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Showing posts from August, 2018

पंचतंत्र की कहानी - जादुई बाज

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बहुत पुरानी बात है किसी गाँव में एक बिल्लू नाम का मछुवारा रहता था। उसकी पत्नी का कुछ साल पहले देहांत हो गया था। और उसके बच्चे भी नहीं थे इसलिए वो बिल्कुल अकेला था। वह गाँव के पास ही एक नदी से मछलियां पकड़कर लाता और उनको बेचकर अपना पेट भरता था। समय के साथ वो बूढ़ा हो गया था। जिसके कारण अब वो मछलियां नहीं पकड़ पाता था। मछुवारा दिन पर दिन काफी  कमजोर होता जा रहा था। और उसके पास आय का कोई दूसरा साधन भी नहीं था। जिससे वो अपने भोजन का प्रबंध कर सके। एक दिन मछुवारे को बहुत भूख लगी| कुछ सोचकर वो अचानक नदी की तरफ चल दिया। कुछ दूर जाने पर उसने देखा एक बाज घायल अवस्था में सड़क के किनारे पड़ा दर्द से तड़प रहा था। देखने में वो कोई जादुई बाज जैसा लग रहा था, उसके पंख सोने के थे।
उसके पंजो से खून निकल रहा था। मछुवारे से उसकी ये हालत देखी नहीं गई| वो उसे उठाकर अपने घर ले गया।  घर ले जाकर मछुवारा ने बाज की मरहम-पट्टी कर दी । बाज उससे खुश होकर कहता है, "तुम बहुत ही दयावान हो दोस्त, वरना कितने लोग उस रास्ते से गुज़रे थे, पर किसी ने भी मुझे उठाकर नहीं देखा केवल तुम ही एक ऐसे थे जिसने मुझे उठाया और मेरी मदद क…

ताकत और चतुराई

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बहुत समय पहले एक कौवा और उसकी पत्नी कहीं दूर से आए और एक पेड़ पर घोंसला बनाकर रहने लगे। दोनों सुबह दाना चुगने निकल जाते और शाम होने पर वहीं लौट आते। कुछ दिनों तक ऐसा चलता रहा। फिर एक दिन कौवे की पत्नी ने कुछ अंडे दिए। अंडो को देख दोनों बहुत खुश थे।
कौवा: कुछ दिनों में हमारे घोंसले में छोटे-छोटे बच्चे होंगे!
एक दिन जब वो दोनों दाना चुगकर लौटे तो उन्होने देखा कि कोई उनके सब अंडे खा गया है। ये देखकर दोनों बहुत दुखी हुए।
कौवा: हे भगवान! कोई हमारे सब अंडे खा गया!
उन्होने आसपास रहने वाले चिड़िया और बाकी पक्षियों से भी पूछा। पर किसी को नहीं पता था कि उनके अंडे किसने खाये। कुछ दिनों तक दोनों बहुत दुखी रहे। फिर कुछ समय बाद कौवे पत्नी ने कुछ और अंडे दिए। इस बार दोनों ने तय किया कि वो अंडों का पूरा ध्यान रखेंगे।
` कौवा: आज से हम दोनों में से एक दाना चुगने जाएगा और दूसरा अंडों के पास रहेगा।
कौवा और उसकी पत्नी की तरकीब सफल रही। कुछ दिनों तक उनके अंडों को कुछ नहीं हुआ। फिर एक दिन जब कौवे की पत्नी घोंसले में अंडों के साथ अकेली थी तो उसने देखा कि एक काला साँप रेंगता हुआ उसके घोंसले की तरफ आ रहा है। का…

जादूई बूटी और राक्षस

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बहुत समय पहले किसी जंगल के पास एक छोटा सा गांव था। उस गांव में माखन सिंह अपने बेटे टिल्लू के साथ रहता था। एक बार वो शहद के लालच में मधुमख्खी के छत्ते को तोड़ने की गलती कर बैठा। जिसके कारण मधुमखियों ने उसकी आँखों में डंक मार-मार कर उसे अँधा कर दिया था। माखन सिंह के बेटे टिल्लू को अपने पिताजी की बहुत चिंता रहती थी।
एक दिन निराश होकर वो कहीं जा रहा था। तभी उसे गंगू मौसी मिली। वो उसका निराश चेहरा देखकर बोली, ”टिल्लू तुम इतने दुखी क्यों हो ?” इसपर टिल्लू बोला, “मौसी मैं पिताजी को लेकर बहुत दुखी हूँ. वो कुछ देख नहीं पाते इसलिए बहुत दुखी रहते है उन्हें देखकर मुझे बहुत दुःख होता है।” इस पर गंगू मौसी ने उसे सलाह दी, ”तुम नट्टू काका से मिलो, उनके पास तुम्हारी परेशानी का कोई न कोई हल ज़रूर होगा।

टिल्लू को गंगू मौसी का सुझाव बहुत अच्छा लगा। वो अगले ही दिन अपने पिताजी को लेकर नट्टू काका के पास गया। नट्टू काका ने माखन सिंह की आँखों में ध्यान से देखा और बोले, ”मैं तुम्हारे पिताजी की आंखें ठीक कर सकता हूँ, लेकिन उसके लिए मुझे कुछ जादुई-बूटियां चाहिए होंगी।” इसपर टिल्लू बोला,”कौन सी जड़ी -बूटी? आप मुझे बता…

पंचतंत्र की कहानी - नकली तोता

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एक समय की बात हैं जंगल में तोतों का एक झुंड रहता था। झुंड के सभी तोतों को बहुत ज़्यादा और बेमतलब बोलने की बहुत बुरी आदत थी। सभी हर समय ज़ोर-ज़ोर से और बेमतलब बोला करते थे। उन्ही में से एक मिठ्ठू नाम का तोता भी था। जो बहुत कम बोलता था। सभी तोते उसे नकली तोता कहकर चिढ़ाते थे। एक दिन दो तोते आपस में बात कर रहे थे इस पर भी मिठ्ठू तोता कुछ नहीं बोला। ये देखकर तोतों के मुखिया ने कहा, “तोतों का तो काम ही होता हैं बोलना। ये मिठ्ठू इतना कम बोलता है, इसलिए ये असली तोता नहीं हो सकता। ये नकली तोता है!” पर मिठ्ठू किसी की बात का बुरा नहीं मानता था। और ना ही कभी किसी की बराबरी करने की कोशिश करता था।

एक दिन मुखिया की पत्नी का हार चोरी हो गया। मुखिया की पत्नी ने मुखिया से रोते हुए कहा, “किसी ने मेरा हार चुरा लिया है। लेकिन मैंने उस चोर को भागते हुए देखा है। वो चोर इसी झुंड में से कोई हैं।” ये सुनकर मुखिया ने झुंड के सभी तोतों को जमा होने के लिए कहा। जब सभी तोते जमा हो गये तो मुखिया बोला, “किसी ने मेरी पत्नी का हार चुरा लिया है। लेकिन मेरी पत्नी ने उस चोर को भागते हुए देख लिया था। उसने मुझे बताया कि उस चोर …

पंचतंत्र की कहानी - मुर्ख शेर

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बहुत समय पहले किसी जंगल में शेरसिंह नाम का एक शेर रहता था | शेरसिंह उस जंगल का राजा था | वह बहुत ताक़तवर होने के साथ-साथ बहुत गुस्से वाला भी था| कभी-कभी वो इतना गुस्सा हो जाता था कि गुस्से में बहुत गलत फैसले ले लेता था, जिसका फल जंगल के दूसरे जानवरों को भुगतना पड़ता था|

एक दिन वो अपने साथी बबलू चीते के साथ नदी के किनारे सैर कर रहा था | तभी नदी को देखकर उसने बबलू से पूछा, “बबलू, ये नदी हमारे जंगल से निकलकर कहाँ जाती है?” इस पर बबलू बोला, “महाराज, ये नदी हमारे जंगल से निकलकर पूर्व दिशा की तरफ दूसरे जंगल में जाती है, और फिर दूसरे जंगल के जानवर भी हमारी ही तरह इस नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं” | ये सुनते ही शेरसिंह गुस्सा हो गया और चिल्लाकर बोला, “ये नदी हमारी है | और कोई हमारी नदी का पानी इस्तेमाल नहीं कर सकता | तुम आज ही जंगल की सीमा पर दीवार बनवा दो! हम अपना पानी किसी को नहीं देंगे |


बबलू जानता था ये गलत है, पर शेरसिंह के गुस्से के आगे वो कुछ नहीं बोल सका और उसने जंगल की सीमा पर दीवार बनवा दी  | दीवार देखकर शेरसिंह बहुत खुश हुआ | पर उसकी मूर्खता की वजह से नदी का पानी जंगल में जमा होने ल…