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Showing posts from April, 2019

कंगारू की बॉक्सिंग

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किसी जंगल में बहुत सारे पक्षी और जानवर मिलजुलकर रहते थे ! वह हमेशा हर ऋतु का आनंद लेते थे।
वहा एक शेर भी रहता था जो कहता है  वाह दोस्तों ! आज तो मज़ा आ गया। कितनी चमकदार धूप खिली हुई हैं। कबूतर कहता है  हाँ शेर भाई ! बात तो तुम बिलकुल सही बोल रहे हो ! वरना कुछ दिनों से तो ठंड ने हमारी जान ही सुखा रखी थी। दूसरी तरफ बंदर कहता है अरे रे ! ठंड का तो पूछो ही मत, इस ठंड की वजह से मैं पिछले कुछ दिनों से भालू की गुफा में रह रहा हूँ। आज धूप निकली तो जान में जान आयी। 

कहाँ गर्मियों में यह धूप हमें एक आँख नहीं सुहाती और ठंड में वही चिलचिलाती धूप चमकती नज़र आ रही है ऐसा कौआ कहता है। भालू हस्ता है.....  हाहाहाहा। इसी पर सब हंसने लगते हैं, तभी वहाँ हिरण और तोता आते हैं। अरे दोस्तों क्या चल रहा है ? बहुत ठहाके लगाए जा रहे हैं। तोता कहता है  ज़रा हमें भी बता दो क्या बात है ? हम भी थोड़ा हंस लेंगे। कुछ देर ऐसे ही हंसी मज़ाक चलने के बाद कंगारू बॉक्सिंग करता हुआ आता है।

शेर (कंगारू को देखते हुए)  यह लो दोस्तों ! बॉक्सिंग किंग भी आ गए। इनके अंदर बॉक्सिंग के अलावा और कोई हुनर नहीं है। कोयल हस्ते हुए कहती है  हाह…

भूतिया आईना - भाग 2

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भूतिया आईना भाग-1 में बबली और चीकू अपने मम्मी-पापा के साथ नए घर में शिफ्ट हुए थे जहाँ उन्हें आईने का भूत सता रहा था। लेकिन चीकू की समझदारी और मम्मी-पापा की मदद से वह किसी तरह उस भूत से बच कर भागने में सफल रहते हैं।

महेश अपने परिवार के साथ घर से चले जाने के बाद उस घर को बेच देता हैं। घर के नए ख़रीदार का नाम अवनीश होता है जो अपनी बीवी और बेटे शेखर के साथ उस घर में शिफ्ट हो जाते है। वह तीनों अपने नए घर में आकर बहुत खुश होते है, और घर में इधर-उधर घूमने लगते हैं। घूमते हुए शेखर उस कमरे में पहुँचता है, जहाँ सारे आईने बंद होते हैं। 

शेखर कमरे में चारों तरफ देखते हुए कहता है, इस कमरे में इतने सारे आईने क्या कर रहे हैं ? इतना सोचते ही शेखर अपनी  मम्मी को इन सभी के बारे में बताने की सोचता है, यह सोचकर शेखर अपनी मम्मी के पास चला जाता है और उन्हें कमरे में रखे आईनों के बारे में बताता है। मम्मी उन सभी आइनों को घर में वापस उनकी जगह पर लगा देती है। और सभी उस घर में आराम से रहने लगते हैं। कुछ दिनों के बाद, रात को जब शेखर अपने कमरे में सो रहा था, तभी उसे एक आवाज़ सुनाई देती है। शेखर उठकर देखता है पर उसे …

पांडा की दोस्ती

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एक बार की बात हैं। किसी बर्फीले पहाड़ की चोटी पर ध्रुवीय भालू रहते थे। उसी पहाड़ पर नीचे की तरफ बहुत सारे पांडा भी रहते थे।बहुत दूर-दूर रहने की वजह से पांडा और ध्रुवीय भालू का कभी आमना-सामना नहीं हुआ था । एक दिन एक बच्चा पांडा अपनी माँ से पूछता हैं। माँ ! हम कभी पहाड़ के ऊपर की तरफ क्यों नहीं जाते ? पांडा की माँ अपने बच्चे से कहती है क्योंकि, ऊपर की तरफ ध्रुवीय भालू रहते हैं। मैंने सुना है की वह बहुत खतरनाक होते हैं। इसीलिए हम कभी पहाड़ के उस तरफ नहीं जाते और न ही वह कभी नीचे की तरफ आते हैं। पांडा अपनी  माँ से पूछता है, आप उनसे मिली हो ? नहीं बेटा ! मैं उनसे कभी नहीं मिली। ऐसा पांडा की माँ उससे कहती है चलो अब तुम अपने दोस्तों के साथ खेलों और मुझे आराम करने दो।
इसके बाद वह बच्चा पांडा वहा से चला जाता है।एक तरफ जहाँ पांडा, ध्रुवीय भालू के बारे में पूछता है, वही दूसरी तरफ एक ध्रुवीय भालू का बच्चा भी अपने पापा से पूछता हैं।

भालू का  बच्चा  पापा ! हम हमेशा इस चोटी पर ही क्यों रहते हैं ? कभी नीचे की तरफ क्यों नहीं जाते ? भालू के पापा कहते है  क्योंकि, पहाड़ की नीचे की तरफ पांडा रहते हैं और मैंने स…

अर्जुन और शाकाल

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हिमाचल प्रदेश में एक बहुत घना जंगल था। उस जंगल में एक बहुत बड़ी गुफा थी, जिसमे सीताराम नाम के एक साधु काफी समय से साधना कर रहे थे। सीताराम बहुत ज्ञानी और समझदार साधु थे। वह कभी किसी कि सहायता करने से पीछे नहीं हटते थे। वह जंगल के जानवरों की भी बहुत देखभाल करते थे। एक दिन पास के गाँव में रहने वाले आदित्य, अर्जुन, नेहा और भास्कर नाम के चार बच्चे जंगल में घूमने के लिए आये।

आदित्य बोला यह जंगल कितना घना है। नेहा बोली यह जंगल घना ही नहीं बहुत डरावना भी है । हाँ, तुम दोनों ठीक बोल रहे हो, देख कर ऐसा लगता है अर्जुन बोला। यहाँ कभी भी किसी लकड़हारे की नज़र नहीं पड़ी। वरना गाँव के तो सभी पेड़ों को लोग धुएं में उड़ा चुके हैं ।”

सभी बच्चे जंगल में बहुत दूर तक चले जाते हैं । चलते-चलते नेहा कि नज़र एक गुफा पर पड़ती है। “अरे देखो ! शायद वहाँ कोई गुफा है । ज़रूर उसमें कोई भयंकर जानवर रहता होगा । भास्कर ने कहा तुम भी बहुत भोली हो - अगर इस जंगल में कोई जानवर होता, तो वह अभी तक हमे खा नहीं लेता ! मुझे लगता है, उस गुफा में कोई नहीं रहता । हमे वहाँ जाकर कुछ देर आराम करना चाहिए ।”

आदित्य की बात सुनकर सभी बच्चे गुफा की…

जिन्न और ऊंट

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किसी जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। सभी जानवर जंगल को साफ़ रखते थे और अपने-अपने काम को समय पर करते थे। उसी जंगल में एक शक्तिशाली जिन्न भी रहता था। जंगल के सभी जानवर बहुत चुस्त थे, पर ऊंट बहुत आलसी था। ऊंट जंगल के किसी भी काम को नहीं करता था। सभी जानवर ऊंट से बहुत परेशान थे। एक दिन शेर ने एक सभा का आयोजन किया। सभी जानवर वहाँ इकठ्ठा हुए। 

मैने तुम सबको यहाँ एक खास वजह से बुलाया है ऐसा शेर ने कहा, सभी जानवर शेर से पूछने लगे कैसी वजह महाराज ? तो शेर ने कहा  यह जंगल हमारा घर है। इसलिए आज से हम सभी जानवर जंगल के सारे काम मिलजुल कर करेंगे। उन्हें यह बात अच्छी लगी और उन्होंने अपने-अपने काम आपस में बाँट लिया।  

घोडा कहने लगा  हम सबने तो अपने-अपने काम बाँट लिए पर ऊंट को तो कोई काम मिला ही नहीं। इस पर ऊंट ने कहा  मैं जंगल के सभी कामों को करने में तुम सबकी सहायता करूँगा। घोड़े को ये बात ठीक लगी ! तुम जंगल के सभी जानवरों की सहायता करना। 

सभी जानवरों अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए। यह देख कर ऊंट एक घने पेड़ के नीचे बैठ गया । जब कोई जानवर उसे काम के लिए बोलता, तो वह काम करने से मना कर देता। बहुत दिन बी…

घंटाघर का भूत

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मुंबई के अँधेरी नामक शहर में लगभग 100 साल पुराना घंटाघर था। उस घंटाघर में एक नथु नाम का भूत रहता था। पूरा शहर दहशत में था। शहर के लोग उस घंटाघर के पास जाने से बहुत डरते थे। शहर में नथु का खौफ इस कदर फ़ैला हुआ था, की उस घंटाघर की रखवाली के लिए भी कोई राजी नहीं होता था। पूरे शहर में उसे भूतिया घंटाघर कहा जाता था। एक रात दूसरे शहर से आये अमर, तुषार और साहिल उस भूतिया घंटाघर के पास से गुज़र रहे थे। तभी साहिल कहता है - अरे देखो कितना बड़ा घंटाघर है।इसपर अमर बोलता है की हाँ, बड़ा तो है पर डरावना भी बहुत लगता है।

तभी तुषार हस्ते हुए अमर से कहता है की  क्या यार अमर, तुम इतना डरते क्यों हो ?
मैं बिलकुल नहीं डरता अमर ने तुषार से कहा,  बल्कि मैं तो इस घंटाघर के अंदर जाने के लिए बहुत एक्ससिटेड हूँ।अगर ऐसी बात है, तो फिर क्यों ना इसके अंदर चला जाए, थोड़ा आराम भी कर लेंगे।
हाँ, वैसे भी मैं तो बहुत थक गया हूँ, चलो जल्दी अंदर चलते हैं।

वह तीनों भूतिया घंटाघर के अंदर जाते हैं और देखते हैं की वहां चारों तरफ पत्ते पड़े हुए हैं। अचानक उस घंटाघर का दरवाज़ा अपने आप बंद हो जाता है। वह तीनों घबरा जाते हैं।
अमर डरकर कहता…