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Showing posts from February, 2019

बुद्धिमान साँप

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किसी जंगल में साँपो का एक बहुत बड़ा झुंड रहता था। सभी सांप एक बड़े से बिल में साथ रहते थे। वे हमेशा हर मुसीबत में एक दूसरे का साथ देते थे। सबकुछ अच्छा चल रहा था कि एक दिन, साँपो का राजा सभी साँपों को अपने पास बुलाता है। और मुझे एक बहुत ज़रूरी ऐलान करना है  मैंने सुना है की जंगल में एक नेवला आया है जो बहुत ही बड़ा और खतरनाक है। उसने पहले भी बहुत साँपो को मारा है, जिसकी वजह से जंगल के सभी साँपो के बीच उसके नाम की दहशत फैल हुए है ।

राजा की बात सुनकर सभी साँप डर के मारे कांपने लगते हैं और राजा से बोलते हैं -एक साँप बोला  महाराज, अब हम सब क्या करेंगे ? इतने मे दूसरा साँप बोला अगर वह नेवला यहाँ आ गया तो ?

साँपो का राजा कहता है दोस्तों, तुम चिंता मत करो ! घबराने की कोई बात नहीं है। मेरे पास इस मुसीबत का एक उपाय है। इतने में  चिंटू, चिंकी चुनु वहा आ जाते है चिल्लाते हुए !

साँपो का राजा उनसे पूछता है ! चिंटू, चिंकी, चुनु - हम सभी बहुत बड़ी मुसीबत में हैं। हमें तुम्हारी मदद की आवश्यकता है।
चिंटू कहता है  हाँ, राजा जी ! बोलिए ! हम आपकी क्या मदद कर सकते हैं ?

राजा तुम सभी जानते हो ना नेवले को ? वह हमारे इस…

शॉल का बंटवारा

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अमरोहा नामक गाँव में दो भाई राजेश और बजरंग अपने पिता के साथ रहते थे । एक काम करता था और दूसरा पिता की  देखभाल करता था । परिवार का जीवन अच्छे से चल रहा था, की एक दिन उनके पिता की तबीयत बहुत ख़राब हो गई।
राजेश और बजरंग के पिताजी दोनों से कहते है, मेरे बच्चों ! तुम दोनों बहुत समझदार हो । मुझे पूरा भरोसा है, की मेरी मृत्यु के बाद तुम दोनों यह घर और कामकाज अच्छे से संभाल लोगे, तभी राजेश अपने पिता से कहता है, हम आपको कुछ नहीं होने देंगे तभी बजरंग कहता है, हाँ पिताजी भैया सही कह रहे है आपको कुछ नहीं होगा आप जल्द ही ठीक हो जायेंगे | 

दोनों भाई अपने पिता से बात कर रहे होते हैं की तभी उनके पिता एक लंबी सांस लेते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है ।
अपने पिता को ऐसे देखकर दोनों भाई हैरान रह जाते है व बहुत रोते है।पिता की मृत्यु के बाद दिन बीतते जाते हैं और धीरे-धीरे दोनों भाइयों की छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई होने लगती है ।

बजरंग राजेश से कहता है यह धन मेरा है । पिताजी यह सब मेरे लिये छोड़कर गए हैं, राजेश गुस्से में  कहता है, नहीं यह सब मेरा है । तुम तो कभी सही से काम पर भी नहीं गए, फिर बजरंग कहता है मैं घर मे…

जंगल गैंग

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किसी जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। वह सभी हमेशा खूब मस्ती किया करते थे | और हर मुसीबत में एक दूसरे के साथ खड़े रहते थे। एक दिन, कुछ जानवर साथ बैठकर बातें कर रहे होते है कि तभी गप्पू बंदर भागता हुआ उनके पास आता है।
और बोला सुनो सब लोग - “एक मुसीबत आ गई कुछ इंसान हमारे जंगल के बाहर खड़े हैं। वह इस पूरे जंगल को काट कर इसकी जगह एक बड़ा शॉपिंग मॉल और लोगो के रहने के लिए घर बनाने वाले हैं।”
शेरख़ा कि बात पर सभी उसकी हां में हां मिलाते है और जंगल की सीमा की तरफ बढ़ते हैं। वहां उन्हें कुछ लोग बड़ी, बड़ी मशीनों के साथ खड़े नज़र आते है। उन सभी इंसानों को देख कर शेरख़ा को बहुत गुस्सा आता है, और वो दहाड़ने लगता है  शेरख़ा शेर  इन्हें भागने कि तरकीब निकलता है वो गप्पू को कहता है मै  दहाड़ लगाऊंगा और तुम पेड़ो पर झूलते हुए सभी पर पत्थर मरोगे और फिर बल्लू और मैं भागते हुए उनके पास जायेंगे।
वह सभी वैसे ही करते है जैसा शेरख़ा उन्हें करने के लिए बोलता है। थोड़ी ही देर में सभी इंसान वहाँ से भाग जाते हैं। उन्हें वापस जाते देखकर सभी जानवर बहुत खुश हो जाते हैं।
सभी जानवर खुश हो जाते है और वापस अपने घर आकर आराम से बैठ जाते …

जादुई चक्की

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वीरपुर नाम के गाँव में अमन और रमन नाम के दो भाई अपने परिवार के साथ रहते थे। अमन बहुत अमीर था , वहीं रमन के पास खाने के भी पैसे नहीं थे। जब कभी रमन अपने भाई अमन के पास सहायता मांगने के लिए जाता , अमन उसे धुत्कार देता था। एक दिन रमन जंगल में लकड़ियां लेने गया। वापिस आते हुए उसने देखा की भेड़िया एक सूंदर हिरन का शिकार करने वाला है। रमन भेड़िये को भगाकर हिरन की जान बचा लेता है , तभी हिरन एक सुंदर लड़की का रूप लेकर उसके सामने आ जाती है, तभी रमन कहता है - आप कौन हो ? और आपने अचानक अपना रूप कैसे बदल लिया ?

तभी वो लड़की बोलती है - मैं मिट्टी की देवी मीतेश्वरी हूँ। एक पेड़ ने मुझे श्राप दिया था कि मैं अपना असली रूप तभी धारण कर पाऊँगी जब कोई ईमानदार व्यक्ति मुझे मरने से बचाएगा , तुमने मुझे श्राप से मुक्त किया है। बोलो तुम्हें क्या चाहिए ?

लेकिन रमन उस देवी से कुछ नहीं मांगता, तभी वो देवी बोलती है - मैं तुम्हारी ईमानदारी से खुश हूँ, इसलिए मैं तुम्हे एक चक्की देना चाहती हूँ।  मीतेश्वरी देवी रमन को चक्की देते हुए बोलती हैं,-  यह कोई साधारण चक्की नहीं है। यह एक इच्छापूर्ति चक्की है, तुम इस चक्की से कोई भी …

जादुई चुहिया Part 1

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पलवल शहर में चुटकी नाम की एक चुहिया रहती थी । चुटकी किस्मत की बहुत धनी थी। चुटकी जहाँ भी जाती थी, वहाँ कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होती थी । एक दिन, चुटकी घूमते हुए राहुल नाम के एक बच्चे के घर में गयी।

चुटकी  अरे वाह ! लगता है आज तो बहुत अच्छा खाना मिलेगा। मैं पेट भर के खाऊंगी।”

यह बोलते हुए जैसे ही चुटकी घर के अंदर की तरफ बढ़ती हैं, तभी उसके सामने एक बड़ा सा पैर आ जाता है।
चुटकी पैर से बचते हुए “हे भगवान ! आज तो मैं बाल-बाल बच गयी। यह इंसान नीचे देखकर नहीं चल सकते क्या ? अभी मुझे कुछ हो जाता तो ?!”

इसके बाद चुटकी थोड़ा और आगे चलती है तो उसे रसोई दिखाई देती है । वह भागकर रसोई में गई |

चुटकी खाना देखकर बहुत खुश होती है और बोली “मज़ेदार खाना ! स्वादिष्ट खाना ! आज तो जमकर खाउंगी।”

चुटकी रसोई से अलग-अलग चीज़े खाने लगती है । उसे रसोई में खाना खाते हुए राहुल की मम्मी देख लेती हैं ।

मम्मी चुटकी पर डंडा फेंकते है ! “भाग यहाँ से ! ना जाने यह चूहे कहाँ से आ गया  । मैं तो दुखी हो गई हूँ इनसे !”

मम्मी के भगाने के बाद चुटकी राहुल के कमरे में चली गई ! और वहीँ रहने लग गई  । धीरे-धीरे राहुल के घर में बरकत होने लगती …