पंचतंत्र की कहानी - ईमानदारी का इनाम


बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में एक बाबू लाल नाम का पेंटर रहता था| वह बहुत ईमानदार था किन्तु बहुत गरीब होने के कारन वह घर-घर जाकर पेंट का काम किया करता था | उसकी आमदनी बहुत कम थी | बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था | पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी वह सिर्फ दो वक़्त की रोटी ही जुटा पाता था | वह हमेशा चाहता था की उसे कोई बड़ा काम मिले जिससे उसकी आमदनी अच्छी हो पर वह छोटे-मोटे काम भी बड़ी लगन और ईमानदारी से करता था |

एक दिन उसे गाँव के जमींदार ने बुलाया और कहा की उसको, उसने बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है, क्या वह उसका काम करेगा? बाबू लाल ने हाँ में सिर हिलाते हुए जमींदार से कहा की बताइये जमींदार साहब क्या काम करना है? जमींदार ने बाबू लाल को अपनी नाव को रंगने के लिए कहा और ये भी कहा की यह आज ही हो जाना चाहिए | बाबू लाल को पता था की वह यह काम एक दिन में कर सकता है, इसलिए उसने इस काम को करने के लिए हाँ कह दी |
यह काम पाकर बाबू लाल बहुत ही खुश था | इसके बाद जमींदार और बाबू लाल ने नाव को रंगने की कीमत तय कर दी जो की 1500 रूपए थी | फिर जमींदार उसे अपनी नाँव दिखाने नदी किनारे ले जाता है | बाबू लाल,जमींदार से थोड़ा समय मांगता है और अपना रंग का सामान लेने चला जाता है | सामान लेकर जैसे ही बाबू लाल आता है तो वह बिना देरी किये नाँव को रंगना शुरू कर देता है | जब बाबू लाल नाँव रंग रहा था तो उसने देखा की नाव में छेद है | नाव के छेद को ठीक करने काम उसका नहीं था | लेकिन उसको पता था की यदि उसने यह छेद ठीक नहीं किया तो जमींदार या उसके परिवार के साथ कुछ अनहोनी हो सकती है |
इसलिए बाबू लाल पहले तो छेद को ठीक करता है और उसके बाद नाव को रंगना शुरू करता है | नाव को रंगने के बाद बाबू लाल, जमींदार को यह बताने चला जाता है की काम पूरा हो गया है | जमींदार नाव को देखकर बहुत खुश होता है और बाबू लाल को कहा की वह अगली सुबह आकर अपना मेहनताना ले जाये | लेकिन अब तक जमींदार को यह नहीं पता था की बाबू लाल ने नाव का छेद भी ठीक किया था और न ही बाबू लाल ने उससे इस बारे में कोई जिक्र किया |
इसके बाद जमींदार के परिवार वाले उसी नाव में सवार हो कर घूमने चले जाते हैं | शाम को जमींदार का नौकर रामू , जो उसकी नाँव की देख-रेख भी करता था, छुट्टी से वापिस आता है | परिवार को घर पर ना देखकर वह जमींदार से परिवार वालो के बारे में पूछता है | जमींदार उसे सारी बात बताता है | जमींदार की बात सुनकर रामू चिंता में पड़ जाता है | यह देखकर जमींदार उससे चिंतित होने का कारण पूछता है ?
जमींदार के पूछने पर रामू उसे बताता है की नाँव में छेद था | रामू की बात सुनकर जमींदार चिंतित हो जाता है | लेकिन तभी उसके परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती करके वापिस आते हुए दिखाई देते हैं | उन्हें सकुशल देख कर जमींदार चैन की साँस लेता है | इसके बाद जमींदार को पूरी बात समझ आ जाती है की यह छेद जरूर बाबू लाल ने ही ठीक किया होगा जिसके कारण आज मेरे परिवार की जान बच गई |
फिर अगले दिन जमींदार बाबू लाल को बुलवाता है और कहता है उसने बहुत बढ़िया काम किया है | जिससे वह बहुत खुश है | इसके बाद जमींदार उसे मेहनताने के रूप में 6000 रूपए दे देता है | बाबू लाल इतने ज्यादा रुपये देखकर जमींदार से कहता है की बात तो सिर्फ 1500 रूपए की हुई थी तो वह इससे ज्यादा नहीं रूपए नहीं ले सकता |
तब जमींदार उसे बताता है की कैसे उसने नाव का छेद भरकर उसके परिवार की जान बचाई | यदि वह नाव का छेद न भरता तो शायद आज उसके परिवार के सदस्य जिन्दा न होते | उसकी वजह से ही आज वो सब सुरक्षित हैं | इतना कहकर जमींदार, बाबूलाल से वो पैसे ले लेने का निवेदन करता है | इसके बाद बाबू लाल भी वो पैसे लेने से मना नहीं कर सका | जमींदार को धन्यवाद बोलकर बाबू लाल पैसे लेकर खुशी-ख़ुशी अपने घर चला जाता है |

शिक्षा- इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे अपना काम हमेशा पूरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए |


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