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Showing posts from December, 2017

पंचतंत्र की कहानी - बुद्धिमान सियार और बेवक़ूफ़ चीता

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किसी जंगल में एक सियार रहता था।  एक दिन वह भोजन के लिए जंगल में भटक रहा था की उसे मरा हुआ हाथी दिखाई दिया। उसने हाथी के मृत शरीर पर दांत गड़ाए लेकिन खाल मोटी होने की वजह से वह हाथी को चीरने में नाकाम रहा। तभी वहाँ से शेर गुजर रहा था | शेर को देखकर सियार के मन में विचार आया की क्यों ना हाथी की खाल चीरने में शेर की मदद ली जाए?!

सियार ने आगे बढ़कर शेर का स्वागत किया और हाथ जोड़कर कहा, “स्वामी, आपके लिए मैंने इस हाथी को मारा है। आप इसे खाकर मुझ पर उपकार कीजिए।” शेर ने थोड़ा सोचकर कहा, “मैं किसी दुसरे जानवर के द्वारा किये गए शिकार को नहीं खाता। इसे तुम ही खाओ।" शेर का जवाब सुनकर सियार परेशान हो गया। उसे समझ नहीं आया की हाथी को कैसे खाया जाए?
थोड़ी ही देर में उसे एक बाघ नजर आया। बाघ मरे हुए हाथी को देखकर बहुत खुश हुआ। सियार, बाघ की मंशा समझ गया और बोला, "इस हाथी का शिकार शेर ने किया है। मुझे इसकी रखवाली करनी है। एक बार किसी बाघ ने उसके शिकार को खा लिया था तब से शेर, बाघ जाति से नफरत करने लगा है। अगर शेर को पता चल गया की इसे तुमने खाया है, तो तुम्हे जिन्दा नहीं छोड़ेगा।" यह सुनते ही ब…

पंचतंत्र की कहानी - नीला सियार

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किसी जंगल में अनेक प्रजातियों के जानवर मिल-जुल कर रहते थे। एक दिन उनको ये बात पता चली की पास के ही जंगल से चंपू नाम का सियार उनके जंगल में घुस आया है। सभी जानवर जानते थे की वह सियार बदमाश और धूर्त है। तभी एक दिन भोला नाम का बन्दर सभा में,सभी को चम्पू सियार के बारे में बताता है और उससे बचकर रहने की सलाह देता है। कुछ दिन बाद,रात को जब सब जानवर सो रहे होते हैं, तब सियार शिकार के लिए बाहर निकलता है। सियार को देखकर जंगली कुत्ते उसके पीछे पड़ जाते हैं। चम्पू सियार भागकर पास के ही गाँव में किसी धोबी की झोपड़ी में घुस जाता है। 



वह, वहाँ पर रखे हुए नीले रंग से भरे बड़े से ड्रम में छिप जाता है। जंगली कुत्ते चम्पू को ढूंढ नहीं पाते और वापस जंगल चले जाते हैं। कुत्तों के डर से चम्पू रात भर ड्रम में ही छुपा रहता है। सुबह जब वह ड्रम से बाहर निकलता है, तो आईने में देखता है की वह पूरा नीला हो गया है। वह अपने आपको नीले रंग में रंगा देखकर बहुत खुश होता है। 
सियार एक योजना बना कर जंगल वापस जाता है। जब सारे जानवर चम्पू सियार को नीले रंग में देखते हैं तो उसे पहचान नहीं पाते और बहुत डर जाते हैं। उन्हें समझ नहीं …

पंचतंत्र की कहानी - व्यापारी का पतन और उदय

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वर्धमान नामक शहर में एक बहुत ही कुशल व्यापारी रहता था। राजा को उसकी क्षमताओं के बारे में पता था जिसके चलते राजा ने उसे राज्य का प्रशासक बना दिया। अपने कुशल तरीकों से व्यापारी ने राजा और आम आदमी को बहुत खुश रखा। कुछ समय के बाद व्यापारी ने अपनी लड़की का विवाह तय किया। इस उपलक्ष्य में उसने एक बहुत बड़े भोज का आयोजन किया। इस भोज में उसने राज परिवार से लेकर प्रजा तक सभी को आमंत्रित किया। राजघराने का एक सेवक, जो महल में झाड़ू लगाता था, वह भी इस भोज में शामिल हुआ। मगर गलती से वह एक ऐसी कुर्सी पर बैठ गया जो केवल राज परिवार के लिए रखी हुयी थी। सेवक को उस कुर्सी पर बैठा देखकर व्यापारी को गुस्सा आ जाता है और वह सेवक को दुत्कार कर वह वहाँ से भगा देता है। सेवक को बड़ी शर्मिंदगी महसूस होती है और वह व्यापारी को सबक सिखाने का प्रण लेता है।
अगले ही दिन सेवक राजा के कक्ष में झाड़ू लगा रहा होता है। वह राजा को अर्धनिद्रा में देख कर बड़बड़ाना शुरू करता है। वह बोलता है, “इस व्यापारी की इतनी मजाल की वह रानी के साथ दुर्व्यवहार करे। ” यह सुन कर राजा की नींद खुल जाती है और वह सेवक से पूछता है, "क्या यह वाकई में स…

पंचतंत्र की कहानी - मूर्ख बुनकर

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बहुत पुरानी बात है, किसी नगर में एक जुलाहा रहता था। वह दिन-रात कपड़े बुनकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। एक दिन जब वह कपड़े बुन रहा था, तभी उसके सभी उपकरण टूट गए। उन उपकरणों की मरम्मत के लिए उसे नयी लकड़ियों की आवश्यकता थी। वह लकड़ियाँ लेने जंगल में गया और एक वृक्ष को देखकर रुक गया। उस वृक्ष की लकड़ियाँ उपकरणों के लिये बिलकुल उपयुक्त थी। जैसे ही उसने लकड़ियाँ काटने के लिए अपनी कुल्हाड़ी उठायी, उसे किसी की आवाज़ सुनाई दी। 
उस आवाज़ को सुनकर वह रुक गया। परन्तु दूर-दूर तक उसे कोई नजर नहीं आया। जब वह पुनः लकड़ी काटने के लिए तत्पर हुआ, तभी वृक्ष से एक देव प्रकट हुए और जुलाहे से कहा - “मैं इस वृक्ष का देव हूँ। मैं सालों से इस वृक्ष पर आराम करता आया हूँ। तुम इसे क्यों काटना चाहते हो?" यह सुनकर जुलाहे ने जवाब दिया - “हे देव ! मैं एक जुलाहा हूँ और मेरे उपकरणों की मरम्मत के लिए इस वृक्ष कि लकड़ियाँ बिलकुल उपयुक्त है।"
यह सुनकर देव कहते हैं - “इस वृक्ष को मत काटो। तुम जो चाहो वरदान माँग सकते हो।” वरदान की बात सुनकर वह अपनी पत्नी के साथ विचार-विमर्श करने के लिए देव से एक दिन का समय मांगता है। …