20 February 2019

बुद्धिमान साँप

किसी जंगल में साँपो का एक बहुत बड़ा झुंड रहता था। सभी सांप एक बड़े से बिल में साथ रहते थे। वे हमेशा हर मुसीबत में एक दूसरे का साथ देते थे। सबकुछ अच्छा चल रहा था कि एक दिन, साँपो का राजा सभी साँपों को अपने पास बुलाता है। और मुझे एक बहुत ज़रूरी ऐलान करना है  मैंने सुना है की जंगल में एक नेवला आया है जो बहुत ही बड़ा और खतरनाक है। उसने पहले भी बहुत साँपो को मारा है, जिसकी वजह से जंगल के सभी साँपो के बीच उसके नाम की दहशत फैल हुए है ।

राजा की बात सुनकर सभी साँप डर के मारे कांपने लगते हैं और राजा से बोलते हैं -एक साँप बोला  महाराज, अब हम सब क्या करेंगे ? इतने मे दूसरा साँप बोला अगर वह नेवला यहाँ आ गया तो ?

साँपो का राजा कहता है दोस्तों, तुम चिंता मत करो ! घबराने की कोई बात नहीं है। मेरे पास इस मुसीबत का एक उपाय है। इतने में  चिंटू, चिंकी चुनु वहा आ जाते है चिल्लाते हुए !

साँपो का राजा उनसे पूछता है ! चिंटू, चिंकी, चुनु - हम सभी बहुत बड़ी मुसीबत में हैं। हमें तुम्हारी मदद की आवश्यकता है।
चिंटू कहता है  हाँ, राजा जी ! बोलिए ! हम आपकी क्या मदद कर सकते हैं ?

राजा तुम सभी जानते हो ना नेवले को ? वह हमारे इस जंगल में आ गया है। क्या तुम सभी उस नेवले से बचने के लिये कोई सुझाव दे सकते हो ? चिंकी बोलता है हाँ, जरूर महाराज।

वह तीनों साँप अलग-अलग दिशाओं में चले जाते हैं और कुछ देर बीत जाने के बाद अपने बिल में राजा के पास वापस आते हैं।उन तीनों को वापस देखकर राजा बहुत खुश होता है।
राजा  वाह ! तुम सभी को इतनी जल्दी वापस देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है। बताओ, क्या उपाय लेकर आए हो ?



राजा के ऐसा बोलते ही तीनों साँप मुँह नीचे करके खड़े हो जाते हैं।
राजा पूछते है  क्या हुआ ? तुम सभी चुप क्यों हो ? चिंटू, बोलो ?
चिंटू कहता है  राजा जी ! चिंकी हम सब से तेज़ है। मुझे लगा कि वह कोई उपाय ज़रूर लेकर आयेगी।राजा  ओह ! ठीक है। चिंकी, तुम क्या उपाय लायी हो ?

चिंकी कहती है, चुनु की तरफ इशारा करती है
चिंकी बोलती है राजा जी - चुन्नु हम सब से तेज़ है। मुझे लगा था कि वह तो पक्का कोई ना कोई सुझाव ज़रूर लाएगा। 

साँपो का राजा चुन्नु की तरफ देखते हुए कहता है  तुम क्या सुझाव लेकर आये हो ?
चुनु कहता है  राजा जी, मैंने सोचा कि चिंटू जरूर कोई सुझाव लेकर आएगा इसीलिए मैं कोई सुझाव नहीं लाया।
तीनों साँप बहुत शर्मिंदा होते हैं।
राजा कहता है  मैंने तुम तीनों को इतनी ज़िम्मेदारी का काम सौंपा था और मुझे उसका यह निष्कर्ष मिला ! तुम तीनों बस एक दूसरे के बारे में ख़याली पुलाव बनाते रह गए। चलो जो हुआ सो हुआ। अब तुम तीनों मिल कर काम करो। 

तीनों साँप एक कोने में जाकर आपस में चर्चा करने लगते हैं। थोड़ी देर के बाद वह तीनों वापस आते हैं और अपने बिल में आने वाले रास्ते पर नेवले को पकड़ने के लिये एक बड़ा सा जाल बिछा देते हैं।
जाल बिछाने के बाद सभी सांप बिल के अंदर चले जाते हैं। जब नेवला, साँपो के बिल में घुसने की कोशिश करता है, तो वह उस जाल में फंस जाता है।

नेवले के जाल में फंसते ही सारे सांप मिलकर नेवले पर मिलकर प्रहार करते हैं जिससे नेवला घायल हो जाता है। यह देखकर राजा बहुत खुश होता है।

साँपो का राजा बहुत बढ़िया, चिंटू, चिंकी, और चुन्नु ! अगर तुम तीनों शुरुआत में ही साथ मिलकर काम करते तो शायद हम इस नेवले को पहले ही पकड़ लेते। लेकिन कोई बात नहीं। कुछ नहीं होता। वो कहते है ना - देर आये पर दुरुस्त आये। तुम तीनों का बहुत धन्यवाद !

उस दिन के बाद से सभी साँप अपने बिलों में शांति से रहने लगते हैं और नेवला कुछ दिनों तक भूखा-प्यासा जाल में फंसा रह कर मर जाता है।

शिक्षा:- कि हमें सदैव मिलजुलकर काम करना चाहिये क्योंकि एकता में बहुत बल होता है।



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14 February 2019

शॉल का बंटवारा

अमरोहा नामक गाँव में दो भाई राजेश और बजरंग अपने पिता के साथ रहते थे । एक काम करता था और दूसरा पिता की  देखभाल करता था । परिवार का जीवन अच्छे से चल रहा था, की एक दिन उनके पिता की तबीयत बहुत ख़राब हो गई।
राजेश और बजरंग के पिताजी दोनों से कहते है, मेरे बच्चों ! तुम दोनों बहुत समझदार हो । मुझे पूरा भरोसा है, की मेरी मृत्यु के बाद तुम दोनों यह घर और कामकाज अच्छे से संभाल लोगे, तभी राजेश अपने पिता से कहता है, हम आपको कुछ नहीं होने देंगे तभी बजरंग कहता है, हाँ पिताजी भैया सही कह रहे है आपको कुछ नहीं होगा आप जल्द ही ठीक हो जायेंगे | 

दोनों भाई अपने पिता से बात कर रहे होते हैं की तभी उनके पिता एक लंबी सांस लेते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है ।
अपने पिता को ऐसे देखकर दोनों भाई हैरान रह जाते है व बहुत रोते है।पिता की मृत्यु के बाद दिन बीतते जाते हैं और धीरे-धीरे दोनों भाइयों की छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई होने लगती है ।

बजरंग राजेश से कहता है यह धन मेरा है । पिताजी यह सब मेरे लिये छोड़कर गए हैं, राजेश गुस्से में  कहता है, नहीं यह सब मेरा है । तुम तो कभी सही से काम पर भी नहीं गए, फिर बजरंग कहता है मैं घर में रहकर पिताजी की सेवा करता था | राजेश तो कोई एहसान तो नहीं करते थे ना ! वह तुम्हारा फ़र्ज़ था । ऐसे धीरे धीरे दोने के की लड़ाई बढ़ती चली गई तभी राजेश को एक तरकीब सूजी उसने बजरंग से कहा अच्छा ठीक है एक काम करते है आज हम हर छोटी-बड़ी चीज़ का बंटवारा कर लेते हैं, फिर चाहे वह घर का राशन हो या फिर धन । बंटवारा करते हुए पिताजी की एक शॉल उन दोनों भाइयों के हाथ लगती है ।




राजेश वो शॉल अपने पास रख लेता है, तभी बजरंग उससे शॉल लेकर कहता है पिताजी की आखिरी निशानी है तो में ये शॉल अपने पास रखूंगा, तभी राजेश कहता है  लेकिन यह शॉल पिताजी के लिए मैं ख़रीद कर लाया था, ये तो मेरे पास ही रहेगी ये बोलकर राजेश शॉल छीन लेता है और अपने पास रख लेता है फिर बजरंग कहता है  तो क्या हुआ ? उनका और उनकी हर ज़रुरत का ध्यान तो मैं ही रखता था ।दोनों में शॉल को लेकर विवाद हो जाता है और कुछ देर इसी तरह बहस करने के बाद वह दोनों अंतिम फैसले पर पहुँचते हैं, की शॉल के बंटवारा पंचायत करेगी । वह दोनों गाँव के सरपंच को सारी बात बताते हैं।

राजेश  सरपंच जी के पास जाकर कहता है ! इस शॉल का बंटवारा करने में हमारी मदद कीजिये।

सरपंच कहते है  अगर तुम दोनों यही चाहते हो तो, ठीक है ! लेकिन हम बंटवारे का फैसला इतनी जल्दी नहीं सुना सकते हैं, इसलिए हम इसका फैसला तीन दिन के बाद सुनायेंगे। साथ में बैठे दूसरे सरपंच कहते है हाँ ! और इस बीच तुम दोनों का घर बंद कर दिया जायेगा । तीन दिन बाद सरपंच द्वारा सभी चीज़ों का बंटवारा दोबारा किया जायेगा ।

यह बोल कर सरपंच राजेश और बजरंग के घर में ताला लगा देते हैं और वहाँ से चले जाते हैं । राजेश और बजरंग तीन दिन के लिए अपने पड़ोसियों के घर में रुक जाते हैं ।राजेश मन में कहता है तीन दिन बाद निर्णय आ जायेगा और उसके बाद मैं अपने जीवन आराम से व्यतीत करूँगा ।

दोनों यह सोचकर अपने पड़ोसी के घर में शांति से रहने लगते हैं । उसी रात उनके घर में चोरी हो जाती है, लेकिन यह बात गाँव में किसी को भी पता नहीं चलती है । इसी तरह तीन दिन बीत जाते हैं । तीन दिन बाद बंटवारे का फैसला करने के लिए घर का ताला खोला जाता है, तो अंदर का नज़ारा देखकर सभी हैरान रह जाते हैं ।

बजरंग कहता है  हमारा घर ! यह क्या हो गया ? सारा सामान कहाँ गया ?राजेश कहता है  अब तो हमारे हाथ वैसे भी कुछ नहीं आना ! इससे तो अच्छा होता की हम बंटवारे के बारे में सोचते ही नहीं।
दोनों भाई यह सब बोल ही रहे होते है की तभी उनकी नज़र सरपंच के हाथ पर रखी शॉल पर पड़ती है।राजेश सरपंच से शॉल वापस लेते हुए उन सभी सरपंचों के आगे हाथ जोड़कर बोलता है, हमें माफ़ करना सरपंच जी ! लेकिन अब कोई बंटवारा नहीं होगा, वैसे भी अब हमारे इस घर में बंटवारे के लिए कुछ बचा ही नहीं है ।बजरंग भी राजेश की बातो से सहमत होता है  हाँ ! भैया आप ठीक कह रहे हो । सरपंच लेकिन क्या तुम दोनों उस चोर को ढूँढना नहीं चाहोगे ।

राजेश कहता है सरपंच जी ! तीन दिन बीत गए हैं, अब तो वह चोर जाने कहाँ निकल गए होंगे ।
दोनों भाइयों की यह बात सुनकर सभी सरपंच मुस्कुराने लगते हैं, तभी दूसरा सरपंच मुस्कुराते हुए बोलै तुम दोनों को इस बात का एहसास कराना बहुत ज़रूरी था कि हमें सदैव मिलजुलकर रहना चाहिए। क्योंकि अब तुम दोनों यह बात समझ चुके हो तो हम तुम्हें कुछ देना चाहते हैं।फिर वह सभी घर के पीछे की तरफ जाते हैं । दोनों भाई यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि चोरी का सारा सामान वहीँ रखा होता है ।

सरपंच सामान की तरफ इशारा करते हुए  तुम्हारा सामान ! तुम्हारे पिताजी यह चाहते थे कि तुम दोनों एक साथ मिलकर रहो। तुम्हें सीख देने के लिए हमने यह सामान ग़ायब करवाया था। जिससे तुम दोनों को इसका अहसास हो ।

शिक्षा :- हमें हमेशा अपनों के साथ मेल और प्यार से रहना चाहिये, क्योंकि सुखी और शांत जीवन बिताने का यही एक मूल मंत्र है।


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10 February 2019

जंगल गैंग

किसी जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। वह सभी हमेशा खूब मस्ती किया करते थे | और हर मुसीबत में एक दूसरे के साथ खड़े रहते थे। एक दिन, कुछ जानवर साथ बैठकर बातें कर रहे होते है कि तभी गप्पू बंदर भागता हुआ उनके पास आता है।

और बोला सुनो सब लोग - “एक मुसीबत आ गई कुछ इंसान हमारे जंगल के बाहर खड़े हैं। वह इस पूरे जंगल को काट कर इसकी जगह एक बड़ा शॉपिंग मॉल और लोगो के रहने के लिए घर बनाने वाले हैं।”

शेरख़ा कि बात पर सभी उसकी हां में हां मिलाते है और जंगल की सीमा की तरफ बढ़ते हैं। वहां उन्हें कुछ लोग बड़ी, बड़ी मशीनों के साथ खड़े नज़र आते है। उन सभी इंसानों को देख कर शेरख़ा को बहुत गुस्सा आता है, और वो दहाड़ने लगता है 
शेरख़ा शेर  इन्हें भागने कि तरकीब निकलता है वो गप्पू को कहता है मै  दहाड़ लगाऊंगा और तुम पेड़ो पर झूलते हुए सभी पर पत्थर मरोगे और फिर बल्लू और मैं भागते हुए उनके पास जायेंगे।

वह सभी वैसे ही करते है जैसा शेरख़ा उन्हें करने के लिए बोलता है। थोड़ी ही देर में सभी इंसान वहाँ से भाग जाते हैं। उन्हें वापस जाते देखकर सभी जानवर बहुत खुश हो जाते हैं।

सभी जानवर खुश हो जाते है और वापस अपने घर आकर आराम से बैठ जाते हैं। अगली सुबह, वह इंसान जंगल में दोबारा वापस आ जाते हैं और खुदाई करने लगते हैं। यह सब देखकर गप्पू जल्दी से अपने दोस्तों के पास जाता है।और कहता है 
वापस आ गए ! वह फिर वापस आ गए। और अब तो हमारे जंगल की खुदाई भी करने लगे हैं।

एक तरफ सभी जानवर इंसानों पर हमला करने कि योजना बना रहे होते हैं तो वहीं दूसरी तरफ पोपट तोता अपने दोस्तों के पास जाते हुए, रास्ते में इंसानों को बात करते सुन लेता है।

वह मौजूद आदमी कहता है   हमें जल्द ही अपना काम पूरा करना होगा, नहीं तो यह जानवर हमें मार कर खाने में वक़्त नहीं लगाएंगे चलो जल्दी यहाँ नदी के लिये रास्ता बनाते है और अपना काम खत्म करके यहाँ से चलते है।यह सुन कर पोपट तोता 
हैरान होते हुए bola  हाय रमा ! यह लोग तो हमारी मदद करने आये हैं और हम सब इन्हें मारने चले थे। मुझे जल्द से यह सबको बताना होगा।



पोपट तोता सबको सच बताने के लिए शेरख़ा की गुफा के पास पहुँचता है, लेकिन जब तक वह गुफा के पास पहुँचता है, उसके सभी दोस्त इंसानों पर हमला करने के लिए निकल गए होते हैं।

पोपट तोता जल्द ही एक बार फिर से उड़ान भरता है और उस जगह पहुँचता है जहाँ इंसान खुदाई कर रहे थे। वहाँ पहुंचते ही वह देखता है कि वहाँ कोई भी इंसान नहीं है और उसके सभी दोस्त ख़ुशी से नाच रहे हैं।तभी बल्लू भालू बोलै आज हमने उन सभी इंसानों को इस तरह डराया है कि इसके बाद वह कभी, किसी भी जंगल में घुसने के बारे में नहीं सोचेंगे।तभी पोपट तोता गुस्से में बताया  दोस्तों, यह सब तुमने बिलकुल भी सही नहीं किया। वह इंसान यहाँ हमारा घर तोड़ने नहीं बल्कि हम सभी के लिए इस जंगल में नदी का रास्ता बनाने आये थे, जिससे हमें कभी पानी की कोई दिक्कत न हो।

पोपट तोते कि बात सुनते ही सभी जानवर एकदम हक्के-बक्के रह गए और गुस्से में गप्पू की तरफ देखने लगे और कहने  लगे वो तुम ही थे न जिसने हमें बताया की वो इंसान हमारा घर तोड़ने ऐ है तभी गप्पू बंदर सर झुका बोला बस जंगल में घूम रहा था कि मैंने कुछ इंसानों को मशीनों के साथ जंगल के बाहर खड़े कुछ बातें करते हुए और इशारा करते हुए देखा।यह देखकर मुझे लगा कि वह हमारा जंगल तोड़ने आये है, इसीलिए में सीधा आप सभी के पास आ गया। मैंने उन इंसानों कि बात नहीं सुनी थी। वह सभी अपने किये पर बहुत पछताते हैं, लेकिन वो कहते है ना कि “ अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ”

शिक्षा:- कि अधूरी जानकारी हमेशा हानिकारक होती है।  

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6 February 2019

जादुई चक्की

वीरपुर नाम के गाँव में अमन और रमन नाम के दो भाई अपने परिवार के साथ रहते थे। अमन बहुत अमीर था , वहीं रमन के पास खाने के भी पैसे नहीं थे। जब कभी रमन अपने भाई अमन के पास सहायता मांगने के लिए जाता , अमन उसे धुत्कार देता था। एक दिन रमन जंगल में लकड़ियां लेने गया। वापिस आते हुए उसने देखा की भेड़िया एक सूंदर हिरन का शिकार करने वाला है। रमन भेड़िये को भगाकर हिरन की जान बचा लेता है , तभी हिरन एक सुंदर लड़की का रूप लेकर उसके सामने आ जाती है, तभी रमन कहता है - आप कौन हो ? और आपने अचानक अपना रूप कैसे बदल लिया ?

तभी वो लड़की बोलती है - मैं मिट्टी की देवी मीतेश्वरी हूँ। एक पेड़ ने मुझे श्राप दिया था कि मैं अपना असली रूप तभी धारण कर पाऊँगी जब कोई ईमानदार व्यक्ति मुझे मरने से बचाएगा , तुमने मुझे श्राप से मुक्त किया है। बोलो तुम्हें क्या चाहिए ?

लेकिन रमन उस देवी से कुछ नहीं मांगता, तभी वो देवी बोलती है - मैं तुम्हारी ईमानदारी से खुश हूँ, इसलिए मैं तुम्हे एक चक्की देना चाहती हूँ।  मीतेश्वरी देवी रमन को चक्की देते हुए बोलती हैं,-  यह कोई साधारण चक्की नहीं है। यह एक इच्छापूर्ति चक्की है, तुम इस चक्की से कोई भी सामान मांगकर इसे एक बार घुमाना, तुम्हें वो सामान मिल जायेगा। सामान मिलने के बाद तुम इस चक्की पर लाल कपडा रख देना जिससे वो सामान आना बंद हो जायेगा।

यह कहकर  मीतेश्वरी देवी वहाँ से गायब हो जाती हैं और रमन उस चक्की को लेकर घर पहुंचता है। रमन उस चक्की के बारे में अपनी पत्नी रेखा को बताता है, - आज जंगल में मुझे यह जादुई चक्की मिली। हम इस चक्की से जो भी सामान मांगेंगे हमे वो मिल जायेगा। 

रमन उस चक्की से खाने के लिए दाल और रोटी मांगता है। तभी उसके सामने दाल और रोटी आ जाती है। रमन और उसका परिवार यह देखकर बहुत खुश होता है।वह भरपेट खाना खाते हैं। अब उन्हें जिस भी चीज़ की जरुरत पड़ती वह उस चक्की से मांग लेते थे। धीरे धीरे रमन बहुत अमीर हो जाता है और उसका घर भी बहुत बड़ा हो जाता है। यह सब देखकर एक दिन उसका भाई अमन सोचता है,- इसके पास तो पहले खाने तक के पैसे नहीं थे, फिर ये अचानक इतना अमीर कैसे हो रहा है ? मुझे पता लगाना ही होगा। 

एक दिन अमन छुपकर देखता है, कि रमन चक्की से जो भी मांग रहा है, वो सामान उसे मिल रहा है। अमन समझ जाता है की यह कोई जादुई चक्की है , जो इच्छा पूरी करती है। ये देखकर अमन को लालच आ जाता है और वह उसे चुराने की योजना बनाता है।

रात को रमन के सोने के बाद अमन उस चक्की को चुरा लेता है और अगली सुबह अमन अपना घर छोड़कर अपने परिवार के साथ उस चक्की को लेकर दूर किसी टापू पर जाने के लिए नाँव में सवार हो जाता है। उसकी पत्नी लीला उससे पूछती है,-  क्या हम अपना घर और ज़मीन सिर्फ इस पत्थर की चक्की के लिए छोड़कर जा रहे हैं ?

तब अमन अपनी पत्नी लीला से कहता है - ये कोई साधारण चक्की नहीं है। ये एक इच्छापूर्ति चक्की है। 
ये सुन कर लीला अपने पति से बोलती है, -  क्या ? इच्छापूर्ति चक्की? , पर मैं ये कैसे मान लूँ ? अगर ऐसा है तो तुम इससे कुछ मांगो। 

तभी अमन पत्नी की बात मान कर कहता है की हम इस चक्की से नमक मांगते हैं , चक्की देवी नमक निकाल। 
चक्की नमक निकालना शुरू करती है और थोड़ी ही देर में नांव नमक से भरने लगती है। 

नाँव  में नमक बढ़ता ही जाता है और कुछ समय में  नाँव चक्की समेत समुद्र में डूब जाती है। ऐसा माना जाता है कि शायद आज भी वह चक्की चल रही है  इसलिए समुद्र का पानी खारा होता है। 

शिक्षा :- तो बच्चों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की हमें कभी लालच नहीं करना  चाहिए।

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2 February 2019

जादुई चुहिया Part 1

पलवल शहर में चुटकी नाम की एक चुहिया रहती थी । चुटकी किस्मत की बहुत धनी थी। चुटकी जहाँ भी जाती थी, वहाँ कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होती थी । एक दिन, चुटकी घूमते हुए राहुल नाम के एक बच्चे के घर में गयी।

चुटकी  अरे वाह ! लगता है आज तो बहुत अच्छा खाना मिलेगा। मैं पेट भर के खाऊंगी।”

यह बोलते हुए जैसे ही चुटकी घर के अंदर की तरफ बढ़ती हैं, तभी उसके सामने एक बड़ा सा पैर आ जाता है।
चुटकी पैर से बचते हुए “हे भगवान ! आज तो मैं बाल-बाल बच गयी। यह इंसान नीचे देखकर नहीं चल सकते क्या ? अभी मुझे कुछ हो जाता तो ?!”

इसके बाद चुटकी थोड़ा और आगे चलती है तो उसे रसोई दिखाई देती है । वह भागकर रसोई में गई |

चुटकी खाना देखकर बहुत खुश होती है और बोली “मज़ेदार खाना ! स्वादिष्ट खाना ! आज तो जमकर खाउंगी।”

चुटकी रसोई से अलग-अलग चीज़े खाने लगती है । उसे रसोई में खाना खाते हुए राहुल की मम्मी देख लेती हैं ।

मम्मी चुटकी पर डंडा फेंकते है ! “भाग यहाँ से ! ना जाने यह चूहे कहाँ से आ गया  । मैं तो दुखी हो गई हूँ इनसे !”

मम्मी के भगाने के बाद चुटकी राहुल के कमरे में चली गई ! और वहीँ रहने लग गई  । धीरे-धीरे राहुल के घर में बरकत होने लगती है । एक दिन राहुल और उसके माता-पिता रात का खाना खाते हुए आपस में बात करते हैं ।

पापा बोलते है  “आजकल काम में बहुत तेज़ी आ गयी है । मुनाफ़ा भी बहुत हो रहा है ।”

मम्मी खुश होते हुए “ भगवान हमारी ख़ुशियाँ इसी तरह बनाये रखे ।”

राहुल भी बोलता है “पापा प्लीज! इस बार मुझे साइकिल चाहिये । मेरे सभी दोस्तों के पास साइकिल हैं ।”

पापा बोले  ठीक है ! इस बार तुम्हें तुम्हारी साइकिल मिल जाएगी ।”




मम्मी बोली “सब कितने खुश है ! मेरे परिवार को किसी की नज़र ना लगे।”

एक तरफ खाना खाते हुए पूरा परिवार अपनी ख़ुशियों की बातें कर रहा होता है । वहीँ दूसरी तरफ चुटकी भी रसोई में अपनी ख़ुशियों का जश्न मना रही होती है।

चुटकी “मज़ा आया ! खाना खाया ! मज़ा आया ! खाना खाया !”

चुटकी यह बोलते हुए सारी रसोई में घूम कर खाना खा ही रही होती है, तभी मम्मी रसोई में आती हैं और चुटकी को रसोई में घूमता हुआ देखकर बहुत गुस्सा हो गई | वह उसे घर से बाहर निकालने के लिए रात को रसोई में चूहे दान लगा दे ।चुटकी जब रात को रसोई में खाना खाने के लिए आती है, तो अंधेरे की वजह से उसे चूहे दान दिखाई नहीं देती और वह उसके अंदर फँस गई |
चुटकी रोने लग जाती है और  मुझे बाहर निकालो ! मैं यहाँ फँस गई हूँ। मुझे बचाओ ।
इसी तरह चुटकी पूरी रात चूहेदानी में फंसी रह गई ।

अगले दिन सुबह मम्मी चूहेदानी उठाकर चुटकी को घर से बाहर फेंक देती हैं। चुटकी के जाते ही राहुल के घर में आयी बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। एक दिन तो उसके पापा के काम में भी बहुत घाटा हो जाता है।
“मम्मी  बोली आचनक से यह क्या हो रहा है ? अचानक सबकुछ इतना कैसे बदल गया ? अभी तक तो सब बहुत अच्छा चल रहा था।तभी पापा बोलते है “ भगवान ने हमपर यह कृपया थोड़े समय के लिए की थी।”

राहुल यहां सुनकर बोला “ पापा, क्या अब मेरी साइकिल भी नहीं आएगी ?”  बेटा ! तुम्हारी साइकिल हम अगली बार पक्का लेकर आयेंगे।

पापा की बात सुनकर राहुल दुखी हो जाता है। वह उदास मन के साथ घर से बाहर निकल जाता है और घर का दरवाज़ा खुला छोड़ जाता है, जिसकी वजह से चुटकी एक बार फिर उनके घर के अंदर आ जाती है ।

चुटकी बहुत खुश होती है “वापस आ गई जी, मैं तो वापस आ गई ! अब में जमकर स्वादिष्ट खाना खाउंगी ।”

चुटकी सीधा रसोई में चली जाती है और खाना खाने लगाती है । कुछ देर बाद वहाँ मम्मी भी आ जाती हैं और चुटकी को खाना खाते हुए देख लेती हैं ।

मम्मी गुस्से में बोलती है “एक तो पहले ही घर में इतनी दिक्कत चल रही है, ऊपर से यह चुहिया मुझे और परेशान कर रही है |”

मम्मी चुटकी को वहाँ से भगा देती हैं । चुटकी भाग कर दोबारा राहुल के कमरे में जाकर छुप जाती है । ऐसे ही बहुत दिन बीत जाते हैं और उनके घर की बरकत वापस आने लगती है। उनका काम भी दोबारा अच्छे से चलने लगता है। एक रात चुटकी जैसे ही घर में घूमने निकलती है तो वह चूहेदानी में फँस जाती है । “ यह इंसान आखिर चाहते क्या हैं ? एक बेचारी चुहिया को शांति से खाना क्यों नहीं खाने देते हैं ? मैं कौन सा चोरी कर रही थी । बस खाना ही तो खा रही थी।”

चुटकी यह सब बोल ही रही होती है की तभी वहाँ पापा आ जाते हैं और चुटकी को चूहेदानी में फँसा देख उसे उठा कर घर से बाहर छोड़ आते हैं।

पापा “ यह चुहिया भी कितनी ज़िद्दी है, बार-बार वापस आ जाती है ।”


पापा चुटकी को बाहर छोड़ आते हैं और अगले ही दिन उनके काम में फिर घाटा हो जाता है । किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा होता है, की यह सब अचानक कैसे और क्यों हो रहा है । चुटकी घर आती है तो अचानक बरकत होती है और जब वह लोग उसे घर से बाहर निकाल देते हैं तो फिर कोई नुकसान हो ही जाता है । एक दिन मम्मी चुटकी के घर आने और उसके जाने पर घर की स्थिति पर ध्यान देती हैं। “यह सफ़ेद ज़िद्दी चुहिया ! यह जब भी घर में आती है तो हमारे घर में बरकत आती है और जैसे ही यह घर से बाहर जाती है। उसी के साथ घर की बरकत भी चली जाती है।”
कहीं यह कोई चमत्कारी चुहिया तो नहीं ? अगली बार वह घर में आएगी तो मैं उसे कहीं नहीं जाने दूंगी।

राहुल की मम्मी चुटकी का बहुत इंतज़ार करती हैं, लेकिन चुटकी दोबारा उस घर में वापस नहीं आती है और वह लोग उसका इंतज़ार करते हुए पछताते रह जाते हैं।

शिक्षा :- हमें कुछ चीज़ो की अहमियत तब पता चलती हैं, जब हम उन्हें खो देते हैं।


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