29 March 2019

भूतिया हवेली

बहुत समय पहले जयपुर के मंडोर नामक गाँव में एक बहुत बड़ी हवेली थी। उस हवेली में झिंगुरा नाम का एक भूत रहता था, इसलिए गाँव के लोग हवेली के पास जाने से भी डरते थे। उसी गाँव में साहिल, अमित, कोमल और अंश नाम के चार शैतान बच्चे रहते थे, जो बहुत अच्छे दोस्त भी थे। एक दिन वह चारों हवेली के पास खेल रहे थे तभी खेलते-खेलते उनकी बॉल हवेली के अंदर चली गई।

“अरे दोस्तों, यह बॉल तो हवेली के अंदर चली गई, अब हमें नई बॉल खरीदनी पड़ेगी।” साहिल के ऐसा कहने पर अमित ने कहा, “हाँ चलो, जल्दी से बॉल लेकर आते हैं, क्योंकि थोड़ी ही देर में अंधेरा होने वाला है।” तभी कोमल ने कहा, “रुको दोस्तों, बॉल खरीदने की क्या जरुरत है? हम हवेली के अंदर जाकर बॉल ले आते हैं।”

लेकिन अमित को यह बात ठीक नहीं लगी. उसने कहा, “यह तुम क्या बोल रहे हो? क्या तुम जानते नहीं कि इस हवेली में भूत रहता है।” इस पर अंश ने कहा, “हाँ भाई  हम जानते हैं हवेली में भूत रहता है, पर भला वो हमे क्यों कुछ कहेगा? हम तो बस अपनी बॉल ही लेने जा रहे हैं!”

इस तरह सभी ने अमित की बात काट दी, और सभी हवेली में जाने के लिए तैयार हो गए. यह देखकर अमित ने कहा, “ठीक है, अगर हवेली में जाना ही है तो हम सब एकसाथ जाएंगे”.

जैसे ही वह सभी हवेली के अंदर पहुंचे अचानक हवेली का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया, और एक आवाज़ आई, “तुम्हारा स्वागत है।” यह सुनकर सभी बच्चे डर गए। कोमल ने डरते हुए कहा, “कौन है?|” इसपर एक बार फिर वही आवाज़ सुनाई दी, “नाम है मेरा झिंगुरा, चाहता हूँ में सबका बुरा।”

यह सुनते ही सारे बच्चे बहुत डर गए। साहिल ने घबराते हुए कहा, “झि... झि... झिंगुरा! अरे भागो यहाँ से! यह तो झिंगुरा भूत है!”

यह सुनकर भूत ने हँसते हुए कहा “नहीं दूँगा मैं तुम्हें यहाँ से जाने, क्योंकि तीन सवालों के जवाब हैं मुझे पाने” “लेकिन तुम सामने तो आओ”. अंश के ऐसा कहने पर भूत ने कहा, “दिखने में हूँ मैं बहुत डरावना, नहीं कर पाओगे तुम छोटे बच्चे, मेरा सामना”




“छोटा बच्चा जान के हमको ना समझना, आता है हमें बड़े से बड़े भूतों की वाट लगाना!” कोमल के ऐसे मज़ाक उड़ाने पर झिंगुरा भूत उनके सामने आया. झिंगुरा बहुत विशाल और डरावना दिखता था। उसे देखकर सभी बच्चे डर गए. झिंगुरा ने उनसे कहा, “तीन सवालों का जवाब है मुझे पाना, उसके बाद चाहे तुम सब यहाँ से चले जाना!”

फिर भूत ने उनसे अपना सवाल पूछा, “दो अक्षर का मेरा नाम, मेरे बिना ना चलता काम। रंगहीन हूँ... स्वादहीन हूँ, हरदम आता हूँ मैं काम”

सवालों सुनते ही साहिल ने तुरंत कहा, “इसका जवाब है, पंखा!”

खुश होकर भूत ने दूसरा सवाल किया, “एक सतह रहने की इच्छा लेकर मैं जिंदा रहता हूँ। नदी-झील और ताल-तलैया, झरनों में बैठा रहता हूँ” “इतना आसान सवाल भला कौन पूछता है? इसका जवाब है हंस”.अमित के ऐसा कहने भूत ने तीसरा सवाल पूछा, “क्या है वह, निगले उसको तो जिंदा रह पाएँ? लेकिन वह हमे निगल ले, तो हम मर जाएं।”

इसपर कोमल ने कुछ देर सोचकर कहा, “इसका जवाब है नदी।” कोमल का जवाब सुनकर झिंगुरा ने गुस्से से कहा “बदल दे मौसम, कर दे ठंड। हो जाओ तैयार, तुम पाने को दंड!”

ऐसा कहकर झिंगुरा ने एक मंत्र बोला, “मेरे जादू तू उड़ के जा। दिया है जिसने भी गलत जवाब, उसे पत्थर की मूरत बना!” झिंगुरा के ऐसा कहते ही साहिल, अमित और कोमल पत्थर की मूरत बन गए। अंश ये सब देखकर बहुत दुखी हुआ। उसने झिंगुरा से कहा, “झिंगुरा जी, ये तुमने ठीक नहीं किया। तुम्हारे तीनों सवालों के जवाब मैं दूँगा, पर इसके बाद तुम्हें मेरे दोस्तों को वापिस पहले जैसा करना होगा”

अंश का विश्वास देखकर झिंगुरा ने कहा, “ठीक है! पर ध्यान रहे सवाल हैं अनेक, पर जवाब है एक। अगर नहीं दे पाया सही जवाब, तो सज़ा मिलेगी लाजवाब।”

झिंगुरा की बात सुनकर अंश पहले तो बहुत डर गया फिर अचानक उसे भूत की तीनों पहेलियों जवाब समझ आया. उसने झिंगुरा से कहा, “तुम्हारी पहेलियाँ थोड़ी मुश्किल ज़रूर है, पर मुझे सभी पहेलियों का जवाब समझ आ गया है। तुम्हारी तीनों पहेलियों का एक ही जवाब है, और वो है पानी!” अंश के ऐसा कहते ही झिंगुरा इंसानी रूप में बदल गया। और अंश के सभी दोस्त भी वापिस अपने असली रूप में आ गए।

झिंगुरा ने अंश का धन्यवाद करते हुए कहा, “मैं पिछले कई सालों से एक साधु के श्राप के कारण इस हवेली में एक भूत के रूप में कैद था। मेरे मुक्त होने का एक ही रास्ता था, और वो था तीन पहेलियों का जवाब जो आजतक कोई नहीं दे पाया। पर तुमने ये कर दिखाया। मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ।”

इसके बाद सभी बच्चे अपनी बॉल लेकर वहाँ से चले गए. उन्होंने गाँव जाकर सभी को झिंगुरा के श्राप और उसकी मुक्ति के बारे में बताया. पूरा किस्सा सुनकर गाँववालों ने बच्चों की बहादुरी की बहुत प्रशंसा की.

और इस तरह अंश की सूझबूझ से झिंगुरा भूत को साधु के श्राप से मुक्ति मिल गई।

शिक्षा - हमें कभी भी मुश्किल हालातों से घबराना नहीं चाहिए, और हमेशा अपने डर का मज़बूती से सामना करना चाहिए।

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9 March 2019

एलियन मुर्गी

रामपुर गाँव में कुंदन नाम का एक बच्चा रहता था। कुंदन बहुत ही सीधा और नेकदिल बच्चा था। वह हमेशा हर ज़रूरतमंद की मदद करता था, लेकिन आत्मविश्वास की कमी होने के कारण गाँव के दूसरे बच्चे हमेशा उसे बहुत परेशान किया करते थे। वह किसी को कुछ नहीं कहता था।एक दिन कुंदन बाज़ार में घूमने गया।तभी कुंदन कहता है  अरे वाह ! कितना अच्छा मौसम है। क्यों ना पास वाले मैदान में जाकर कुछ देर खेल लिया जाए, बहुत मज़ा आएगा।

कुंदन यह बोलता हुआ मैदान की तरफ बढ़ता है, की तभी उसका पीछा करते हुए कुछ शरारती बच्चे आ जाते हैं, और रास्ते में उसे परेशान करने लगते हैं , सभी बच्चे ज़ोर से हस्ते है और कुंदन का मजाक उड़ने लगते है। कुंदन रोते हुए वापस अपने घर चला जाता है। जैसे ही कुंदन अपने घर पहुँचता है, तो मम्मी उससे पूछती हैं -क्या हुआ बेटा ? तुम रो क्यों रहे हो ?

कुंदन रोते हुए कहता है-माँ, यह बच्चे मुझसे इस तरह बात क्यों करते हैं ? मैं तो इन सबके साथ दोस्ती करना चाहता हूँ, पर यह सब हमेशा मेरा मज़ाक ही उड़ाते रहते हैं।

तभी उसकी माँ उसे समझती है की कोई बात नहीं बेटा ! एक दिन इन सभी बच्चों को अपनी गलती का एहसास जरूर होगा, लेकिन तुम कभी भी किसी के साथ गलत व्यवहार मत करना और सबके साथ अच्छे से रहना। मम्मी की बात सुनकर कुंदन चुप हो जाता है। वह हमेशा सभी को दोस्त बनाने की कोशिश करता रहता है, पर कोई भी बच्चा उसका दोस्त नहीं बनता है ।

कुंदन मन में सोचता है की यह सब मुझसे दोस्ती क्यों नहीं करते हैं ? मैंने तो कभी, किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा, फिर भी यह सब बच्चे मुझसे इतना दूर क्यों रहते हैं ? इसी तरह दिन बीतते जाते हैं। एक बार आधी रात में कुंदन की नींद खुलती है । उसे घर के बाहर कुछ अजीब आवाज़ें सुनाई देती हैं। जिन्हें सुनकर कुंदन अपने घर की खिड़की पर आता है और बाहर झाँकने लगता है। बाहर का नज़ारा देखकर कुंदन बहुत हैरान रह जाता है और बोलता है- यह क्या है ? मुर्गियाँ वो भी स्पेसशिप में !
यह कैसी अजीब दिखने वाली मुर्गियाँ हैं ?

मुर्गियों को देखकर कुंदन थोड़ा घबरा जाता है और खिड़की बंद करके वापस अपने कमरे में चला जाता है, लेकिन उसके बाद रात भर कुंदन को नींद नहीं आती और वह पूरा समय स्पेसशिप वाली मुर्गियों के बारे में ही सोचता रहता है। अगले दिन सुबह कुंदन जल्दी स्कूल चला जाता है और अपनी मम्मी को यह बात नहीं बता पता है ।

कुंदन स्कूल पहुंचकर भी उन एलियन मुर्गियों के बारे में सोचता रहता है। दोपहर में स्कुल से वापस घर जाते समय कुंदन सड़क की जगह पार्क वाले रास्ते से आता है। तभी थोड़ी दूर चलने पर कुंदन को एक अजीब सी परछाई नज़र आती है।

परछाई देखने के लिए कुंदन जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ता है तो उसकी नज़र उसी स्पेसशिप वाली मुर्गी पर पड़ती है। जो पार्क के पत्थरों के बीच कुछ ढूंढ रही होती है। मुर्गी को देखकर कुंदन एकदम हक्का-बक्का रह जाता है।

कुंदन छुप कर मुर्गी को देखने लगता है, तभी मुर्गी की नज़र कुंदन पर पड़ जाती है। वह कुंदन को वहाँ देखकर डर जाती है और भागने लगती है। मुर्गी को भागते देख कुंदन उसके पीछे भागने लगता है, भागते हुए मुर्गी का पैर एक पत्थर से टकरा जाता है और वह गिर जाती है।

कुंदन मुर्गी को उठाते हुए बोलता है - अरे, कहीं इसे कोई चोट तो नहीं लग गई ? कुंदन यह बोल ही रहा है की तभी सामने से मुर्गी बोल पड़ती है- मुझे कोई चोट नहीं लगी है। मैं बिलकुल ठीक हूँ। मुर्गी को बोलते देख कुंदन हैरान रह जाता है।
कुंदन हैरान होते हुए बोलता है- तुम बोल सकती हो ! लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है ?


तभी मुर्गी बोलती है हाँ और उसे बताती है की वो यहाँ एक चमकीला और कीमती पत्थर ढूंढने आयी है। जो स्पेसशिप में सफर करते हुए मेरे गले से निकल कर नीचे गिर गया और फिर उसे ढूंढने के लिए हम सभी यहाँ उतर गए, लेकिन अब हमें वह नहीं मिल रहा है और हमारे पास उसे ढूंढने के लिए सिर्फ सात दिन का ही समय है।

जिसपे कुंदन उससे पूछता है की सात दिन ही क्यों ?  ये सुन कर मुर्गी सामने से जवाब देती है- क्योंकि, हम सिर्फ सात दिनों के लिए ही अपने गोले से बाहर निकल सकते हैं और सात दिन बात हमें वापस अपने गोले पर जाना पड़ता है।और मुर्गी उसे बताती है की वह नीले रंग का पत्थर है। जिसके ऊपर काले रंग का बिंदु बना हुआ है। तभी सामने से कुंदन कहता है की ठीक है हम कल से साथ में मिलकर उस पत्थर को ढूंढेगे।

अगले दिन से कुंदन सभी मुर्गियों के साथ मिलकर पत्थर ढूंढने में उनकी मदद करने लगता है। इसी तरह देखते ही देखते तीन दिन बीत जाते हैं, लेकिन उन्हें वह पत्थर नहीं मिलता है।

और वह पत्थर ढूंढ़ते ढूंढते तीन दिन बीत जाते हैं, लेकिन पत्थर नहीं मिलता। मुर्गी और कुंदन पत्थर ढूंढने के लिए पूरा समय साथ रहते हैं और बहुत अच्छे दोस्त बन चुके होते हैं। पत्थर ढूंढ़ते हुए मुर्गी, कुंदन को बोलती है- कुंदन, क्यों न तुम अपने दोस्तों को भी पत्थर ढूंढने के लिए बुला लो ! इससे हमारी बहुत मदद हो जाएगी, क्योंकि हमारे पास सिर्फ एक ही दिन बचा है।
मुर्गी की बात सुनकर कुंदन उदास हो जाता हैं और बोलता हैं- तुम्हारे अलावा मेरा और कोई दोस्त नहीं है। मुर्गी बोलती है -क्या, लेकिन ऐसा क्यों ?

कुंदन बोलता है की गाँव के सभी बच्चे मुझे हमेशा छोटा बच्चा बोल कर चिढ़ाते हैं । क्योंकि मेरा कद उन सभी से छोटा है और मैं हमेशा अपनी मम्मी की हर बात मानता हूँ। तभी मुर्गी बोलती है की अपनी मम्मी की बात मानने वाला बच्चा छोटा नहीं समझदार होता है, और तुम बहुत समझदार हो। वह सब मूर्ख हैं, जो इतने अच्छे दोस्त को खो रहे हैं, लेकिन तुम कोशिश मत छोड़ना और अगली बार जब भी किसी बच्चे से मिलो तो बिना डरे और पूरे आत्मविश्वास के साथ बात करना ! जिससे उन्हें भी समझ आये की तुम छोटे बच्चे नहीं हो।

मुर्गी की बात सुनकर कुंदन में आत्मविश्वास आ जाता है, और फिर दोनों पत्थर ढूंढने में लग जाते हैं। रात होने पर जब दोनों थक-हार कर वापस जा रहे होते हैं तभी मुर्गी की नज़र एक पेड़ के नीचे पड़ती है।जहाँ उसे कुछ चमकता हुआ नज़र आता है। मुर्गी बोलती है -कुंदन, वह देखो ! वहाँ कुछ चमक रहा है। दोनों उस चमकती चीज़ को देखने के लिए पेड़ के पास जाते हैं और जैसे ही वह उस चमकती चीज़ के पास पहुंचते हैं, तो ख़ुशी से उछल पड़ते हैं। मुर्गी बोलती है - मेरा पत्थर ! मेरा कीमती पत्थर ! मुझे मिल गया। हमने कर दिखाया।

कुंदन ख़ुशी से कहता है - हाँ दोस्त ! हमने आखिर तुम्हारा पत्थर ढूंढ लिया। वो भी समय से पहले, अब तुम कल आराम से वापस जा सकती हो। यह बोलते हुए कुंदन थोड़ा उदास हो जाता है, लेकिन फिर मुर्गी को खुश देखकर वह भी खुश हो जाता है और वह दोनों वहाँ से चले जाते हैं। अगले दिन मुर्गी ख़ुशी-ख़ुशी वापस अपने घर चली जाती है और कुंदन जब दोबारा गाँव के बच्चों से मिलता है तो बिना डरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात उनके सामने रखता है। जिसके बाद वह सभी बच्चे उससे माफ़ी माँगते हैं और उसके दोस्त बन जाते हैं।

शिक्षा:- तो बच्चों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें हमेशा आत्मविश्वास रखना चाहिए और निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करनी चाहिए ।

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2 March 2019

जादुई चुहिया (भाग - 2)

पिछली कड़ी में आपने देखा कि किस्मत की धनी चुटकी चुहिया घूमते-फिरते राहुल के घर पहुँचती है। चुटकी के पहुँचते ही राहुल के कारोबार में लाभ होना शुरू हो जाता है, लेकिन राहुल की मम्मी चुटकी को दुत्कार कर घर से बाहर निकाल देती है। चुटकी के जाते ही बरकत कम होने लगती है। चुटकी के घर आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है कि एक दिन, चुटकी हमेशा के लिए चली जाती है और राहुल की मम्मी को एहसास होता है कि चुटकी उनके लिए सौभाग्यशाली थी। अब आगे।  

राहुल के घर से जाने के बाद चुटकी चुहिया इधर-उधर भटकने लगती है लेकिन उसे बहुत दिनों तक कुछ खाने को नहीं मिलता, जिससे वो बहुत उदास हो गई| फिर घूमते-घूमते चुटकी एक झोपड़ी के पास पहुँची, जहाँ पति-पत्नी का एक जोड़ा खाना खा रहा था|पत्नी ने चुहिया को देखकर बोली, “ये बेचारी बेचारी भूखी लग रही है।” 




ये कहकर पत्नी ने अपनी प्लेट से रोटी का एक टुकड़ा चुटकी के आगे रख दिया| रोटी के टुकड़े को देखकर चुटकी बहुत खुश हुई और रोटी खाने लगी| जब उसका पेट भर गया तो वह वहाँ से चली गई, और वो सोचने लगी, “इन दोनों के पास ज्यादा खाना नहीं था, फिर भी इन्होंने मुझे खाना खिलाया! यह दोनों बहुत अच्छे है। लेकिन अब मैं इस शहर में नहीं रह सकती। मैं किसी और शहर में जाऊँगी।”

और फिर चुटकी नए शहर चली गई| वहाँ पहुँचकर वो खाने की तलाश में यहां-वहाँ भटकने लगी| भटकते-भटकते वो एक मोहल्ले में पहुँची। वहाँ उसने देखा कि एक घर लका दरवाज़ा खुला है और वो बिना समय गवाए घर के अंदर चली गई, और रसोई में खाना खाने लगी| 

इसी तरह कुछ दिन बीत गए और अब चुटकी मज़े से उस घर में रहने लगी। एक दिन चुटकी रसोई में खाना खा रही थी तभी घर की मालकिन ने उसे देख लिया और गुस्से में चुटकी को भगाने लगी, “भाग यहाँ से, गंदी चुहिया!” इसपर चुहिया वहाँ से भाग गई,और फिर उसने तय किया, “ हे भगवान! ये इंसान आखिर अपने आप को समझते क्या हैं!? एक बेचारी चुहिया को शांति से खाना भी नहीं खाने देते! आज के बाद मैं कभी किसी के घर में नहीं रुकूंगी! एक दिन किसी के एक घर खाना खाऊंगी, तो दूसरे दिन किसी और के घर!”

इसके बाद चुटकी उसी मोहल्ले में कभी किसी के घर खाना खाने लगी, और कभी किसी के घर से खाना खाने लगी। वो जिस भी घर में भी खाना खाने के लिए रूकती उस घर में बरकत होने लगती और उसके जाते ही बरकत कम हो जाती। कुछ समय तक सब ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन मोहल्ले की कुछ औरतों आपस में बातें कर रही थी. एक औरत ने कहा, “आजकल तो मुझे एक छोटी-सी चुहिया ने बहुत परेशान किया हुआ है।” इसपर दूसरी औरत बोली, “वही सफ़ेद चुहिया मेरे घर भी आती है और आते ही रसोई में जाकर खाना खाने लगती है।” तभी तीसरी औरत ने भी कहा, “वो एक जादुई चुहिया है क्योंकि सफ़ेद चुहिया आसानी से देखने को नही मिलती”|  ये सुनकर बोली पहली औरत ने कहा, “ऐसा है तो अगली बार जब वो चुहिया मेरे घर आएगी तो मैं उसे कहीं नहीं जाने दूँगी।” 

लेकिन ये सारी बातें पास खड़ी चुटकी सुन रही थी| ये सुनकर वो बहुत उदास हो गई और बोली, “जितना बड़ा घर, उतने छोटे दिल! इनसे अच्छे तो वही लोग थे जिन्होंने कोई फायदा या नुकसान देखे बिना मुझे अपनी थाली में से रोटी खिलाई थी|” ये सोचकर चुटकी वापिस उसी पति-पत्नी के जोड़े के पास चली गई और उनके साथ रहने लगी। चुटकी की किस्मत ने धीरे-धीरे उन लोगो को धनवान बना देती है, जिसके बाद वो तीनों ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे| 

शिक्षा - हमें हर निर्णय सोच समझकर लेना चाहिए क्योंकि हमारे निर्णय हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं।

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