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Showing posts from October, 2018

भूतिया आईना

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बहुत समय पहले, चंडीगढ़ में चार लोगों का एक परिवार रहता था। परिवार में अशोक, अशोक की पत्नी, और उनके दो बच्चे  थे - जिनका नाम चीकू और बबली था।अशोक को अपने परिवार के साथ शहर में आये कुछ ही समय हुआ था। लेकिन नए घर में आते ही अशोक की बेटी बबली का बर्ताव कुछ बदल सा गया था। बबली ज्यादातर या तो अकेले रहती थी, या फिर आईने के सामने बैठकर कुछ ना कुछ बोलती रहती थी।
यह देखकर उसकी मम्मी ने पूछा, “बबली, यूँ अकेले बैठ कर किस से बातें करती हो तुम?” इसपर बबली ने कहा, “मम्मी! मैं अपने एक दोस्त से बात करती हूँ, जो मेरे आईने में रहता है। वह मुझसे बहुत सारी बातें करता है। ऐसे ही दिन बीतते गए और बबली का व्यवहार सबसे अलग होता जा रहा था। उसे घर के हर आईने में कोई ना कोई दिखाई देता था, जिससे वो रोज बातें किया करती थी और उसे अपना दोस्त बताती थी।

अपनी बहन के बदलते व्यवहार को देखकर चीकू उसपर नज़र रखने लगा। कुछ दिनों के बाद, चीकू को बबली के कमरे में से अजीब सी आवाज़ें आने लगी। चीकू बबली के कमरे में गया और अंदर जाकर चारों तरफ देखने लगा । चीकू को आईने में एक परछाईं दिखी जिसे देखकर वह बुरी तरह घबरा गया। चीकू कमरे से भा…

पंचतंत्र की कहानी - भूतिया पेड़

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किसी जंगल में बहुत सारे जानवर मिल-जुल कर रहते थे। सभी जानवर एक दूसरे की बहुत सहायता करते थे। उसी जंगल में एक घना पेड़ था। सभी जानवर पेड़ से दूर रहते थे क्योंकि सबका यह मानना था कि उस पेड़ पर भूत रहता है। एक दिन, जंगल में रहने के लिए भालू आया, “मैं इस जंगल में आ तो गया मगर अपनी गुफा कहाँ बनाऊं?”
भालू चलते-चलते पेड़ के पास पहुंचा। भालू ने गुफा बनाने का काम शुरू कर दिया कि तभी वहां बंदर और हाथी आये और बोले, “अरे भालू भाई, तुम यहां अकेले क्या कर रहे हो?” इसपर भालू ने जवाब देते हुए कहा, “मैं यहां रहने के लिए गुफा बना रहा हूँ।” बंदर ने कहा, “पर इस पेड़ पर भूत रहता है। तुम मेरे घर के नीचे अपनी गुफा बना लो, वहां तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी।  
तीनों वहाँ से चले जाते हैं। भालू ने अपनी गुफा ठीक उसी पेड़ के नीचे बनाई जिस पेड़ पर बंदर रहता था। भालू निश्चिंत होकर वहां रहने लगा। एक दिन भालू जंगल में घूमने के लिए निकला, घूमते-घूमते भालू उसी पेड़ के नीचे जा पहुँचा। भालू ने कहा, “अगर इस पेड़ पर भूत रहता है तो वह मुझे इतने दिन से दिखाई क्यों नहीं दिया ? मुझे लगता है यहां ज़रूर कुछ गड़बड़ है।”


भालू के ऐसा कहते ह…

नैतिक कहानियाँ - जादुई चश्मा

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किसी गाँव में एक गरीब किसान अपने परिवार के साथ रहता था। वह दिन रात मेहनत करके किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करता था। किसान के परिवार मे उसकी पत्नी कमला और बेटा राधे उसके साथ रहते थे । एक दिन किसान ने अपने बेटे राधे से बोला, “बेटा राधे, तुम्हारी माँ बाज़ार गयी है और मैं खेतों में बीज बोने जा रहा हूँ , इसीलिए तुम  घर पर ही रहना क्योंकि आजकल गांव मे बहुत चोरियाँ हो रही हैं।” इसपर राधे ने कहा, “ठीक है पिता जी आप निश्चिंत हो कर जाइए मैं कहीं नहीं जाऊँगा।” 
किसान ने खेत पहुँचकर खेत की खुदाई शुरू की। तभी उसे फावड़े के किसी धातु से टकराने की आवाज़ सुनाई दी उसने मिट्टी हटाकर देखा तो उसे एक चमकता हुआ डिब्बा दिखाई दिया । किसान ने उस डिब्बे को बाहर निकालकर देखा। किसान ने सोचा, “अरे वाह ! ऐसा लगता है इसमें ज़रुर कोई ख़ज़ाना होगा।” यह सोच कर किसान ने जैसे ही डिब्बे को खोलकर देखा, वह उदास हो गया और उसने कहा, “अरे ! यह तो बस एक बेकार सा चश्मा है। मेरी तो सारी मेहनत बेकार हो गई।”
यह सोच कर किसान ने उस चश्मे को वहीं छोड़ दिया और अपना काम करने लगा। थोड़ी देर बाद राधे वहां आया और खेत की रख वाली करने लगा। कि…

यमराज के दूत

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बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में राधेलाल और श्यामलाल नाम के दो मूर्तिकार रहते थे। दोनों ही बेहद सुंदर मूर्तियाँ बनाते थे, लेकिन उन दोनों में से राधेलाल गाँव में अपने काम के लिए ज्यादा मशहूर था। राधेलाल ऐसी मूर्तियाँ बनाता था जिन्हें देखकर लोगो को उन मूर्तियों के जीवित होने का भ्रम हो जाता था व आस - पास के गाँव में भी राधेलाल की मूर्तियों के बहुत चर्चे थे।
राधेलाल अपनी मूर्तिकार पर बहुत घमंड करता था और एक दिन उसी घमंड में उसने गाँव में एक घोषणा की, “मैं सबसे सुंदर मूर्तियाँ बनाता हूँ क्या इस गाँव या आस - पास के गाँव में कोई भी मूर्तिकार ऐसा हैं जो मेरे से अच्छी मूर्ति बना सकता हैं। अगर कोई ऐसा हैं तो मुझसे मूर्ति बनाने की प्रतियोगिता करे और अगर उसकी मूर्ति मुझसे बेहतर व सुंदर हुई तो मैं उसे एक थैली सोने के सिक्के दूँगा”
राधेलाल की यह बात सुन के गाँव का दूसरा मूर्तिकार श्यामलाल बोला, “मैं बनाऊंगा तुमसे अच्छी मूर्ति, बताओ कब करनी हैं प्रतियोगिता मैं तैयार हूँ।” अगले दिन सुबह वह दोनों मूर्तिकार अपने - अपने औजारों के साथ गाँव के मैदान पर पहुँच गए, जहाँ गाँव वालो ने पहले से दो बड़े पत्थर…

पंचतंत्र की कहानी - चतुर कौआ

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किन्नू नाम के जंगल में बहुत सारे जानवर मिलजुल कर रहते थे। उन्ही जानवरों में एक लोमड़ी भी थी। लोमड़ी की चतुराई के क़िस्से पूरे जंगल में प्रसिद्ध थे और सभी जानवर उससे बहुत सावधान रहते थे। क्योंकि लोमड़ी बहुत बूढ़ी हो गयी थी, इसलिए वह शिकार नहीं कर पा रही थी। जंगल में बहुत घूमने के बाद भी लोमड़ी को कोई शिकार नहीं मिला। वह बहुत थक गयी।

तभी उसकी नज़र थोड़ी दूरी पर एक कछुए पर पड़ी। कछुए को देखते ही लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया और वह सोचने लगी, “अरे वाह! आज तो मैं इस कछुए को खाकर ही अपनी भूख मिटाऊँगी। पर मैं इसे पकड़ूँ कैसे? शिकार करने की ताक़त तो मुझ मे बची ही नहीं है। अगर मैं इसके पास गयी तो ये भाग जाएगा। लोमड़ी को एक तरकीब सूझी वह कछुए के पास गयी और बोली, “अरे कछुए भाई ! कैसे हो? बहुत दिनों के बाद दिखे। कहाँ रहते हो आजकल ? मैंने शाम को जंगल में रहने वाले सभी जानवरों के लिए दावत रखी है।  मैं चाहती हूँ कि तुम भी दावत में ज़रूर आओ।

यह सुनकर कछुआ मान गया। कछुआ दावत में जाने से पहले अपने दोस्त कौए के पास गया। कछुए को देखते ही कौआ बोला, “और दोस्त आज कैसे आना हुआ ?” कछुआ बहुत खुश होकर बोला, “आज सुबह मुझे लोम…

नैतिक कहानियाँ - जादुई पेंसिल

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बहुत समय पहले किसी गाँव में सुन्दर नाम का एक आदमी रहता था। सुन्दर एक बहुत अच्छा चित्र्कार था। जब एक दिन खाना बनाने के लिए सुन्दर जंगल में लकड़ियाँ काटने जा रहा था। तभी उसकी नज़र एक चमकदार चीज़ पर पड़ी और बोला, “ये इतनी चमकदार चीज़ क्या है?” यह सोचकर सुन्दर उस चमकदार चीज़ के पास गया, और उसने उस चमकने वाली चीज़ को उठाकर बोला, “अरे ! यह तो बस एक पेंसिल हैं। पर ये इतनी चमक क्यों रही है?”
सुन्दर थोड़ी देर उस चमकने वाली पेंसिल को निहारता रहा। तभी उसे याद आया की उसे खाना बनाने के लिए लकड़ियाँ काटने जाना था। वह उस पेंसिल को अपने साथ लेकर वहाँ से चला गया। जब सुन्दर शाम को घर आया तो उसने देखा की अभी भी उस पेंसिल की चमक वैसे की वैसे ही थी। 
सुन्दर ने उस पेंसिल का इस्तेमाल किया, और उस पेंसिल से उसने चित्र्कारी करना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने एक सेब बनाया, और जैसे ही उस कागज़ पर सेब बन गया वह सेब उसकी आँखों के सामने असलियत में आ गया। जिसे देखकर सुन्दर एक दम हक्का-बक्का रह गया। उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था, फिर उसने दोबारा उस पेंसिल से एक कुल्हाड़ी बनाई। वह कुल्हाड़ी भी उसके सामने प्रकट हो गयी। सुन…