Thursday, 25 May 2017

पंचतंत्र की कहानी - होशियार केकड़ा

प्राचीन समय कि बात है। एक घने जंगल में गहरी झील थी जिसमें कई जलचर जैसे मछलियाँ, मगरमच्छ, केकड़े साथ रहते थे। उसी झील के पास एक चालाक बगुला भी रहता था जो झील की मछली और केकड़े खा कर गुज़ारा करता था। परन्तु बढ़ती उम्र के चलते अब उसे शिकार करने में दिक्कते आने लगी थीं।

एक दिन उसके दिमाग में एक तरकीब आई जिससे वह झील की सारी मछलियाँ को पकड़ उन्हें खा सकता था। वह झील के किनारे बैठ झूठ मूठ के आंसू बहाने लगा। उसको रोता देख कई सारी मछलियाँ बगुले के पास आ गई। इतनी सारी मछलियों को अपने करीब देखकर उसका मन ललचाने लगा लेकिन जैसे तैसे उसने अपनी भावनाओं को काबू किया। 

बगुले की दशा देख एक मछली पूछती है - “क्या हुआ बगुला काका ? आप इतना परेशान क्यों हो ?"

अपनी असल भावनाओं को छिपाते हुए बगुला बोलता है - “क्या बताऊं ! आज मैं एक पंडित के पास गया जिसने मुझे बताया कि इस झील का पानी कुछ ही दिनों में सूखने वाला है जिससे यहाँ के सारे जानवर मर जायेंगे। जब से मैंने यह सुना है, तब से मुझे आप सभी कि चिंता सता रही है कि झील के पानी के सूखने के बाद आप सब का क्या होगा?”

 ये सुनते ही वह मछली घबरा जाती है और भाग कर अपनी रानी के पास जा कर उन्हें पूरा किस्सा सुनाती है। रानी उन्हें समझाती है कि हमें अपनी समस्या के समाधान के लिए बगुला काका के पास जाना चाहिए। 


सभी मछलियां एकत्रित होकर बगुले से मिलने जाती हैं और उससे समस्या का समाधान मांगती हैं। इतनी सारी मछलियों को अपने पास देखकर बगुले का मन ललचाने लगता है पर वह अपनी सोच पर काबू रखते हुए बोलता है - “आप सभी इस झील को छोड़ कहीं जल्दी दूर चलें जाएं। पहाड़ी के दूसरी तरफ एक और झील है। इस मुसीबत की घड़ी में मैं आपकी मदद करूँगा।"

सभी मछलियां बगुले की बात मान जाती हैं। उस दिन से बगुला एक-एक मछली को हर रोज़ झील से उठाकर दूर पहाड़ी ले जाने के नाम पर खाने लगता है। एक दिन उस बगुले के कब्जे में एक केकड़ा आता है  और बगुला मन ही मन सोचता है कि कितने दिनों के बाद आज वो किसी केकड़े को खायेगा।

केकड़ा जब पहाड़ी पर मछलियों के कंकाल देखता है तो वह समझ जाता है की बगुला उन्हें धोका दे रहा है। केकड़ा बगुले को अपने पंजो से दबा देता है जिससे वह उड़ नहीं पता और गिर कर मर जाता है। केकड़ा वापस झील जाकर पूरी कहानी बयां करता है और मछलियां बहुत दुखी होती हैं।

 सारांश : हमें कभी भी, किसी पर अँधा विश्वास नही करना चाहिए।

समाप्त!! 
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