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Showing posts from September, 2017

पंचतंत्र की कहानी - चुहिया बनी दुल्हन

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गंगा नदी के तट पर एक साधू अपनी पत्नी के साथ रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन साधू जब तप कर रहे थे, एक बाज वहां से गुजर रहा था और उसके पंजे में एक चुहिया फंसी हुई थी। जब बाज़ साधू के ऊपर से गुज़रा तो वह चुहिया उसके पंजो से छुटकर नीचे साधू की गोद में गिरी जिससे साधू की आँख खुल गई। घायल चुहिया को देखकर साधू को बहुत दया आयी। साधू ने मंत्र पढ़कर चुहिया को एक बच्ची का रूप दिया और अपनी पत्नी को सौंप दिया। वह पत्नी को बच्ची सौंपते हुए बोले,"प्रिय हमारी कोई संतान नहीं है। मैं जानता हूँ तुम संतान सुख चाहती हो।आज से इसे ही अपनी संतान समझो।" साधू की पत्नी बच्ची को पाकर बहुत खुश हुई।
कई साल बीत गए और वह बच्ची बड़ी होकर एक सुन्दर युवती में तब्दील हो गई। अब साधू अपनी बेटी के लिए उपयुक्त वर ढूंढने लगे। साधू अपनी बेटी का हाथ किसी साधारण मनुष्य के हाथ में नहीं देना चाहते थे। साधू ने सूर्य देव का ध्यान करके सूर्य देव को बुलाया। अगले ही पल सूर्य देव प्रकट हो गए। साधू बोले, "बेटी, ये सूर्य देव हैं। क्या तुम इनसे विवाह करना पसंद करोगी?" लड़की ने जवाब दिया, "नहीं पिताजी! ये बहुत ग…

पंचतंत्र की कहानी - बन गया शेर

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बहुत समय पहले की बात है। एक आश्रम में चार मित्र ऋषि से विभिन्न तरह कि विद्या प्राप्त कर रहे थे | ऋषि ने उन चारों को कई तरह के यज्ञों को सम्पन्न करने का ज्ञान दिया। जब उन चारों की शिक्षा समाप्त हुई तो वे अपने घर जाने के लिए ऋषि से आज्ञा लेने जाते हैं। ऋषि उन चारों को बोलते हैं, "मुझे तुम्हे जो सिखाना था, वो मैंने सिखा दिया। अब तुम अपने विवेक से अपनी विद्या का इस्तेमाल करना।" ऋषि से आशीर्वाद लेकर वो चारों अपने गाँव के लिए रवाना होते हैं। 
रास्ते में वह एक घने जंगल से गुजरते हैं। वहां उन्हें एक शेर का कंकाल नजर आता है। उन चारों में से एक मित्र बोलता है, “मित्रो, मैंने जो ज्ञान गुरूजी से प्राप्त किया है, उससे इस शेर के कंकाल की हड्डियों को मैं एक कर सकता हूँ।"  इससे पहले कि कोई कुछ कह पाता, वह मंत्र पढ़कर उस कंकाल को एक कर देता है। यह देखकर बाकी तीनो मित्र हैरानी से एक-दुसरे को देखते हैं और खुश होते हैं।
दूसरा मित्र भी बोल पड़ता है, "मित्रो, मुझे एक ऐसा मंत्र आता है जिससे मैं इस कंकाल के अंगो का निर्माण कर सकता हूँ।" यह बोलते ही वह एक मंत्र पढता है और पलक झपकते ही शे…

पंचतंत्र की कहानी - कछुआ और हंस

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एक घने जंगल में एक कछुआ और दो हंस रहते थे| तीनों ही गहरे मित्र थे| तीनो का वक़्त एक-दुसरे के साथ खेलते और बात करते हुए कब बीत जाता, पता ही नहीं चलता था|
एक दिन कछुआ, हंसों से कहता है कि मित्र काश मैं भी तुम्हारी तरह उड़ पाता, काश मेरे भी पंख होते, तभी हंस भी उससे कहता है की काश हमारी पीठ पर भी तुम्हारी तरह ही कोई मजबूत ढाल होती तो हमें भी शिकारियों का सामना नहीं करना पड़ता और हम आराम से उड़ सकते थे|
एक बार जंगल में आकाल पड़ गया और जंगल के सभी जानवर वहां से जाने लगे| इसलिए हंसों ने भी सोचा कि वो भी वहां से चले जाएंगे| ये बात वो कछूए को बताने के लिए उसके पास जाते हैं और उससे कहते हैं, कि हम जंगल छोड़ कर जा रहे हैं तुम अपना ख्याल रखना|

कछुआ उनकी ये बात सुनकर रोने लगता है और उनसे कहता है कि मित्रों तुमने मुझसे ये बात कहकर मुझे बहुत दुखी किया है| मैं अकाल में तो रह सकता हूँ लेकिन अकेलेपन का शिकार नहीं बन सकता, इस दुनिया में मेरा तुम्हारे सिवाए है ही कौन? अगर तुम साथ होते तो कितना मजा आता और वो कछुआ उनको ये बात कहकर रोने लगता है|
हंस भी उसकी ये बात सुनकर रोने लगते हैं और उससे कहते हैं, तुम्ही बताओ …