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Showing posts from March, 2019

भूतिया हवेली

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बहुत समय पहले जयपुर के मंडोर नामक गाँव में एक बहुत बड़ी हवेली थी। उस हवेली में झिंगुरा नाम का एक भूत रहता था, इसलिए गाँव के लोग हवेली के पास जाने से भी डरते थे। उसी गाँव में साहिल, अमित, कोमल और अंश नाम के चार शैतान बच्चे रहते थे, जो बहुत अच्छे दोस्त भी थे। एक दिन वह चारों हवेली के पास खेल रहे थे तभी खेलते-खेलते उनकी बॉल हवेली के अंदर चली गई।

“अरे दोस्तों, यह बॉल तो हवेली के अंदर चली गई, अब हमें नई बॉल खरीदनी पड़ेगी।” साहिल के ऐसा कहने पर अमित ने कहा, “हाँ चलो, जल्दी से बॉल लेकर आते हैं, क्योंकि थोड़ी ही देर में अंधेरा होने वाला है।” तभी कोमल ने कहा, “रुको दोस्तों, बॉल खरीदने की क्या जरुरत है? हम हवेली के अंदर जाकर बॉल ले आते हैं।”

लेकिन अमित को यह बात ठीक नहीं लगी. उसने कहा, “यह तुम क्या बोल रहे हो? क्या तुम जानते नहीं कि इस हवेली में भूत रहता है।” इस पर अंश ने कहा, “हाँ भाई  हम जानते हैं हवेली में भूत रहता है, पर भला वो हमे क्यों कुछ कहेगा? हम तो बस अपनी बॉल ही लेने जा रहे हैं!”

इस तरह सभी ने अमित की बात काट दी, और सभी हवेली में जाने के लिए तैयार हो गए. यह देखकर अमित ने कहा, “ठीक है, अगर …

एलियन मुर्गी

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रामपुर गाँव में कुंदन नाम का एक बच्चा रहता था। कुंदन बहुत ही सीधा और नेकदिल बच्चा था। वह हमेशा हर ज़रूरतमंद की मदद करता था, लेकिन आत्मविश्वास की कमी होने के कारण गाँव के दूसरे बच्चे हमेशा उसे बहुत परेशान किया करते थे। वह किसी को कुछ नहीं कहता था।एक दिन कुंदन बाज़ार में घूमने गया।तभी कुंदन कहता है  अरे वाह ! कितना अच्छा मौसम है। क्यों ना पास वाले मैदान में जाकर कुछ देर खेल लिया जाए, बहुत मज़ा आएगा।

कुंदन यह बोलता हुआ मैदान की तरफ बढ़ता है, की तभी उसका पीछा करते हुए कुछ शरारती बच्चे आ जाते हैं, और रास्ते में उसे परेशान करने लगते हैं , सभी बच्चे ज़ोर से हस्ते है और कुंदन का मजाक उड़ने लगते है। कुंदन रोते हुए वापस अपने घर चला जाता है। जैसे ही कुंदन अपने घर पहुँचता है, तो मम्मी उससे पूछती हैं -क्या हुआ बेटा ? तुम रो क्यों रहे हो ?

कुंदन रोते हुए कहता है-माँ, यह बच्चे मुझसे इस तरह बात क्यों करते हैं ? मैं तो इन सबके साथ दोस्ती करना चाहता हूँ, पर यह सब हमेशा मेरा मज़ाक ही उड़ाते रहते हैं।

तभी उसकी माँ उसे समझती है की कोई बात नहीं बेटा ! एक दिन इन सभी बच्चों को अपनी गलती का एहसास जरूर होगा, लेकिन तुम क…

जादुई चुहिया (भाग - 2)

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पिछली कड़ी में आपने देखा कि किस्मत की धनी चुटकी चुहिया घूमते-फिरते राहुल के घर पहुँचती है। चुटकी के पहुँचते ही राहुल के कारोबार में लाभ होना शुरू हो जाता है, लेकिन राहुल की मम्मी चुटकी को दुत्कार कर घर से बाहर निकाल देती है। चुटकी के जाते ही बरकत कम होने लगती है। चुटकी के घर आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है कि एक दिन, चुटकी हमेशा के लिए चली जाती है और राहुल की मम्मी को एहसास होता है कि चुटकी उनके लिए सौभाग्यशाली थी। अब आगे।  

राहुल के घर से जाने के बाद चुटकी चुहिया इधर-उधर भटकने लगती है लेकिन उसे बहुत दिनों तक कुछ खाने को नहीं मिलता, जिससे वो बहुत उदास हो गई| फिर घूमते-घूमते चुटकी एक झोपड़ी के पास पहुँची, जहाँ पति-पत्नी का एक जोड़ा खाना खा रहा था|पत्नी ने चुहिया को देखकर बोली, “ये बेचारी बेचारी भूखी लग रही है।” 




ये कहकर पत्नी ने अपनी प्लेट से रोटी का एक टुकड़ा चुटकी के आगे रख दिया| रोटी के टुकड़े को देखकर चुटकी बहुत खुश हुई और रोटी खाने लगी| जब उसका पेट भर गया तो वह वहाँ से चली गई, और वो सोचने लगी, “इन दोनों के पास ज्यादा खाना नहीं था, फिर भी इन्होंने मुझे खाना खिलाया! यह दोनों बहुत अच्छे ह…