Wednesday, 21 February 2018

पंचतंत्र की कहानी - खरगोश और हाथी

किसी जंगल में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वह विशालकाय, लम्बी सूंड और लम्बे- मोटे दांतों वाला था। खंभे के जैसे उसके मोटे-मोटे पैर थे। जब कभी भी वह चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।

गजराज अपने झुंड के सभी हाथियों से बहुत प्यार करता था। वह खुद मुसीबत मोल ले लेता था लेकिन झुंड के किसी भी हाथी को कष्ट में नहीं पड़ने देता था। गजराज के लिए सभी हाथियों के मन में बहुत सम्मान था।


उसी जंगल में खरगोशों की एक बस्ती थी। उस बस्ती में बहुत सारे खरगोश रहते थे। सभी हाथी, खरगोशों की बस्ती से होकर झील में पानी पीने के लिए जाया करते थे। हाथी जब भी खरगोशों की बस्ती से निकलते थे, तो छोटे-छोटे खरगोश उनके पैरों के नीचे आ जाते थे। कुछ खरगोश मर जाते थे तो कुछ घायल हो जाते थे।

रोज-रोज खरगोशों को मरते और घायल होता देखकर बस्ती में हलचल मच गई। खरगोश सोचने लगे की अगर हाथियों के पैरों से वह हर रोज़ इसी तरह कुचले जाते रहे, तो वह दिन दूर नहीं होगा जब उनका पूरी तरह से खात्मा हो जाएगा।

अपनी रक्षा का उपाय सोचने के लिए खरगोशों ने एक सभा बुलाई। सभा में सारे खरगोश इक्कट्ठा हुए। खरगोशों के सरदार ने हाथियों के अत्याचारों का वर्णन करते हुए कहा, "क्या हम सभी खरगोशों में से कोई ऐसा है, जो अपनी जान पर खेलकर हाथियों का अत्याचार बंद करा सके?"

सरदार की बात सुनकर एक खरगोश बोला, "सरदार, अगर मुझे खरगोशों का दूत बनाकर गजराज के पास भेजा जाए, तो मैं हाथियों के अत्याचार को बंद करा सकता हूं।" सरदार ने खरगोश की बात मान कर उसे खरगोशों का दूत बनाकर गजराज के पास भेज देता है। खरगोश हाथियों के झुण्ड पास पहुंच जाता है । गजराज सभी हाथियों के बीच में खड़ा था। खरगोश कुचले जाने के डर से सीधे हाथियों के बीच में से न जाकर पास की एक ऊंची चट्टान पर चढ़ जाता है। चट्टान पर खड़ा होकर उसने गजराज को पुकारकर कहा, "गजराज, मैं चंद्रमा का दूत हूं। चंद्रमा के पास से तुम्हारे लिए एक संदेश लाया हूं।"

गजराज ने चोंकते हुए कहा, “क्या कहा तुमने? तुम चंद्रमा के दूत हो? तुम चंद्रमा के पास से मेरे लिए क्या संदेश लाए हो?"

गजराज की बात का उतर देते हुए खरगोश कहता है, "हां गजराज, मैं चंद्रमा का दूत हूं। चंद्रमा ने तुम्हारे लिए संदेश भेजा है। तुम्हारे झुण्ड ने चंद्रमा की झील का पानी गंदा कर दिया है। तुम्हारे झुंड के हाथी, खरगोशों को पैरों से कुचल-कुचलकर मार डालते हैं। चंद्रमा खरगोशों को बहुत प्यार करते हैं, उन्हें अपनी गोद में रखते हैं। चंद्रमा तुमसे बहुत नाराज हैं। तुम सावधान हो जाओ। नहीं तो चंद्रमा तुम्हारे सारे हाथियों को मार डालेंगे।"

खरगोश की बात सुनकर गजराज भयभीत हो जाता है । वह खरगोश को सचमुच चंद्रमा का दूत और उसकी बात को चंद्रमा का संदेश समझ लेता है। गजराज डर कर कहता है, "यह तो बहुत बुरा संदेश है। तुम मुझे तुरंत चंद्रमा के पास ले चलो। मैं उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा माँगना चाहता हूँ।"

खरगोश, गजराज को चंद्रमा के पास ले जाने के लिए तैयार हो जाता है। खरगोश बोलता है, "मैं तुम्हें चंद्रमा के पास ले कर जा सकता हूं लेकिन शर्त यह है कि तुम अकेले ही चलोगे।"

गजराज, खरगोश की बात मान लेता है। पूर्णिमा की रात थी। खरगोश, गजराज को लेकर झील के किनारे जाता है। वह गजराज से कहता है, “लीजिये गजराज, चंद्रमा से भेंट कीजिये।" खरगोश झील के पानी की ओर संकेत देता है। गजराज पानी में चंद्रमा की परछाईं को ही चंद्रमा मान लेता है। गजराज चंद्रमा से क्षमा मांगने के लिए अपनी सूंड पानी में डाल देता है। पानी में लहरें पैदा हो जाती हैं और परछाईं अदृश्य हो जाती है ।

इस पर खरगोश कहता है, "चंद्रमा तुमसे नाराज हैं। तुमने झील के पानी को अपवित्र कर दिया है। तुमने खरगोशों की जान लेकर पाप किया है इसलिए चंद्रमा तुमसे मिलना नहीं चाहते। गजराज ने खरगोश की बात सच मान लेता है।" गजराज ने डर कर कहा, "क्या ऐसा कोई उपाय है, जिससे मैं चंद्रमा की नाराज़गी को दूर कर सकूं?"

हाथी की ये बात सुनकर खरगोश ने जवाब दिया, "हां, उपाय है। तुम्हें प्रायश्चित करना होगा। तुम कल सुबह ही अपने झुंड को लेकर यहां से दूर चले जाओ। ऐसा करने से चंद्रमा तुमसे खुश हो जाएंगे।"

गजराज प्रायश्चित करने के लिए तैयार हो जाता है। वह अगले दिन ही हाथियों के झुंड सहित जंगल से चला जाता है।

इस तरह, खरगोश अपनी चालाकी से गजराज को धोखे में डाल देता है और अपनी बुद्घिमानी से साथी खरगोशों को मरने से बचा लेता है।


सारांश: बुद्धि के बल से बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है।


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Wednesday, 14 February 2018

पंचतंत्र की कहानी - शेर की जिज्ञासा

किसी घने जंगल में एक शेर रहता था। शेर कई वर्षों से उस जंगल में रह रहा था। समय के साथ वह काफी बूढा हो गया था। अपने अंतिम दिनों में, शेर अपने बच्चे से कहता है -"बेटा, आज मैं तुम्हें कुछ सलाह दे रहा हूँ। तुम इसे हमेशा याद रखना। तुम शुरू से मेरी छत्र-छाया में रहे हो। तुम्हें मैंने कभी भी, किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी। लेकिन अब मेरे जाने के बाद तुम्हे अपना रख रखाव खुद करना है। तुम्हे विभिन्न प्रकार के जानवर मिलेंगे। याद रखना कि तुम उन सभी जीवों से ज्यादा ताकतवर हो। कभी भी किसी से मत डरना - सिवाय इंसान के।"


शेर का बच्चा अचम्भित होकर पूछता है, “इंसान?” तब शेर उसे समझाता है, "हाँ। इंसान। वह बहुत ही खतरनाक होता है। कोशिश करना की तुम्हारा कभी इंसान से सामना ना हो। मेरी बात सदैव याद रखना।" 

कुछ दिनों के बाद शेर की मृत्यु हो जाती है। शेर के बच्चे में इंसानों को लेकर एक अलग धारणा बन जाती है। वह इंसानों के प्रति भ्रमित रहता है और उसे एक बार देखने की इच्छा रखता है। अपनी जिज्ञासा के चलते शेर इंसान को ढूंढ़ने जंगल में निकल पड़ता है। 

जंगल में घुमते हुए शेर को बड़ी कद-काठी वाला एक जानवर दिखाई देता है। वह एक घोड़ा होता है। शेर को लगता है की शायद यही इंसान है। वह घोड़े के पास जा कर पूछता है, "क्या तुम इंसान हो?" शेर की इस बात पर घोड़ा जवाब देता है, "नहीं भाई। मैं तो एक घोड़ा हूँ। इंसान तो बहुत ही बुद्धिमान होता है। वह मेरी सवारी करता है।"

घोड़े की बात सुन कर शेर चौंक जाता है। वह घोड़े से आश्चर्यजनक स्वर में पूछता है, "क्या? इंसान तुम्हारी सवारी करता है?" 

घोडा शेर की बात का जवाब देता है, ‘हाँ। इंसान मेरी सवारी करता है।" यह सुनकर शेर आगे बढ़ता है। वह मन ही मन सोचता है की इंसान बहुत ही ताकतवर जीव होगा।

कुछ दूर जाने के बाद शेर को सामने एक ऊँट दिखाई देता है। ऊँट की ऊंचाई देख कर शेर को लगता है की शायद वही इंसान है। शेर ऊँट के पास जाता है और उससे पूछता है, "क्या तुम इंसान हो?"

ऊँट जवाब देता है, "नहीं। नहीं। मैं तो एक ऊँट हूँ।" शेर फिर से पूछता है, "क्या तुमने कभी इंसान देखा है?" ऊँट जवाब देता है, "हाँ। देखा है ना। इंसान बहुत ही बुद्धिमान होता है। वह मुझे अपने काम के लिए इस्तेमाल करता है और मुझ पर सामान ढो कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है।" 

शेर सोचता है, "यह ऊँट कितना ऊंचा है। फिर भी इंसान इससे अपना काम करवाता है। ज़रूर वह बहुत ही बड़ा और बलशाली होगा।"

थोड़ा दूर जाने के बाद शेर को सामने एक दो दांत वाला विशालकाय जानवर दिखाई देता है। वह हाथी होता है। हाथी को देख कर शेर को यक़ीन हो जाता है की वही इंसान है। शेर,हाथी के पास जा कर बोलता है, “क्या तुम्ही इंसान हो?” शेर की इस बात पर हाथी पहले बहुत हँसता है और फिर कहता है, “मैं तो बस एक हाथी हूँ। इंसान तो बहुत ही बुद्धिमान होता है। वह तो मुझे सर्कस में डंडे की नोक पर नचाता है।"

हाथी की बात सुनकर शेर को विश्वास हो जाता है की इंसान बहुत ही खतरनाक होता है। शेर घूमता हुआ जंगल की सीमा तक पहुंच जाता है। वहां उसे एक आदमी लकड़ी काटता हुआ दिखाई देता है। शेर, आदमी को देख कर समझ नहीं पता की वह कौन है। वह उस आदमी के पास जा कर सवाल करता है, “क्या तुमने कभी इंसान देखा है?”

यह सुनकर इंसान हैरान होकर जवाब है, “इसमें देखना क्या | में खुद एक इंसान हूँ |” आदमी को देखकर शेर को यकीन नहीं होता की इंसान उसकी कल्पना के बिलकुल विपरीत निकलेगा | आदमी को देख शेर ने कहा, “मुझे तो लगा था की इंसान बहुत खतरनाक होता होगा | तुम्हे तो में अभी मर कर खा जाऊंगा|”
शेर को अपनी तरफ बढता देख आदमी फौरन अपने विवेक से काम लेता है और कहता है, ”ठहरो, अगर तुम्हे लगता है की तुम मुझसे ज्यादा ताकतवर हो तो पहले इस लठ्ठर में से छेनी निकल कर दिखाओ।” आदमी की बात सुनकर शेर लठ्ठर में से छेनी निकलने के लिए जैसे ही अपना हाथ डालता है, लठ्ठर का मुंह बंद हो जाता है और हाथ उसमें फंस जाता है |

शेर को अपनी गलती का अहसास हो जाता है और वह समझ जाता है की इंसान वाकई में बहुत बुद्धिमान होता है। शेर आदमी से माफ़ी मांगता है और वादा करता है की वह कभी भी किसी इंसान के सामने नहीं जायेगा। 


सारांश – हमें सदैव अपने माता-पिता की बात माननी चाहिए। 

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Wednesday, 7 February 2018

पंचतंत्र की कहानी - मुर्गा और गधा

बहुत समय पहले, किसी जंगल में मुर्गा और गधा साथ रहते थे। वह दोनों बहुत अच्छे मित्र थे। एक दिन, मुर्गा और गधा खाने की तलाश में जंगल में काफी दूर तक चले गये और उन्हें कुछ दूरी पर एक शेर दिखाई दिया। शेर को देख कर दोनों बहुत डर गए। इससे पहले की शेर की नज़र उन दोनों पर पड़ती, वे दोनों झाड़ियों में छुप गये।


शेर के डर के मारे, दोनों झाड़ियों में ही छुपे रहे और शेर के जाने का इंतेज़ार करने लगे। कुछ देर के बाद, उन्होंने  देखा की सामने मैदान में एक बकरी घास चर रही है। शेर भी बकरी को देखता है और दबे पाओं उसकी तरफ बढ़ना शुरू करता है। बकरी को मुसीबत में देख कर मुर्गा, गधे से कहता है, “हमें उस बकरी की सहायता करनी चाहिए।"

यह सुनकर गधा अचरज भरी नजरों से मुर्गे की तरफ देखकर बोलता है, "भला हम उस बकरी की सहायता कैसे कर सकते हैं? यह शेर बहुत खूंखार है और हमें मारकर खा जायेगा।”गधे की इस बात पर मुर्गा कहता है -"कुछ ना करने से अच्छा होगा की हम कोशिश तो करें।"

शेर जैसे ही बकरी को दबोचने वाला होता है, मुर्गा बहुत ज़ोर से बांग देता है। अचानक से मुर्गे की तीव्र आवाज़ सुन कर शेर डर जाता है और वहां से भाग जाता है। गधा, मुर्गे की होशियारी देख कर बहुत खुश होता है। उसके मन में विचार आता है की क्यों ना वह शेर को जंगल से बाहर भगा कर आए? बाकी जानवरों के बीच उसका भी थोड़ा नाम हो जायेगा।

ऐसा सोचते हुए गधा, शेर के पीछे-पीछे भागना शुरू करता है। गधे को भागता देख मुर्गा बोलता है, "ठहरो मित्र। यह तुम क्या कर रहे हो?" गधा मुर्गे की बात नज़रंदाज़ करते हुए शेर के पीछे भागता रहता है। गधा शेर के पीछे भागता हुआ काफी दूर चला जाता है। अति उत्साहित हो कर गधा ढेंचू-ढेंचू करके शेर को डराने की कोशिश करता है।

शेर गधे की आवाज़ सुन कर पीछे मुड़कर देखता है। तब उसे पता चलता है की वह किसी खतरनाक जानवर नहीं बल्कि एक गधे से डरकर भाग रहा है। इससे पहले की गधा कुछ सोच पाता, शेर उसे दबोच लेता है और बेरहमी से मारकर खा जाता है। इस तरह गधा अपनी मूर्खता के कारण मारा जाता है।

सारांश:-  आत्मविश्वास ज़रूरी होता है लेकिन अति आत्मविश्वास हमेशा नुकसानदायक होता है। 

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बिच्छू के रूप में भगवान

बहुत समय पहले एक बुजुर्ग दरिया के किनारे से जा रहा थे। तभी उन्होने देखा कि दरिया के अंदर से एक कछुआ आया और दरिया के किनारे पर आकर रुक गया। ...