30 July 2018

पंचतंत्र की कहानी - चींटी और घमंडी हाथी

बहुत पुरानी बात है, किसी जंगल में एक हाथी रहता था| वह काफी मस्त मिजाज का था लेकिन साथ ही साथ उसे अपनी ताकत का भी घमंड था| वो किसी को भी अपने आगे कुछ नहीं समझता था| एक दिन की बात है हाथी जंगल से गुजर रहा था कि तभी उसे एक कौआ नजर आता है| वो कौआ काँव काँव किये जा रहा था , जो हाथी को पसंद नहीं आ रहा था |इस पर हाथी कौआ को बहुत बुरा-भला कहता है और उसकी आवाज को बेसुरी कहकर बेइजत्ती करता है | कौआ उस हाथी की बात को अनसुना कर देता है और काँव-काँव करता रहता है लेकिन हाथी अपने घमंड में किसी की भी नहीं सुनता और ना ही किसी की बात समझ में आती| वो उस कौआ से इतना परेशान हो जाता है कि उसको मारने के लिए उस पेड़ को ही अपनी सूंड से पकड़कर गिरा देता है| पेड़ को गिराने के बाद भी उसके घमंड में कोई कमी नहीं आती है और वो अपनी इस हरकत पर पश्चाताप करने की बजाए और बिना उस कौवे को देखे आगे बढ़ जाता है|


आगे चलने पर उसे जंगल में एक छोटी सी चींटी नजर आती है| हाथी उसका भी मजाक उड़ाता है और कहता है की वह इतनी छोटी सी है कि उसे कोई भी कुचल सकता है | उसे तो हर जगह ही बचकर चलना चाहिए नहीं तो अगर किसी के पैर के नीचे आ गई तो उसकी खैर नहीं|

यह  कहकर हाथी जोर-जोर से उस पर हंसने लगता है | हाथी के इस बर्ताव से चींटी को जरा सा भी गुस्सा नहीं आता बल्कि वो उसकी बात का जवाब बड़े ही शांत अंदाज़ में मुस्कुराकर देती है और कहती है की, माना कि वह कद काठी में उससे बड़े है लेकिन उसको ये नहीं भूलना चाहिए कि हर प्राणी को भगवान कोई न कोई ताकत जरूर दी है| ऐसी ही ताकत मुझे भी भगवान ने दी है| इसलिए आप मुझे न बताए कि मेरा कद सही हैं या नहीं| चींटी का ऐसा जवाब सुनकर हाथी को बहुत ज्यादा हंसी आती है और वह उसका और ज्यादा मजाक उड़ाने लगता है |

इस पर चींटी हाथी से कहती है की वह उसकी इतनी परवाह न करे अगर उसे कुचला जाना होता तो वह अब तक कुचली जा चुकी होती| उसे भगवान पर पूरा भरोसा है, वह जो भी करता है सही करता है और सबकी ही इसमें भलाई होती है| उन्होने मुझे बनाया है तो कुछ सोच-समझ कर ही बनाया होगा|जब हाथी और चींटी दोनों बात कर रहे होते हैं तभी अचानक से बारिश शुरू हो जाती है और चींटी भागकर एक गुफा में चली जाती है| हाथी अपने घमंड के कारण उस गुफा में नहीं जाता| यह देख चींटी हाथी को अंदर आने के लिए मानती है और कहती है की वह भी अंदर आ जाए वरना उसकी तबीयत खराब हो सकती है |

इस पर हाथी गुफा के अंदर जाने के लिए  मान जाता है | लेकिन वो शरीर में इतना बड़ा होता है कि उसका शरीर उस गुफा में नहीं आ पाता है| फिर भी किसी तरह से वो गुफा के अन्दर घुस जाता है| गुफा के अन्दर जाने पर भी उसका घमंड कम नहीं होता और वो चींटी को फिर से अपने शरीर के बारे में बढ़-चढ़ कर बोलता है| चींटी बेचारी चुपचाप सब सुनती रहती है| हाथी कहता है उसके सामने ये गुफा क्या वह इससे भी बड़ी-बड़ी गुफाओं को जरा सी देर में अपने पैरो से गिरा दे, सब चकना चूर कर दे|

ऐसा कहते ही हाथी उस गुफा पर जोर-जोर से अपने पैर पटकता है और फिर उसके ऐसा करने से गुफा के दरवाजे पर एक बड़ा सा पत्थर आकर लग जाता है जिससे गुफा का दरवाजा बंद हो जाता है| हाथी जब ये देखता है तो परेशान हो जाता है वो चींटी से कहता है अरे ये क्या हुआ इसका दरवाजा तो बंद हो गया| अब वह यहाँ से कैसे निकलेगा और उसका यहाँ थोड़ी देर में ही उसका दम घूंट जाएगा|

चींटी, हाथी की बात सुनकर तुरंत वहां से भाग जाती है| फिर थोड़ी देर में वो जंगल में जाकर दुसरे हाथियों से संपर्क करती है| हाथी आकर उस गुफा के मुंह से पत्थर हटा देते हैं जिससे कि गुफा का मार्ग खुल जाता है| इसके साथ ही उसको ये अक्ल आ जाती है कि शरीर पर घमंड करने से अच्छा है कि दूसरो की मदद की जाए| जैसा कि उसके साथी हाथियों ने किया| उसे अपनी गलती का एहसास होता है और वो सभी हाथियों से और खास तौर पर उस नन्ही चींटी से माफ़ी मांगता है|

सारांश: हमें कभी भी अपने शरीर पर या फिर अपने रूप और दौलत पर घमंड नहीं करना चाहिए| हमें हमेशा दूसरो की सहयाता करनी चाहिए|     

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पंचतंत्र की कहानी - जादुई गाय


बहुत समय पहले एक छोटे से गांव में, लल्लन और हरी नाम के दो किसान रहते थे। लल्लन और हरि बहुत समृद्ध किसान थे। उनके पास एक बड़ा खेत और कई गाय थीं। लेकिन वे इससे खुश नहीं थे। वह और अमीर होना चाहते थे। उनके पड़ोस में गोपाल नाम का एक और किसान रहता था। गोपाल एक गरीब किसान था। उसके पास केवल एक गाय और एक छोटा सा खेत था। लेकिन, वह खुश था। सोने से पहले हर रात वह भगवान को धन्यवाद देता था| उसकी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था |


लेकिन यह सब देखकर हरी और लल्लन बहुत जलते थे | वह आपस में यही बात करते रहते थे वह हमेशा ख़ुश कैसे रहता है | जबकि उसके पास तो एक खेत और एक ही गाय है| वे दोनों सोचते हैं की यदि वे उसकी गाय खरीद लें तो उसके पास खुश रहने के लिए कुछ नहीं बचेगा | यह सोचकर एक दिन लल्लन और हरि गाय खरीदने के लिए गोपाल के घर गए| और कहा की वे  उसे उसकी गाय के बदले 20 चाँदी के सिक्के दे सकते हैं |लेकिन गोपाल अपनी प्रिय गाय को नहीं बेचना चाहता था | इसलिए उसने स्पष्ट रूप से मना कर दिया और उनको, उसके घर से चले जाने को कहा | यह सुनकर हरी और लल्लन ने खुद को बहुत अपमानित महसूस किया| और गोपाल से बदला लेने की ठानी | उन्हे पता था की गोपाल को उसकी गाय पर बहुत गर्व है | इसलिए उन्होने सोचा की क्यों ना वे उसे उसकी गाय को बेचने पर मजबूर कर दें | यह सोचकर उन्होने योजना बनाई की यदि वे उसकी फसल को बर्बाद कर दें तो उसके पास गाय को खिलाने के लिए कुछ नहीं बचेगा | और आखिरकार उसे उसकी गाय को बेचना पड़ेगा |
योजना के अनुसार, उन्होंने रात में गोपाल की फसल जला दी। सुबह जब गोपाल ने जली हुई फसल देखी तो वह बहुत दुखी हो गया और उसकी आखों में आंसू आ गए| गोपाल टूट गया था। एक सप्ताह के बाद भी, वह कोई समाधान नहीं निकाल पाया और गाय भी भूखी थी ! उसे खिलाने के लिए भी गोपाल के पास कुछ नहीं था ! वह सोचने लगा अगर वह गाय को नहीं खिला पाया तो वह भूख से मर जाएगी।इसलिए, उसे बेचना ही बेहतर है।

यह सोचकर अगली सुबह, वह गाय और उसके पास जितने भी चांदी के सिक्के थे सब साथ लेकर बाजार के लिए चल दिया। बाजार जाते हुए वह सोचने लगा अगर रास्ते में लुटेरों ने उस पर हमला किया तो क्या होगा? वह अपनी सारी चीज़ें खो देगा। यह सोचकर, उसने गाय के गले की थैली में उसके 10 चांदी के सिक्कों को छुपा दिया। थोड़ी देर यात्रा करने के बाद, वह थक गया और उसने एक सराय में आराम करने का फैसला किया।उसने सराय के बाहर गाय को बांध दिया और अंदर चला गया। तभी अचानक, एक चांदी का सिक्का गाय के गले की थैली से निकलकर बाहर गिर जाता है। सराय के मालिक ने यह देखा तो वहआश्चर्यचकित रह गया| उसने सोचा की जरूर यह एक जादुई गाय है | तभी इसके गले से चाँदी के सिक्के निकल रहे हैं | यह सब देखकर उसे लालच आ गया | और उसने गोपाल को कहा की वह उसे उसकी गाय के बदले चाँदी के सिक्कों से भरा थैला दे सकता है |गोपाल को पता था कि यह वास्तविक की मत नहीं है। लेकिन इसे भगवान की इच्छा के रूप में लेते हुए, गोपाल ने कहा की  ठीक है, आप इसे चांदी के सिक्कों के बैग के बदले में ले सकते हैं। गोपाल ने चांदी के सिक्कों के बैग के लिए गाय को सराय के मालिक को दे दिया और अपने घर के लिए खुशी-ख़ुशी निकल पड़ा|

घर पहुंचकर वह पैसे गिनने बैठा ही था की तभी कुछ देर बाद, लल्लन और हरी , गोपाल के घर आये | गोपाल उस समय चांदी के सिक्के गिन रहा था|  यह देखकर दोनों आश्चर्यचकित हो गए। उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ और गोपाल से कहा की उसके पास इतने पैसे कहाँ से आ गए | इस पर गोपाल ने कहा  की भगवान ने उसे उसकी गाय के माध्यम से दिए। उसने अपनी गाय को बेच दिया|  ये उसी का दाम है|  और कहा की अब वह  बहुत सारी गाय खरीद सकता है और उन्हें खिला भी सकता है।यह सुनकर, हरिऔर लल्लन दंग रह गए| उन्हें विश्वास नहीं हुआ की उनकी योजना असफल हो गयी है।

शिक्षा: कभी भी किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाकर कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इसलिए, हमें केवल खुद को बेहतर बनाना चाहिए|


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25 July 2018

पंचतंत्र की कहानी - पूँछ वाला भूत

बहुत समय की बात है, किसी जंगल में एक टिनटिन नाम का शेर रहता था| टिनटिन उस जंगल का राजा था | टिनटिन की गुफा के बाहर एक बहुत बड़ा पेड़ था| रात को तेज हवा उस पेड़ से टकराकर बहुत खतरनाक आवाजें किया करती थी | इन आवाजों से टिनटिन बहुत परेशान रहता था। कभी-कभी तो इस वजह से वो सारी-सारी रात सो भी नहीं पाता था।

टिनटिन रोज-रोज की आवाजों से बहुत तंग आ चूका था | उसने सोचा की क्यों न इस पेड़ को कटवाकर ये रोज-रोज का किस्सा ही खत्म कर दे | ऐसा सोचकर उसने डमडम हाथी को बुलाया और उसे सारी बात बताई । पूरी बात सुनकर डमडम हाथी ने कहा की वह अभी एक टक्कर से इस पेड़ को गिरा देगा | ऐसा कहकर डमडम हाथी बहुत दूर से दौड़ता हुआ आया और पेड़ से टकरा गया । डमडम की टक्कर से पेड़ उखड़कर ज़मीन पर गिर गया। पेड़ को उखड़ते देख टिनटिन शेर ने चैन की सांस ली।


टिनटिन शेर ने डमडम हाथी का धन्यवाद किया ही था की, तभी अचानक पेड़ खड़ा होकर वापिस अपनी जगह पर गड़ गया । ये देख टिनटिन और डमडम बहुत हैरान हुए । टिनटिन, डमडम से कुछ कहता इससे पहले ही डमडम बोल पड़ा की वह चिंता ना करे | वह दुबारा इस पेड़ को गिरा देगा | ऐसा कहकर डमडम हाथी ने टक्कर मारकर फिर से पेड़ को गिरा दिया । लेकिन एक बार फिर पेड़ खड़ा होकर उसी जगह गड़ गया और ज़ोर-ज़ोर से अपनी शाखाएँ हिलाकर डरावनी आवाज़ें करने लगा । ये देखकर टिनटिन और डमडम बहुत घबरा गए । डरावनी आवाज़ें सुनकर बाकी जानवर भी वहाँ जमा हो गए । किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था की ये क्या हो रहा है।

तभी अचानक पेड़ ने हिलना बंद कर दिया और डरावनी आवाज़े आनी भी बंद हो गई। फिर डमरू कंगारू का भूत पेड़ में से निकलकर सामने आया। डमरू कंगारु की पुंछ बहुत लंबी थी। उसे अपनी पुंछ पर बहुत घमंड था। अपनी पूंछ पर बैठकर कहने लगा की वे लोग इस पेड़ क्यों तोड़ रहे हैं | ये सब तो वह कर रहा था। उनमें हिम्मत है तो उसे भगा कर दिखाए।

यह सब सुन टिनटिन ने डमरू से पूछा की वह कोन है| तब डमरू ने टिनटिन को बताया की कैसे उसके पिता ने उसकी मौत का आदेश दिया था| और कैसे मरने के बाद भूत बनकर इधर -उधर भटक रहा है| लेकिन जैसे ही उसे पता चला की टिनटिन उसी राजा का बेटा है जिसने उसकी मौत का आदेश दिया था| तब से वह इस उसे डराकर उसके पिताजी का बदला ले रहा है। अंत में डमरू ने कहा की अब वह उसे डराकर थक चूका है | इसलिए अब वह उसे खाकर अपनी मौत का बदला लेगा |

यह सब सुन टिनटिन घबराते हुए बोला की यदि वह उसे खा जायेगा तो इस जंगल को कौन संभालेगा | इस पर टिनटिन ने कहा की उसे उससे क्या मतलब | वह तो भूत है, कोई संत महात्मा नहीं जो उसके जंगल के बारे में सोचे | इस पर टिनटिन ने घबराकर कहा की इस सज़ा से बचने का कोई तरीका तो होगा? यह सुनकर डमरू भूत खड़ा होकर सोचने लगा। और, फिर कुछ देर सोचकर बोला उसके पिताजी को उसकी पुंछ पसंद नहीं थी, इसी से जलकर उन्होने उसे मृत्युदंड दिया था। अगर वह, या उसके जंगल में से किसी की भी पुंछ उसकी पूंछ से ज़्यादा लंबी और ज़्यादा काम वाली हो तभी वह उसे ज़िंदा छोड़ेगा।

टिनटिन ने डमरू की शर्त मान ली। डमडम ने सबसे पहले अपनी सूंड से डमरू की पुंछ नापी। उसकी पुंछ डमडम की सूंड से डेढ़ गुना लंबी थी। इसके बाद डमडम एक-एक करके जंगल में रहने वाले सभी जानवरों की पुंछ नापने लगा। हाथी ने सभी की पुंछ नापी लेकिन किसी की भी पुंछ भूत की पुंछ जितनी लंबी नहीं थी।सभी जानवर ये देखकर बहुत दुखी हुए। जबकि डमरू भूत बहुत खुश था।

अंत में जब सबको यकीन हो गया की किसी की भी पूंछ डमरू की पुंछ से लम्बी नहीं है | तो डमरू ने टिनटिन शेर से कहा की वह उसका खाना बनने के लिए तैयार हो जाये | टिनटिन ने भी हार मान ली थी | वह जानता था की अब उसके पास हार मानने के इलावा कोई चारा नहीं है। इसलिए उसने निराश होकर कहा की वह उसका भोजन बनने को तैयार है | टिनटिन शेर के ऐसा कहते ही डमरू भूत टिनटिन की तरफ बढ़ने लगा।

तभी अचानक चंटू साँप वहाँ रेंगता हुआ आया और चिल्लाकर बोला की नहीं महाराज! अभी मेरी उसकी नापनी बाकी है! ये सुनते ही भूत रुक गया और सभी हैरान होकर चंटू साँप को देखने लगे।चंटू साँप ने कहा की इस भूत की पुंछ कितनी भी लंबी हो, लेकिन वह उससे नहीं जीत सकता। क्योंकि वह तो ऊपर से नीचे तक पुंछ ही पुंछ हूँ। ये सुनकर सभी जानवर बहुत खुश हुए। पर डमरू की सिटी-बीटी गुल हो चुकी थी।

ये सुनकर डमरू भूत ने कहा की पूंछ लंबी है तो क्या हुआ? क्या वह अपनी पुंछ पर बैठ सकता हैइस पर चन्टू सांप ने कहा की बैठ क्या, वह तो अपनी पुंछ पर लेट भी सकता है, चल भी सकता है और नाच भी सकता है । क्या वह अपनी पुंछ पर ये सब कर सकता हैयह सुनकर डमरू बहुत निराश हुआ। उसे अपनी पुंछ पर बहुत घमंड था, लेकिन अब उसकी पुंछ हार चुकी थी। उसने अपनी हार मान ली और टिनटिन शेर से माफ़ी माँगकर कहा की वह हार गया। अब वह उसको नहीं खायेगा । ऐसा कहकर डमरू भूत उड़कर वहाँ से चला गया। उसके जाते ही सभी ने चैन की सांस ली।

इसके बाद टिनटिन शेर इसकी जान बचाने के लिए ने चंटू साँप का धन्यवाद करता है । चंटू साँप ने टिनटिन शेर से कहा की महाराज, उस भूत को अपनी पुंछ पर बहुत घमंड था। उसे इसका सबक तो मिलना ही था। वैसे भी घमंड अगर सिर चढ़ जाये तो सिर झुका ही देता है। 

शिक्षा: हमें अपनी अच्छाइयों पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि हम से बेहतर भी कोई हो सकता है।


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22 July 2018

पंचतंत्र की कहानी - ईमानदारी का इनाम


बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में एक बाबू लाल नाम का पेंटर रहता था| वह बहुत ईमानदार था किन्तु बहुत गरीब होने के कारन वह घर-घर जाकर पेंट का काम किया करता था | उसकी आमदनी बहुत कम थी | बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था | पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी वह सिर्फ दो वक़्त की रोटी ही जुटा पाता था | वह हमेशा चाहता था की उसे कोई बड़ा काम मिले जिससे उसकी आमदनी अच्छी हो पर वह छोटे-मोटे काम भी बड़ी लगन और ईमानदारी से करता था |

एक दिन उसे गाँव के जमींदार ने बुलाया और कहा की उसको, उसने बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है, क्या वह उसका काम करेगा? बाबू लाल ने हाँ में सिर हिलाते हुए जमींदार से कहा की बताइये जमींदार साहब क्या काम करना है? जमींदार ने बाबू लाल को अपनी नाव को रंगने के लिए कहा और ये भी कहा की यह आज ही हो जाना चाहिए | बाबू लाल को पता था की वह यह काम एक दिन में कर सकता है, इसलिए उसने इस काम को करने के लिए हाँ कह दी |
यह काम पाकर बाबू लाल बहुत ही खुश था | इसके बाद जमींदार और बाबू लाल ने नाव को रंगने की कीमत तय कर दी जो की 1500 रूपए थी | फिर जमींदार उसे अपनी नाँव दिखाने नदी किनारे ले जाता है | बाबू लाल,जमींदार से थोड़ा समय मांगता है और अपना रंग का सामान लेने चला जाता है | सामान लेकर जैसे ही बाबू लाल आता है तो वह बिना देरी किये नाँव को रंगना शुरू कर देता है | जब बाबू लाल नाँव रंग रहा था तो उसने देखा की नाव में छेद है | नाव के छेद को ठीक करने काम उसका नहीं था | लेकिन उसको पता था की यदि उसने यह छेद ठीक नहीं किया तो जमींदार या उसके परिवार के साथ कुछ अनहोनी हो सकती है |
इसलिए बाबू लाल पहले तो छेद को ठीक करता है और उसके बाद नाव को रंगना शुरू करता है | नाव को रंगने के बाद बाबू लाल, जमींदार को यह बताने चला जाता है की काम पूरा हो गया है | जमींदार नाव को देखकर बहुत खुश होता है और बाबू लाल को कहा की वह अगली सुबह आकर अपना मेहनताना ले जाये | लेकिन अब तक जमींदार को यह नहीं पता था की बाबू लाल ने नाव का छेद भी ठीक किया था और न ही बाबू लाल ने उससे इस बारे में कोई जिक्र किया |
इसके बाद जमींदार के परिवार वाले उसी नाव में सवार हो कर घूमने चले जाते हैं | शाम को जमींदार का नौकर रामू , जो उसकी नाँव की देख-रेख भी करता था, छुट्टी से वापिस आता है | परिवार को घर पर ना देखकर वह जमींदार से परिवार वालो के बारे में पूछता है | जमींदार उसे सारी बात बताता है | जमींदार की बात सुनकर रामू चिंता में पड़ जाता है | यह देखकर जमींदार उससे चिंतित होने का कारण पूछता है ?
जमींदार के पूछने पर रामू उसे बताता है की नाँव में छेद था | रामू की बात सुनकर जमींदार चिंतित हो जाता है | लेकिन तभी उसके परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती करके वापिस आते हुए दिखाई देते हैं | उन्हें सकुशल देख कर जमींदार चैन की साँस लेता है | इसके बाद जमींदार को पूरी बात समझ आ जाती है की यह छेद जरूर बाबू लाल ने ही ठीक किया होगा जिसके कारण आज मेरे परिवार की जान बच गई |
फिर अगले दिन जमींदार बाबू लाल को बुलवाता है और कहता है उसने बहुत बढ़िया काम किया है | जिससे वह बहुत खुश है | इसके बाद जमींदार उसे मेहनताने के रूप में 6000 रूपए दे देता है | बाबू लाल इतने ज्यादा रुपये देखकर जमींदार से कहता है की बात तो सिर्फ 1500 रूपए की हुई थी तो वह इससे ज्यादा नहीं रूपए नहीं ले सकता |
तब जमींदार उसे बताता है की कैसे उसने नाव का छेद भरकर उसके परिवार की जान बचाई | यदि वह नाव का छेद न भरता तो शायद आज उसके परिवार के सदस्य जिन्दा न होते | उसकी वजह से ही आज वो सब सुरक्षित हैं | इतना कहकर जमींदार, बाबूलाल से वो पैसे ले लेने का निवेदन करता है | इसके बाद बाबू लाल भी वो पैसे लेने से मना नहीं कर सका | जमींदार को धन्यवाद बोलकर बाबू लाल पैसे लेकर खुशी-ख़ुशी अपने घर चला जाता है |

शिक्षा- इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे अपना काम हमेशा पूरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए |


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20 July 2018

पंचतंत्र की कहानी - भूत और हाथी

किसी जंगल में एक पेड़ पर चंदु नाम का उल्लू रहता था। चंदु बहुत अच्छे दिल का था और हमेशा सबकी मदद करता था।
एक दिन, जब वह शाम को सो कर उठा तो उसने देखा कि एक हाथी उसके पेड़ के नीचे आराम कर रहा है। वह देख उसने हाथी से पूछा की वह कौन है और उसने हाथी को जंगल में पहली बार देखा है|

चंदू की बात पर हाथी ने कहा की उसका नाम मलंग है और वह जंगल में किसी के कहने पर अच्छे फल खाने आया है। चंदू ने हाथी को जवाब दिया कि उसने ठीक सुना है और जंगल में काफी स्वादिष्ट फल हैं। फिर वह मलंग हाथी का जंगल में स्वागत करता है। 

दोनों की दोस्ती हो जाती है और  हाथी चंदू के पेड़ के नीचे ही रहने लगता है। जहाँ चंदु दिनभर सोता, वहीँ मलंग हाथी रात होने पर पेट-पूजा करके वापस आता था और वह जमकर बातें करते थे।



मलंग हाथी उसे बताया करता था की कैसे वह मीठे गन्ने खाने के बाद नदी में नहाता था। मलंग हाथी के किस्से सुनकर चंदु उल्लू का भी उसके साथ जाने का बहुत मन किया करता लेकिन उल्लू होने के कारण वह दिन में घर से बाहर नहीं निकल सकता था।

फिर एक रात, जब मलंग हाथी खाना खाकर लौट रहा था, तब उसने एक भूत और भूतनी को बातें करते देखा। उसने भूत को यह कहते हुए सुना कि इन्सान  बहुत हिम्मतवाले हो गए हैं और अब वह भूतों से बिल्कुल नहीं डरते। भूत की बात सुनकर भूतनी ने कहा है कि इन्सानो को डराने के लिए उन्हें कोई नयी तरकीब सोचनी होगी।

तभी भूत, हाथी को देख लेता है| हाथी को देखकर भूत चौंक जाता है और चींखकर कहता है की पकड़ो उसे, ये वही हाथी है! ये सुनते ही हाथी डर जाता है  और वहाँ से भाग जाता है। उसे भागते देख भूतनी ने भूत से पूछा की क्या हुआ? कौन है वो हाथी?

तब भूत, भूतनी को अपने सपने के बारे में बताता है जो उसने एक दिन पहले देखा था |  वह बताता है की उसने सपने में एक हाथी को पूरा खा लिया था।  और ये हाथी एकदम उसके  सपने वाले हाथी के जैसा ही दिखता है। इसलिए आज वह  इस हाथी को खाकर अपना सपना सच करके रहेगा ।

ऐसा कहकर भूत उड़कर हाथी का पीछा करने लगा। भूतनी भी उड़ती हुई हाथी के पीछे चल दी। हाथी चिल्लाता हुआ भाग रहा था की कोई भूत-भूतनी से उसकी  जान बचाये। तभी भूत और भूतनी उड़कर उसके सामने आ जाते हैं । हाथी ने उन्हे देखकर रुक जाता है और डरकर कहता है की कृप्या करके वह उसे  छोड़ दे । उसने  सुना है इंसान बहुत स्वादिष्ट है। वह  उन्हे खा सकते हैं।

हाथी की बात सुन भूत कहता है की उसे सपना उसको खाने का आया है, इसलिए वह उसे ही खायेगा।

दूर  पेड़ पर बैठा चंदु उल्लू ये सब देख और सुन रहा था। अचानक उसे एक तरकीब सूझी। वो उड़ता हुआ हाथी के पास आया और भूतनी को देखकर जोर से चिल्लाने लगा...यही है वो!, यही है वो!, पकड़ो इसे! चंदु को ऐसे बेवजह चीखता देख भूत और भूतनी सोच में पड़ गए। चंदू को इस तरह चिलाते देखकर भूत चंदू से पूछता है की वह कोन है और वह किसकी बात कर रहा है |

तब चंदू, भूत को बताता है की वह उसकी पत्नी की बात कर रहा है। वह बताता है की उसने कल सुबह अपने सपने में देखा कि उसकी एक भूतनी से शादी हो गई है। और तुम्हारी पत्नी एकदम उस भूतनी जैसी दिखती है। इसलिए इस भूतनी से शादी करके वह  अपना सपना सच करेगा ।

 यह सब सुनकर भूतनी डर जाती है  और चिल्लाकर कहती है की वह किसी उल्लू से शादी नहीं करेगी | भूत, भूतनी को समझाते हुए कहता है की वह  घबराए नहीं । वह तो उल्लू है तो उल्लू जैसी ही बात करेगा |  और सपने भी कभी सच होते हैं क्या?

इस पर चंदू कहता है की वह भी तो अपना सपना सच करने के लिए इस हाथी को खाने को कह रहे हैं। तो क्या तुम भी उल्लू हो? चंदू की बात सुनकर भूत शर्मिंदा हो जाता है और उससे हाथी को नहीं खाने की बात कहता है | और उसका सपना सच नहीं होने की बात कहते हुए कहता है की वह भी अपने सपने को भूल जाये | भूत की बात से सहमति जताते हुए चंदू भी एक दूसरे के सपने को भूलने के लिए कहता है | चंदु के ऐसा कहते ही भूत और भूतनी उड़कर वहाँ से चले जाते हैं । 

भूत-भूतनी के जाने के बाद मलंग हाथी उसकी जान बचाने के लिए चंदू का धन्यवाद करता है | और भूतनी से शादी करने का उसका पूरा नहीं हो पाने पर दुःख भी जताता है |  हाथी की बात सुनकर चंदू हँसते हुए कहता है की कौनसा सपना? वह सब तो उसने भूत को सबक सीखने के लिए बोला था |

इस पर दोनों दोस्त ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। इतने ताकतवर भूतों को अपनी समझदारी से हराकर आज दोनों बहुत खुश थे।

शिक्षा:  यह ज़रूरी नहीं कि एक कमजोर और ताकतवर में से हमेशा ताकतवर ही जीते। अगर कमजोर चाहे तो अपनी अक्ल से बड़े से बड़े ताकतवर को हरा सकता है।


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11 July 2018

बिच्छू के रूप में भगवान

बहुत समय पहले एक बुजुर्ग दरिया के किनारे से जा रहा थे। तभी उन्होने देखा कि दरिया के अंदर से एक कछुआ आया और दरिया के किनारे पर आकर रुक गया। थोड़ी देर बाद उसी किनारे पर एक जहरीला बिच्छू भी आया और दोनों आपस में बात करने लगे। कछुए ने बिच्छू से पूछा, “दोस्त, क्या अब हम दरिया के उस पार चले?” इसपर बिच्छू ने खुशी से जवाब दिया, “हाँ दोस्त, चलो नदी के उस पार चलते हैं।“ ऐसा कहकर बिच्छू कछुए की पीठ पर चढ़ गया। और कछुए ने दरिया में तैरना शुरू कर दिया।


वो बुजुर्ग ये सब देख और सुन रहे थे। एक बिच्छू को कछुए की पीठ पर बैठा देख वो बहुत हैरान हुए और मन ही मन सोचने लगे, “ये बिच्छू कछुए की पीठ पर बैठकर कहाँ जा रहा है? मुझे भी इनके पीछे जाना चाहिए” ऐसा सोचकर वो दरिया में उतर गए और उनका पीछा करने लगे। नदी के दुसरे किनारे पहुँचकर कछुआ रुक गया और बिच्छू उसकी पीठ पर से छलांग लगाकर किनारे पर चढ़ गया।

“दोस्त तुम यहीं रुको मैं अभी आता हूँ!” ये कहकर बिच्छू जंगल की तरफ चल दिया। बुजुर्ग भी दरिया से बाहर आए और बिच्छू के पीछे चलने लगे।

आगे जाकर उन्होने देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था उसी तरफ एक नौजवान व्यक्ति आँखें बंद करके भगवान के ध्यान में लगा हुआ था। ये देखकर वो बुजुर्ग सोचने लगे, “अगर यह बिच्छू उस नौजवान को काटना चाहेगा तो मैं करीब पहुंचने से पहले ही इसे अपनी लाठी से मार दूंगा।“

ऐसा सोचकर वो बहुत तेज़ी से बिच्छू के पीछे चलने लगे। तभी उन्होने देखा कि दूसरी तरफ से एक जहरीला साँप बहुत तेज़ी से उस नौजवान की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन इससे पहले वो जहरीला साँप उस नौजवान को काटता, बिच्छू ने उस साँप को डंक मार दिया। बिच्छू के जहर से साँप कुछ ही क्षणों में मर गया। इसके बाद बिच्छू मुडा और वापिस दरिया के किनारे चला गया। बुजुर्ग व्यक्ति ये सब देखकर बहुत हैरान हुए। वो जिस बिच्छू के बारे में इतना गलत सोच रहे थे उस बिच्छू ने भगवान की भक्ति में लगे एक नौजवान की जान बचाई थी। वो सोचने लगे, “अरे आजकल तो इंसान भी एक दूसरे के काम नहीं आते और यहाँ तो एक बिच्छू ने मिसाल कायम की है! ये देखकर दिल खुश हो गया कि जानवरो में भी ऐसी भावना है!”

कुछ देर बाद जब वो नौजवान ध्यान पर से उठा तो उस बुजुर्ग व्यक्ति ने उसे सारी बात बताई।

नौजवान बहुत हैरान हुआ और भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहने लगा, “भगवान् आपका लाख लाख शुक्र है! आज आपने मेरी जान बचा ली! मैं आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ!”
तभी अचानक उसके सामने भगवान् प्रकट हुए और उस नौजवान से बोले, “जब वो बुजुर्ग जो तुम्हे जानता तक नही था वो तेरी जान बचाने के लिए लाठी उठा सकता है । फिर तू तो मेरी भक्ति में  लगा हुआ था। मैं तेरा ध्यान कैसे नहीं रखता!”

ये कहकर भगवान अदृश्य हो गए, और वो बुजुर्ग समझ गया कि उस बिच्छू के रूप में आकर भगवान ने ही इस नौजवान की जान बचाई है।

शिक्षा: अगर हम सच्चे दिल से भगवान की पुजा करते हैं तो भगवान हमारी सहायता ज़रूर करते हैं।

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