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Showing posts from January, 2018

पंचतंत्र की कहानी - गिद्द और बिल्ली

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बहुत पुरानी बात है। किसी जंगल में बड़े से बरगद के पेड़ पर अन्य प्रकार के पशु-पक्षी रहते थे। एक दिन, एक बूढ़ा गिद्ध उस पेड़ पर आश्रय लेने आया। वह गिद अँधा था। पेड़ के सभी पक्षियों ने गिद्ध की उम्र का लिहाज़ करते हुए उसे अपने साथ रहने के लिए जगह और खाना देने का फैसला किया। गिद्ध भी बदले में पक्षियों के बच्चों की रखवाली करने लगा। गिद्ध और पक्षी ख़ुशी-ख़ुशी साथ रहने लगे। 

फिर एक दिन, उस पेड़ के पास से एक बिल्ली जा रही थी। बिल्ली ने पेड़ से पक्षियों के चहकने की आवाज़ें सुनी। बिल्ली जैसे ही पेड़ पर चढ़ी, पक्षियों के बच्चे उसे देख कर डर गए। इससे पहले की बिल्ली बच्चों पर हमला कर पाती, गिद्ध ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, "कौन है वहां?"
बिल्ली गिद्ध की आवाज़ सुन कर डर गयी। उसको पता था की अगर उसे पक्षियों के बच्चों को अपना भोजन बनाना है तो पहले उसे गिद्ध से दोस्ती करनी पड़ेगी। बिल्ली ने गिद्ध से कहा "मैंने आपकी बुद्धिमानी और बड़प्पन के बारे में अपने साथी पक्षियों से बहुत कुछ सुना है। मैं आपसे मिलने आयी हूँ।" गिद्ध को अपनी तारीफ सुनकर बहुत अच्छा लगा। उसने बिल्ली से पूछा, "तुम कोन हो?" बि…

पंचतंत्र की कहानी - अहंकारी पेड़ और मधुमक्खियाँ

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बहुत पुरानी बात है, एक घना जंगल हुआ करता था। उसमें अनेक प्रकार के छोटे-बड़े जानवर रहते थे। जंगल में कई प्रकार के पेड़-पौधे थे जिनमें से एक पीपल और एक आम का पेड़ भी था। आम का पेड़ स्वभाव से अपने फल की तरह नरम था, जबकि पीपल का पेड़ स्वभाव से कठोर था।
एक दिन, रानी मधुमक्खी अपने साथियों के साथ जंगल में रहने आई। रानी मधुमक्खी ने देखा की पीपल का पेड़ बहुत बड़ा और घना है। वह उसी पेड़ पर छत्ता बनाने के बारे में सोचती है। इसके लिए वह पीपल के पेड़ से पूछती है, "पीपल महाराज, हम इस जंगल में नये हैं। कृप्या आप हमें आश्रय देकर हमारी सहायता करें।"


अपने स्वभाव के अनुरूप, पीपल का पेड़ रानी मधुमक्खी को छत्ता बनाने से मना कर देता है और उसे कहीं और छत्ता बनाने की सलाह देता है। रानी मधुमक्खी को यह सुनकर बहुत दुःख होता है। संयोग से, पास में खड़ा आम का पेड़ उन दोनों की बातचीत सुन रहा होता है। आम का पेड़, पीपल के पेड़ को समझाने की बहुत कोशिश करता है लेकिन पीपल का पेड़ टस से मस नहीं होता। अंत में, आम का पेड़ रानी मधुमक्खी को उसकी टहनियों पर छत्ता बनाने की अनुमति दे देता है। रानी मधुमक्खी आम के पेड़ पर अपना छत्ता बना ल…

पंचतंत्र की कहानी - गधे ने गाना गाया

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पुराने समय की बात है, किसी गाँव में एक धोबी रहता था। उसके पास कालू नाम का गधा था। धोबी बहुत गरीब था और गधे को पेट भर खाना नहीं दे पाता था। कम खाना खाने के कारण कालू दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था। कालू की दयनीय हालत देख कर धोबी ने सोचा, "मेरी इतनी हैसियत तो नहीं है कि मैं इसे अच्छा खाना दे पाऊं। क्यों ना मैं इसे रात में खुला छोड़ दूँ? यह अपने आप ही गाँव के खेतों में चर लिया करेगा और इसकी सेहत भी अच्छी हो जाएगी।"

धोबी ने कालू गधे को रात के समय खुला छोड़ना शुरू कर दिया। एक रात जब कालू खेत में चर रहा था तो उसकी मुलाकात पप्पू नाम के सियार से हुई। दोनों साथ मिलकर रोज रात को खेतों में चरने जाते थे। दोनों में अच्छी दोस्ती भी हो गई थी। कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा। दोनों दोस्त हर रोज रात को पेट भर कर खाना खाते और सुबह होने से पहले वापस आ जाते।
ऐसे ही, एक रात दोनों दोस्त खेत में चर रहे थे। चांदनी रात होने के कारण कालू गधे का गाना गाने का मन हुआ। गधे ने सियार से कहा, "भाई, मेरा गाना गाने का मन कर रहा है।" सियार बहुत समझदार था। उसने गधे से कहा, "भाई, खाना चाहे जितना मर्ज़ी…

पंचतंत्र की कहानी - लालची ब्राह्मण

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किसी जंगल में एक शेर रहता था। शेर की उम्र काफी बढ़ चुकी थी जिसकी वजह से उसे शिकार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। बढ़ती उम्र और शिकार ना मिलने के कारण वह दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था। एक दिन शेर को जंगल में चमकती हुई चीज मिली जिसे देखकर वह भौंचक्का रह गया।
शेर ने सोचा “अरे ये क्या है जो इतना चमक रहा है? मैंने पहले तो जंगल में ऐसी कोई चीज नहीं देखी?!" शेर उस चमकती हुई चीज को उठा लेता है और उसे अपने पास रख लेता है। वह सोचता है, "शायद यह आगे चलकर मेरे काम आ जाये। अगर वह कभी किसी इंसान को इसका लालच दूंगा तो वह मेरे पास ज़रूर आएगा। कम से कम मेरे भोजन का इंतजाम तो हो जाएगा।"

शेर सोने के कड़े को अपने मुंह में दबाए चल रहा था कि उसे एक आहट सुनाई देती है। वह उस आहट को बड़े ही ध्यान से सुनता है और फिर उसी दिशा में चला जाता है जहां से आवाज आ रही थी। शेर देखता है कि एक ब्राह्मण सामने से आ रहा है और फिर वह उस ब्राह्मण की ताक में झाड़ियों में छुप कर बैठ जाता है। जैसे ही ब्राह्मण शेर के सामने से गुज़रता है तो शेर उसे आवाज देता है |
ब्राह्मण रुक जाता है और अपनी नजरें चारों तरफ…

पंचतंत्र की कहानी: दो सिर वाला पक्षी

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किसी जंगल में बहुत सारे पशु-पक्षी रहते थे। उन्ही में एक बहुत ही विचित्र पक्षी भी रहता था। उस पक्षी के दो सिर थे लेकिन पेट एक ही था। सभी जानवर उसका मजाक उड़ाते थे और उसे खूब चिढाते थे। जानवरों के दुष व्यवहार से उस पक्षी का एक सिर बहुत दुखी रहता था। हालांकि दूसरा सिर अपने अनोखे शरीर को ईश्वर की कृपा समझकर खुश रहता था। अलग- अलग विचारों के कारण दोनों में अकसर झगड़ा हुआ करता था। एक सिर को अगर कुछ खाने को मिलता, तो वह अपने साथी सिर को नहीं देता। ऐसे ही जब दुसरे सिर को खाने को कुछ मिलता तो वह पहले सिर को कुछ नहीं देता। कभी-कभी तो वह सिर्फ एक दुसरे को चिढाने के लिए खाना खाते थे।



इस तरह, वह दोनों एक दुसरे से बहुत ही विपरीत व्यवहार करते थे। एक दिन, वह पक्षी नदी के किनारे टहल रहा था। तभी उसे एक फल दिखाई दिया। पहला सिर उस फल को खाने लगा। लेकिन उसने दुसरे सिर को वह फल खाने से यह कहकर मना कर दिया की फल स्वादिष्ट नहीं है। दुसरे सिर को बहुत बुरा लगा और उसने अपने साथी सिर से बदला लेने की ठानी।

कुछ दिनों के बाद वह पक्षी जंगल में किसी पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा था। पेड़ से एक फल उस पक्षी के पास गिर गया। वह फ…