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Showing posts from September, 2018

नैतिक कहानियाँ - बप्पा का जादुई मोती

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डेरावाल नगर में आशीष नाम का एक डरपोक बच्चा रहता था। वह रोज़ाना भगवान गणेश की पूजा करता था। आशीष किसी भी काम को करने से पहले ही हार मान लेता था जिसके कारण स्कूल के सभी बच्चे उसे छेड़ते और उसका मज़ाक बनाते थे। एक दिन आशीष ने अपने स्कूल में होने वाली रेस प्रतियोगिता में भाग लिया । तभी उसके दोस्त सार्थक ने उससे कहा, “तुम इसमें भाग ना लो तो अच्छा होगा, ये कोई बच्चों की प्रतियोगिता नहीं है। वैसे भी मुझे तुम जैसे डरपोक को हराने में कुछ मज़ा नहीं आएगा।”
आशीष ने अपने दोस्त सार्थक की बात सुनकर प्रतियोगिता से अपना नाम वापिस ले लिया और घर पहुँचकर सोचने लगा, “कल से मैं स्कूल ही नहीं जाऊँगा। इससे कोई मेरा मज़ाक भी नहीं बनाएगा और ना मुझे कोई छेड़ेगा।” यह सोचकर आशीष सो गया और सोते हुए उसने सपने में भगवान गणेश को देखा । वह देखता है कि भगवान गणेश उसे एक जादुई मोती देते हैं। 

जादुई मोती देकर गणेश जी गायब हो गए और आशीष ने उठकर देखा कि वहां एक मोती पड़ा हुआ है जो उसे सपने में गणेश जी ने दिया था। ये देखकर आशीष बहुत खुश हुआ। उसने मोती को अपनी जेब में रखा और शाम को पार्क में अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए गया, तभी…

भुक्खड़ चूहा

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कुछ समय पहले की बात हैं। एक गाँव में चूहों का एक परिवार रहता था। उन चूहों में से एक चूहा ऐसा भी था जिसे खाने की बहुत बुरी आदत थी, वह पूरा समय बस खाता और सोता रहता था।वह इतना खाता था लेकिन फिर भी उसे संतुष्टि नहीं होती थी।उसकी इस आदत से उसके परिवार वाले भी परेशान रहते थे। एक दिन सुबह कूकू चूहे के दोस्त का जन्मदिन था । और उसका दोस्त उसे जन्मदिन पर न्यौता देने आया ।  
अब अगले दिन कूकू चूहा पार्टी में गया, और वहाँ जाकर भी वह अपनी भूख पर काबू नहीं कर पाया। और सारा केक  मेहमानों के आने से पहले ही खा गया। यह देखकर सब कूकू चूहे पर बहुत गुस्सा हो गए , और उसे पार्टी से जाने को कहने लगे। अब निराश होकर कूकू चूहा वापस अपने घर को निकल गया, मगर इन सब के बाद भी कूकू चूहे के खाने की आदत में कोई परिवर्तन नहीं आया। 
अगले दिन कूकू चूहे का एक दोस्त उसे खेतों में बुलाने के लिए आया । कूकू चूहा और पिंटू चूहा अपने बाकि सभी दोस्तों के साथ खेत में चले गए । खेत में जाकर वह फ़सलों पर टूट पड़ा ।  सभी ने जल्दी-जल्दी खाना खा लिया, लेकिन भुक्खड़ चूहे का पेट नहीं भरा । यह देखकर उसका दोस्त पिंटू चूहा उससे बोला, “अरे ! ज…

बातूनी कौवा

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किसी जंगल में कालिया नाम का एक कौवा रहता था। कालिया बहुत बातूनी था। वो हमेशा किसी ना किसी बात पर बोलता रहता, “अब मुझे जंगल की सारी समझ तो है नहीं, लेकिन समझ होने या ना होने से क्या फर्क पड़ता है? क्योंकि जिनको समझ है... उनको सही समझ है... इसकी किसको समझ है?” उसकी इस आदत से जंगल के जानवर और पक्षी बहुत तंग रहते थे। जैसे ही वो बोलना शुरू करता था सब अपने कान पकड़ लेते थे। एक दिन कालिया की इतना ज़्यादा बोलने की आदत से तंग आकर काजल कोयल ने चांदनी कबूतर से कहा, “काजल इस कालिया को चुप कराने के लिए हमें कुछ करना चाहिए”|  
इसपर काजल कुछ देर सोचकर बोली, “तुम मेरे साथ चलो”| चांदनी और काजल उड़ती हुई जंगल के राजा शेर की गुफा पर पहुंची। उन्होंने देखा कि शेर अपनी गुफा के बाहर सो रहा है। काजल चुपके से गुफा के अंदर चली गई| कुछ देर बाद वो एक शाही चिठ्ठी और कलम के साथ बाहर आई और चांदनी को वो चिठ्ठी दिखाते हुए बोली, “ये देखो... शाही चिठ्ठी| इसके इस्तेमाल से हम उस बातूनी कालिये को हमेशा के लिए चुप करा सकते हैं”|


काजल और चांदनी वहाँ से उड़े और कालिया के घोंसले से थोड़ी दूर ज़मीन पर आकर रुक गए, काजल ने कलम से उस श…

जादुई अंगूठी

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एक समय की बात है, दो बहनें जिनका नाम गुड्डू और चुटकी था, नदी के किनारे घूम रही थी दोनों जब घूमते - घूमते थक गयी तो वही एक पेड़ के निचे बैठ गयी। गुड्डू को किताबे पढ़ने का बहुत शौक था इसलिए वो वहा बैठकर अपनी किताब पढ़ने लगी और चुटकी खाली बैठी-बैठी बोर होने लगी, तो उसने सोचा की क्यों न फूलों की माला बनाई जाये और यह सोचकर चुटकी अपनी माला के लिए फूल चुनने चली गयी , तभी उसे वहा एक खरगोश दिखाई दिया , जिसे देखकर चुटकी सोचती हैं, “वाह ! कितना सुंदर  खरगोश हैं और इसके फर भी कितने सफेद और चमकदार हैं।” 
यह सोचते ही चुटकी उस खरगोश को पकड़ने के लिए उसके पीछे - पीछे भागने लगी। थोड़ी दूर जाके वो खरगोश एक बड़े गढढे में चला गया चुटकी भी वहां पहुँच गयी और जैसे ही चुटकी ने उसमे झाँककर देखा तो उसका पैर फिसल गया और वो फिसलकर गढढे में गिर गयी । वो उस गढढे में नीचे गिरती चली गयी और एक सूखी पातियो के ढेर पर जा गिरी जब वो उठके वहा चारो तरफ देखने लगी तो उसे वहा उन खरगोशो के बिल दिखाई दिए, चारो तरफ सुंदर - सुंदर  खरगोश देखकर वो बहुत खुश हुई और सबकुछ भूलकर उन खरगोशो के पीछे भागने लगी ।

कुछ समय बीत जाने के बाद अचानक चु…

नैतिक कहानियाँ - जादुई जूते

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बहुत समय पहले की बात हैं किसी गाँव में एक छोटी सी लड़की रहती थी जिसका नाम पिंकी था। वह बहुत ही बुद्धिमान और मेहनती लड़की थी। वह हमेशा अपने मम्मी पापा की उनके काम में मदद करती थी। 
एक दिन की बात है, पिंकी घर में अकेली थी, तभी एक साधू आते है, उन्हें देखकर पिंकी पूछती है, “आप कौन हो?” साधू कहते है, “बेटी! मै एक साधू हूँ, और काफी दिनों से भूखा हूँ , क्या कुछ खाने को मिलेगा ?” “जी जरूर बाबा” यह कहकर पिंकी साधू के लिए खाना ले कर आती है। खाना खा कर साधू बहुत खुश होते है और कहते है, “मै तुम्हारी सेवा से बहुत खुश हूँ, इसलिए मै तुम्हे एक उपहार देना चाहता हूँ।”
साधू अपना एक हाथ आगे बढ़ाते है और तेज़ रोशनी के साथ उनके हाथ में एक जोड़ी जूते आ जाते है। जूतों को पिंकी की तरफ बढ़ाते हुए वह कहते है, “ये लो बेटी तुम्हारा उपहार।” पिंकी जूतों को ले लेती है और कहती है, “जूते!” यह देखकर साधू पिंकी से कहते है, “बेटी! ये कोई साधारण जूते नहीं हैं, ये जादुई जूते हैं। इन्हें पहनकर तुम जितने कदम कदम चलोगी तुम्हे उतने ही सोने के सिक्के मिलेगे।”

यह सुनकर पिंकी ख़ुशी से बोलती है, “वाह , ये तो बहुत अच्छा है।” तभी साधू कहते है,…

जादुई पतीला

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किसी गाँव में एक गरीब मज़दूर रहता था। मज़दूर एक जमींदार के यहाँ खेती का काम करता था, जिसका उसे बहुत कम मेहनताना मिलता था। ऐसी ही गरीबी में उसका जीवन बीत रहा था। एक दिन वो खेत में बीज़ बोने के लिए फावड़े से खुदाई कर रहा था। तभी उसे फावड़े के किसी धातु से टकराने की आवाज़ सुनाई दी। यह सुनकर मज़दूर बोला, “ ये आवाज़ कैसी है?”
उसने ज़मीन की तरफ देखा तो उसे पीतल का टुकड़ा ज़मीन में गड़ा दिखाई दिया।और वो पीतल के टुकड़े के आसपास ज़ोर-ज़ोर से फावड़ा मारने लगा। बहुत देर तक उस छोटे से टुकड़े के आसपास खुदाई करने पर भी उसे उस टुकड़े का अंत नहीं मिला। वो जितनी ज़्यादा खुदाई करता जा रहा था, वो टुकड़ा उतना ही बड़ा होता जा रहा था। अंत में जब उसने ज़मीन का एक बहुत बड़ा हिस्सा खोद डाला, तब उसे उस टुकड़े का अंत मिला। ये कोई कीमती चीज़ नहीं बल्कि खाना बनाने का एक बहुत बड़ा पतीला था, जिसमें एक साथ सौ लोगों का खाना बनाया जा सकता था। मज़दूर ने ये देखा तो वो बहुत निराश हुआ।

उसने अपना फावड़ा पतीले में फेंका और थोड़ी दूर पेड़ की छाया में बैठ गया।और वो वहीं पेड़ के नीचे सो गया। कुछ देर बाद जब वो जागा तो अपना फावड़ा लेने के लिए वो उस पतीले के प…

रोचक कहानियाँ - सलीम और भिखारी

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किसी गांव में सलीम नाम का एक मछुआरा रहता था। सलीम रोज सुबह मछली पकड़ने के लिए समुन्दर के किनारे जाता था और शाम को उन मछलियों को बाजार में बेचकर वो अपना घर चलाता था। एक दिन वो मछलियाँ बाजार में बेचकर अपने घर लौट रहा था तभी उसे रास्ते में एक भिखारी मिला। भिखारी ने उससे कहा, “साहब कुछ पैसे दे दो। मैंने बहुत दिनों से कुछ नहीं खाया।”
सलीम बहुत बड़े दिल का था। वो किसी का दुःख नहीं देख पाता था। इसलिए उसने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और उसे दे दिए। अगले दिन जब सलीम बाजार से लौट रहा था, तब वो भिखारी उसे फिर मिला। सलीम ने उसे फिर से कुछ पैसे दे दिए। ऐसे ही बहुत दिनों तक चलता रहा।

रोज शाम को भिखारी सलीम को मिलता और सलीम उसे कुछ पैसे दे देता। एक दिन जब सलीम मछलियाँ बेचकर बाजार से लौट रहा था तो वो भिखारी उसे फिर मिला। हमेशा की तरह सलीम ने उसे पैसे दे दिए और वो आगे चल दिया, कुछ कदम चलने पर वो सोचने लगा, “मैं रोज इस भिखारी को खाने के लिए पैसे देता हूँ लेकिन इससे इसकी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। मुझे इसे कुछ और देना चाहिए।
ये सोचकर वो वापिस उस भिखारी के पास गया और बोला, ”सुनो भाई जान, तुम कल समुन्दर के …