Wednesday, 31 January 2018

पंचतंत्र की कहानी - गिद्द और बिल्ली

बहुत पुरानी बात है। किसी जंगल में बड़े से बरगद के पेड़ पर अन्य प्रकार के पशु-पक्षी रहते थे। एक दिन, एक बूढ़ा गिद्ध उस पेड़ पर आश्रय लेने आया। वह गिद अँधा था। पेड़ के सभी पक्षियों ने गिद्ध की उम्र का लिहाज़ करते हुए उसे अपने साथ रहने के लिए जगह और खाना देने का फैसला किया। गिद्ध भी बदले में पक्षियों के बच्चों की रखवाली करने लगा। गिद्ध और पक्षी ख़ुशी-ख़ुशी साथ रहने लगे। 


फिर एक दिन, उस पेड़ के पास से एक बिल्ली जा रही थी। बिल्ली ने पेड़ से पक्षियों के चहकने की आवाज़ें सुनी। बिल्ली जैसे ही पेड़ पर चढ़ी, पक्षियों के बच्चे उसे देख कर डर गए। इससे पहले की बिल्ली बच्चों पर हमला कर पाती, गिद्ध ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, "कौन है वहां?"

बिल्ली गिद्ध की आवाज़ सुन कर डर गयी। उसको पता था की अगर उसे पक्षियों के बच्चों को अपना भोजन बनाना है तो पहले उसे गिद्ध से दोस्ती करनी पड़ेगी। बिल्ली ने गिद्ध से कहा "मैंने आपकी बुद्धिमानी और बड़प्पन के बारे में अपने साथी पक्षियों से बहुत कुछ सुना है। मैं आपसे मिलने आयी हूँ।"
गिद्ध को अपनी तारीफ सुनकर बहुत अच्छा लगा। उसने बिल्ली से पूछा, "तुम कोन हो?" बिल्ली ने जवाब दिया, "मैं एक बिल्ली हूँ।" गिद्ध को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया और उसने बिल्ली को तुरंत वहाँ से जाने को कहा। 

बिल्ली ने एक तरकीब सोची। बिल्ली ने गिद्ध से कहा, "गिद्ध चाचा, मैं अपने परिवार के साथ नदी के दूसरी तरफ रहती हूँ। मैंने और मेरे परिवार में से किसी ने भी कभी जीवन में मांसाहारी भोजन नहीं खाया। मुझे नहीं लगता आपके जैसा समझदार जीव मुझ जैसी बिल्ली को मारकर खाना पसंद करेगा।"

बिल्ली की बातों पर गिद्ध को विश्वाश नहीं होता | वह बिल्ली से कहता है, "तुम तो एक बिल्ली हो और अपने से छोटे पक्षियों को मारकर खाना तुम्हारा पेशा है। मैं तुम पर विश्वास कैसे करूँ?"

बिल्ली फिर से गिद्ध को भरोसा दिलाने के लिए कहती है, "गिद्ध चाचा, सभी बिल्लियां एक जैसी नहीं होती। खाने के लिए मैं कभी भी किसी को मार नहीं सकती। मेरा मानना है कि ईश्वर उन सभी को सज़ा देता है जो दूसरों को मारते हैं। वैसे भी जंगल में खाने के लिए काफी स्वादिष्ट फल और जड़ी-बूटियां हैं।"

गिद्ध को बिल्ली की बातों पर विश्वास हो जाता है। वह उसे अपने और बाकी पक्षियों के साथ पेड़ पर रहने की इजाजत दे देता है। अब बिल्ली हर रोज़ किसी एक पक्षी के बच्चे को मारकर खाने लग गयी थी। गिद्ध जब भी सोया होता, तब बिल्ली अपना शिकार करती। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या में कमी आने से बाकी पक्षियों को कुछ गड़बड़ लगी। वह अपने खोये हुए बच्चों को ढूंढ़ने के लिए जंगल में गए। जैसे ही बिल्ली को आभास हुआ की अब झूठ से पर्दा उठने वाला है, वह वहां से भाग गयी। जब पक्षी जंगल में अपने बच्चों को ढूंढ़ने में विफल होकर वापस पेड़ पर आये, तो उन्हें गिद्ध सोया हुआ मिला। गिद्ध जहाँ पर सोया था, उसके पास वाली टहनी में एक कोटर था। पक्षियों ने जैसे ही कोटर में झांक कर देखा, तो उसमें उन्हें ढेर सारी हड्डियां मिलीं। यह वही हड्डियां थी जो बिल्ली ने पक्षियों के बच्चों को खा कर वहां छुपा दी थी। 

उन हड्डियों को देख कर पक्षियों को आभास हुआ की वह हड्डियां उनके बच्चों की ही हैं। हड्डियां सोये हुए गिद्ध के पास मिलने पर उन्हें लगा कि गिद्ध ने ही सभी बच्चों को मार कर खाया होगा और हड्डियों को कोटर में छुपा दिया होगा। बूढ़े गिद्ध की इस करतूत के चलते पक्षियों के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा। सारे पक्षियों ने मिलकर गिद्ध पर अपनी चोंच से वार किया। क्योंकि गिद्ध सोया हुआ था, वह कुछ नहीं कर पाया और पक्षियों के हाथों मारा गया। इस तरह, गिद्ध के एक अनजान बिल्ली पर भरोसा करने से पहले पक्षियों के बच्चों को, और अंत में, खुद गिद्ध को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 


सारांश - आँख मूँद कर हमें कभी भी किसी अजनबी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। 


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Wednesday, 24 January 2018

पंचतंत्र की कहानी - अहंकारी पेड़ और मधुमक्खियाँ

बहुत पुरानी बात है, एक घना जंगल हुआ करता था। उसमें अनेक प्रकार के छोटे-बड़े जानवर रहते थे। जंगल में कई प्रकार के पेड़-पौधे थे जिनमें से एक पीपल और एक आम का पेड़ भी था। आम का पेड़ स्वभाव से अपने फल की तरह नरम था, जबकि पीपल का पेड़ स्वभाव से कठोर था।

एक दिन, रानी मधुमक्खी अपने साथियों के साथ जंगल में रहने आई। रानी मधुमक्खी ने देखा की पीपल का पेड़ बहुत बड़ा और घना है। वह उसी पेड़ पर छत्ता बनाने के बारे में सोचती है। इसके लिए वह पीपल के पेड़ से पूछती है, "पीपल महाराज, हम इस जंगल में नये हैं। कृप्या आप हमें आश्रय देकर हमारी सहायता करें।"



अपने स्वभाव के अनुरूप, पीपल का पेड़ रानी मधुमक्खी को छत्ता बनाने से मना कर देता है और उसे कहीं और छत्ता बनाने की सलाह देता है। रानी मधुमक्खी को यह सुनकर बहुत दुःख होता है। संयोग से, पास में खड़ा आम का पेड़ उन दोनों की बातचीत सुन रहा होता है। आम का पेड़, पीपल के पेड़ को समझाने की बहुत कोशिश करता है लेकिन पीपल का पेड़ टस से मस नहीं होता। अंत में, आम का पेड़ रानी मधुमक्खी को उसकी टहनियों पर छत्ता बनाने की अनुमति दे देता है। रानी मधुमक्खी आम के पेड़ पर अपना छत्ता बना लेती है और अपने झुण्ड के साथ वहीं रहने लगती है।

कुछ दिनों के बाद, दो लकड़हारे जंगल में आते हैं। वह बड़े से आम के पेड़ को देखकर सोचते हैं कि इस पेड़ की लकड़ियाँ बहुत महँगी बिकेंगी। लेकिन तभी उनकी नजर आम के पेड़ पर बने हुए मधुमक्खियॉं के छत्ते पर पड़ती है। मधुमक्खियों के डर के कारण वह आम के पेड़ को ना काटकर किसी और बड़े पेड़ की तलाश करने लगते हैं। 

तभी उन्हें पीपल का पेड़ दिखाई देता है जो आम के पेड़ से भी बड़ा और घना था। लकड़हारे पीपल के पेड़ को काटने लग जाते हैं, जिससे वह दर्द के मारे चिल्लाने लगता है। आम का पेड़, पीपल के पेड़ की दर्दनाक आवाज़ें सुनता है और रानी मधुमक्खी से पीपल के पेड़ की सहायता करने की गुज़ारिश करता है। 

रानी मधुमक्खी, आम के पेड़ की बात मानकर अपने झुण्ड के साथ लकड़हारों पर आक्रमण करती है। लकड़हारे मधुमक्खियों से डर कर भाग जाते हैं। पीपल का पेड़ अपने घमंड के लिए रानी मधुमक्खी से माफ़ी मांगता है। 

सारांश – हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए और अपने से छोटों की हमेशा सहायता करनी चाहिए। 


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Wednesday, 17 January 2018

पंचतंत्र की कहानी - गधे ने गाना गाया

पुराने समय की बात है, किसी गाँव में एक धोबी रहता था। उसके पास कालू नाम का गधा था। धोबी बहुत गरीब था और गधे को पेट भर खाना नहीं दे पाता था। कम खाना खाने के कारण कालू दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था। कालू की दयनीय हालत देख कर धोबी ने सोचा, "मेरी इतनी हैसियत तो नहीं है कि मैं इसे अच्छा खाना दे पाऊं। क्यों ना मैं इसे रात में खुला छोड़ दूँ? यह अपने आप ही गाँव के खेतों में चर लिया करेगा और इसकी सेहत भी अच्छी हो जाएगी।"


धोबी ने कालू गधे को रात के समय खुला छोड़ना शुरू कर दिया। एक रात जब कालू खेत में चर रहा था तो उसकी मुलाकात पप्पू नाम के सियार से हुई। दोनों साथ मिलकर रोज रात को खेतों में चरने जाते थे। दोनों में अच्छी दोस्ती भी हो गई थी। कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा। दोनों दोस्त हर रोज रात को पेट भर कर खाना खाते और सुबह होने से पहले वापस आ जाते।

ऐसे ही, एक रात दोनों दोस्त खेत में चर रहे थे। चांदनी रात होने के कारण कालू गधे का गाना गाने का मन हुआ। गधे ने सियार से कहा, "भाई, मेरा गाना गाने का मन कर रहा है।" सियार बहुत समझदार था। उसने गधे से कहा, "भाई, खाना चाहे जितना मर्ज़ी खा ले लेकिन गाना गाने के बारे में बिलकुल भी मत सोचना।  तुम्हारी बेसुरी आवाज सुनकर खेत का मालिक जाग जायेगा और हम दोनों की जमकर पिटाई करेगा।"

सियार की बात सुनकर गधा भड़क गया। कालू गधे ने गाना गाने की जिद पकड़ ली। जब सियार ने देखा कि गधे ने गाना गाने के लिए जिद पकड़ ली है, तो उसने खतरा भांपकर किसी सुरक्षित स्थान पर छिप जाने में ही अपनी भलाई समझी। सियार ने गधे से कहा, ‘भाई, अगर तुमने गाने का मन बना ही लिया है, तो मेरे इस खेत से बाहर निकलने तक शांत रहो।"

सियार के जाते ही गधे ने बहुत ऊंचे स्वर में रेंकना शुरू कर दिया। रेंकने की आवाज सुनते ही खेत के मालिक की नींद टूट गई और वह गुस्से में लाठी उठाए खेत की तरफ दौड़ता हुआ गया। फिर उसने कालू गधे की खूब पिटाई की। गधा किसी तरह गिरता-पड़ता अपनी जान बचाकर भाग गया।


सारांश:- हर काम को करने का एक उचित समय होता है। बेवक्त किसी भी काम को करने का नतीजा बुरा होता है।


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Wednesday, 10 January 2018

पंचतंत्र की कहानी - लालची ब्राह्मण

किसी जंगल में एक शेर रहता था। शेर की उम्र काफी बढ़ चुकी थी जिसकी वजह से उसे शिकार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। बढ़ती उम्र और शिकार ना मिलने के कारण वह दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था। एक दिन शेर को जंगल में चमकती हुई चीज मिली जिसे देखकर वह भौंचक्का रह गया।

शेर ने सोचा “अरे ये क्या है जो इतना चमक रहा है? मैंने पहले तो जंगल में ऐसी कोई चीज नहीं देखी?!" शेर उस चमकती हुई चीज को उठा लेता है और उसे अपने पास रख लेता है। वह सोचता है, "शायद यह आगे चलकर मेरे काम आ जाये। अगर वह कभी किसी इंसान को इसका लालच दूंगा तो वह मेरे पास ज़रूर आएगा। कम से कम मेरे भोजन का इंतजाम तो हो जाएगा।"


शेर सोने के कड़े को अपने मुंह में दबाए चल रहा था कि उसे एक आहट सुनाई देती है। वह उस आहट को बड़े ही ध्यान से सुनता है और फिर उसी दिशा में चला जाता है जहां से आवाज आ रही थी। शेर देखता है कि एक ब्राह्मण सामने से आ रहा है और फिर वह उस ब्राह्मण की ताक में झाड़ियों में छुप कर बैठ जाता है। जैसे ही ब्राह्मण शेर के सामने से गुज़रता है तो शेर उसे आवाज देता है |

ब्राह्मण रुक जाता है और अपनी नजरें चारों तरफ दौड़ाता है लेकिन उसे कुछ नजर नहीं आता। ब्राह्मण कहता है, "भाई, तुम कौन हो जो इस तरह से मुझे आवाज लगा रहे हो?” शेर झाड़ियों से बाहर आता है और ब्राह्मण शेर को देखकर डर जाता है। शेर कहता है, “मैं यहाँ से गुज़र रहा था कि मुझे ये सोने का कड़ा मिला। क्योंकि ये मेरे किसी काम का नहीं है, इसलिए मैं इसे किसी और को देना चाहता हूँ।"

यह सुनकर ब्राह्मण ने कहा, "तुम तो एक जानवर हो और मुझे मार कर खा जाओगे।" शेर ने जवाब दिया, "मुझसे डरने की आवश्यकता नहीं है। मैं बहुत बूढ़ा हो चूका हूँ। मेरे दांत टूट चुके हैं और नाख़ून भी घिस गए हैं।"

शेर ब्राह्मण के मन की बात भांप जाता है और उसे लालच देते हुए कहता है,“डरने की ज़रुरत नहीं है। लो, ये कड़ा तुम ले जाओ और इसे रख लो। कम से कम तुम्हारे काम तो आएगा।"

ब्राह्मण ने शेर की बात का कोई जवाब नहीं दिया और डरकर अपनी जगह खड़ा रहा। शेर ने सोचा, "यह ब्राह्मण तो टस से मस हो ही नहीं रहा है। मैं इसे कैसे लालच दूं?"

शेर फिर से ब्राह्मण को झांसे में लाने की कोशिश करता है और कहता है, “सुनो। ये असली सोने का कड़ा है। अगर तुम्हे नहीं लेना है तो कोई बात नहीं। मैं इसे किसी और को दे दूंगा। मैं चलता हूँ।"

ब्राह्मण सोचता है, “अगर इस शेर को मुझे बेवक़ूफ़ बना कर खाना ही होता तो मुझ पर ये कब का हमला कर चुका होता। अब तक इसने हमला नहीं किया है। शायद ये सच बोल रहा है। मैं बेकार में ही इससे डर रहा हूँ।"

ऐसा सोचते हुए ब्राह्मण उस कड़े के लालच में शेर के पास चला जाता है। जैसे ही वह शेर के पास पहुँचता है, शेर ब्राह्मण को मार कर खा जाता है और लालच के कारण ब्राह्मण की मृत्यु हो जाती है।


सारांश - हमें सदैव अपने विवेक से काम लेना चाहिए और किसी भी प्रकार के लालच में नहीं आना चाहिए।


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Wednesday, 3 January 2018

पंचतंत्र की कहानी: दो सिर वाला पक्षी


किसी जंगल में बहुत सारे पशु-पक्षी रहते थे। उन्ही में एक बहुत ही विचित्र पक्षी भी रहता था। उस पक्षी के दो सिर थे लेकिन पेट एक ही था। सभी जानवर उसका मजाक उड़ाते थे और उसे खूब चिढाते थे। जानवरों के दुष व्यवहार से उस पक्षी का एक सिर बहुत दुखी रहता था। हालांकि दूसरा सिर अपने अनोखे शरीर को ईश्वर की कृपा समझकर खुश रहता था। अलग- अलग विचारों के कारण दोनों में अकसर झगड़ा हुआ करता था। एक सिर को अगर कुछ खाने को मिलता, तो वह अपने साथी सिर को नहीं देता। ऐसे ही जब दुसरे सिर को खाने को कुछ मिलता तो वह पहले सिर को कुछ नहीं देता। कभी-कभी तो वह सिर्फ एक दुसरे को चिढाने के लिए खाना खाते थे।



इस तरह, वह दोनों एक दुसरे से बहुत ही विपरीत व्यवहार करते थे। एक दिन, वह पक्षी नदी के किनारे टहल रहा था। तभी उसे एक फल दिखाई दिया। पहला सिर उस फल को खाने लगा। लेकिन उसने दुसरे सिर को वह फल खाने से यह कहकर मना कर दिया की फल स्वादिष्ट नहीं है। दुसरे सिर को बहुत बुरा लगा और उसने अपने साथी सिर से बदला लेने की ठानी।

कुछ दिनों के बाद वह पक्षी जंगल में किसी पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा था। पेड़ से एक फल उस पक्षी के पास गिर गया। वह फल देखने में बड़ा ही स्वादिस्ट लग रहा था लेकिन असलियत में वह बहुत जहरीला था। पहले सिर को इस बात का पता था कि फल जहरीला है। दूसरा सिर अपने साथी सिर से बदला लेने के लिए फल खा लेता है। पहला सिर, दुसरे सिर को चेताता है की फल खाने से उन दोनों की मौत हो सकती है। लेकिन दूसरा सिर बदला लेने की जिद के चलते फल खा लेता है। परिणाम स्वरुप, दोनों सिरों की, यानी उस पक्षी की मृत्यु हो जाती है।


सारांश:- रिश्तों के बीच अहंकार को आने नहीं देना चाहिए। 


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गरीब किसान

बहुत समय पहले की बात हैं किसी गाँव में एक अमीर साहूकार रहता था। उसे अपने पैसों पर बहुत घमंड था। एक दिन एक गरीब किसान उस साहूकार के पास मदद...