे। बस आप पहले ठीक हो जाओ।”
गजेंदर का जवाब सुनकर माँ को संतुष्टि मिल गयी लेकिन …