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Showing posts from October, 2017

पंचतंत्र की कहानी - बोलने वाली गुफा

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किसी जंगल में एक शेर रहता था। वह शिकार की तलाश में भटक रहा था कि उसे एक गुफा नजर आई। उसने सोचा गुफा में कोई ना कोई जानवर जरुर होगा। यह सोचकर वह गुफा के अंदर चला गया लेकिन उसे कोई जानवर नजर नहीं आया। फिर वह गुफा के अंदर बैठकर जानवर के आने का इंतजार करने लगा। उस गुफा का मालिक एक सियार था जो शिकार की तलाश में गया हुआ था। जब सियार भी जंगल की खाक छानकर थक गया तो वह वापस अपनी गुफा की ओर चल पड़ा। गुफा की ओर जाते हुए सियार ने किसी जानवर के पैरों के निशान देखे जो गुफा के अंदर तक जा रहे थे। यह देखकर सियार ने सोचा किअभी गुफा के अंदर जाना ठीक नहीं होगा।
सियार बहुत चालाक और बुद्धिमान था। गुफा में कोई जानवर है या नहीं, यह जानने के लिए उसने एक तरकीब निकाली। सियार ने गुफा से बातें करना शुरू कर दिया। सियार ने जोर से आवाज लगाई - "ऐ मेरी गुफा, आज तू इतनी उदास क्यों है? लगता है तेरा मेरे बिना मन नहीं लग रहा था। आज तू बहुत चुप है, वरना तू मेरे आने पर कभी इतनी शांत नहीं रहती।"
सियार की बात सुनकर शेर सोचता है कि शायद यह गुफा कुछ बोलकर सियार का स्वागत करती होगी। आज उसके वहां होने से शायद वह डर गई है …

पंचतंत्र की कहानी - शत्रु का शत्रु मित्र

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बहुत समय की बात है, किसी गाँव में एक ब्राह्मण रहता था। उसके परिवार में कोई नहीं था। वह शिव भगवान् कि पूजा पाठ में पूरा दिन बिताया करता था।  एक दिन वो किसी परिवार के घर पूजा के लिए गया, तो उसे दक्षिणा में दो बैल मिले। ब्राह्मण सोचने लगा कि इन बैलो का भरण-पोषण कौन करेगा? उसके खुद का रहने और खाने का ठिकाना नहीं हैं, तो वह इन बैलो का क्या करेगा? इन्हें क्या खिलायेगा? लेकिन वह उन लोगो को बैल स्वीकारने से मना भी नहीं कर सकता था। अब तो उसे बैलों को घर ले जाना ही पड़ेगा। क्या पता भगवान् शिव ने उसे वह बैल अपनी सेवा के लिए दियें हों?! यह सोचकर ब्राह्मण बैलों को अपने घर ले जाता है।

फिर वह उन बैलो की देखभाल ऐसे करने लगा कि जैसे शिव भगवान् की पूजा करता हो| उनका भरन-पोषण ब्राह्मण दक्षिणा में मांग-मांग कर करने लगा। ब्राह्मण एक दिन सोचने लगा है कि जब से ये बैल मेरे जीवन में आए हैं तब से मुझे अकेलापन महसूस ही नहीं होता। इनके सहारे तो में सारी ज़िन्दगी काट लूँगा, लेकिन किसी दिन अगर ये बैल चले गए तो मेरा क्या होगा? इनके बिना मैं कैसे जिऊँगा? इनके बिना मेरा है ही कौन?

एक दिन उस गाँव में चोर आ जाता है और उसक…

पंचतंत्र की कहानी - लालच बुरी बला है

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किसी गाँव में एक किसान रहता था। गाँव में सभी की फसलें अच्छी होती थीं, लेकिन उसकी फसल इतनी अच्छी नहीं होती थी। फसल अच्छी न होने के कारण वह बहुत परेशान रहता था, क्योंकि उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह खेती के लिए उन्नत बीज और बढ़िया औजार खरीद सकें। 
एक दिन किसान अपनें खेत में ही सो जाता है। अगले दिन सुबह जब वह उठता है तो उसे अपनें खेत के पास एक साँप नजर आता है। यह देखकर किसान मन ही मन सोचता है कि हो-न-हो यही मेरे खेत के देवता हैं। मैंने इनकी पूजा नहीं की है, इसीलिए मेरी फसल अच्छी नहीं हो रही है। 
यह विचार मन में आते ही वह घर जाकर एक कटोरी दूध ले आता है और साँप के सामने रख कर घर चला जाता है। अगले दिन जब वह खेत में वापस आता है तो उसे कटोरी में दूध कि जगह एक स्वर्ण मुद्रा मिलती है।  इस तरह किसान हर रोज साँप के लिए दूध लाने लगा और साँप भी उसे प्रतिदिन एक स्वर्ण मुद्रा देने लगा। 
एक दिन किसान का बेटा, उसको ऐसा करते हुए देख लेता है। तब किसान का बेटा उससे पूछता है कि , पापा आप साँप को दूध क्यों पिला रहें हैं। किसान अपने बेटे से कहता है कि, यह साँप ही अपने खेत के देंवता है और यह दूध पिलाने से काटत…